सुशील मेहता
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3 days ago
, ऊंट राजस्थान का राज्य पशु है. इसे रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है. हर साल ऊंटों के संरक्षण को लेकर 22 जून को अंतरराष्ट्रीय ऊंट दिवस मनाया जाता है. इस बार साल 2024 को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय कैमलिड्स वर्ष घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2024 को अंतररार्ष्ट्रीय कैमलिड्स वर्ष घोषित किया गया है. दरअसल, इसका उद्देश्य यही है कि दुनिया भर में ऊंट का संरक्षण हो. दुनिया के 90 से अधिक देशों में पाए जाने वाला ऊंट से सिर्फ आजीवीकोपार्जन का ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में बहुत काम आता है. बात करें दुनिया भर में ऊंट की जनसंख्या की तो भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है. भारत में सबसे ज्यादा ऊंट राजस्थान में और खासतौर से पश्चिमी राजस्थान में पाए जाते हैं. सड़कों के बिछते जाल और कम होते रेगिस्तान के चलते ऊंट की जनसंख्या में काफी गिरावट आई है. ऊंट के संरक्षण को लेकर 2014 में राजस्थान सरकार ने इसे राज्य पशु घोषित किया था. पिछले कुछ सालों में देश-विदेश में ऊंट की जनसंख्या में काफी गिरावट देखने को मिली है। : पश्चिमी राजस्थान की अगर बात करें तो यहां की लोगों की दैनिक जीवनचार्य में ऊंट पूरी तरह से शामिल रहा है. रियासत काल के समय ऊंट को विशेष दर्जा हासिल था. अभिलेखागार के निदेशक डॉ नितिन गोयल कहते हैं कि करीब डेढ़ सौ साल पहले रियासत काल के पुराने दस्तावेजों को देखने से मालूम चलता है कि उस वक्त ऊंट का कितना महत्व था. उन्होंने बताया कि एक अभिलेख में उल्लेख है कि किसी गांव में व्यक्ति ने ऊंट को मार दिया. उस वक्त रियासत की ओर से उस व्यक्ति से ₹70 जुर्माना वसूल किया गया. इसके लिए बाकायदा रियासत की ओर से वसूली के लिए सिपाही को भेजा गया और जुर्माना वसूल किया गया। रियासत की ओर से फसल का एक हिस्सा ऊंट के लिए सुरक्षित रखा जाता था. गवार की फसल का एक हिस्सा केवल ऊंट के खाने के काम आता था. इसके लिए भी बाकायदा आदेश है, जिसकी प्रति आज भी अभिलेखागार में सुरक्षित है. वह कहते हैं कि इसके अलावा रियासत के हर गांव में ऊंट के पीने की पानी की व्यवस्था के लिए भी आदेश थे और किसी भी युद्ध और आपात स्थिति में ऊंट महत्वपूर्ण भूमिका में होती थी. आपात स्थिति के लिए वह हर समय तैयार रहें इसको लेकर भी उनको चलवाया जाता था. साथ ही ऊंट के बीमार होने पर उसकी तीमारदारी की पूरी व्यवस्था की जाती थी। रेगिस्तान के जहाज से जुड़ा ऊंट महोत्सव (Camel festival in Hindi) राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। ऊँट राजस्थान का आधिकारिक राज्य पशु है। रेगिस्तान का जहाज़ ऊँट एक सुन्दर और राजसी जानवर है। यह कैमलस प्रजाति से संबंधित है। यह साहसी जानवर स्थानीय लोगों को रेगिस्तान में जीवित रहने में मदद करता है और इस "रेगिस्तान के जहाज" के सम्मान में बीकानेर हर साल ऊंट महोत्सव (Camel festival in Hindi) की मेजबानी करता है। राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग की एक पहल, ऊंट महोत्सव (Camel Festival in Hindi) का उत्सव अन्य उत्सवों के समान है जिनकी राजस्थान मेजबानी करता है। बीकानेर में ऊंट महोत्सव (Bikaner Camel Festival in Hindi) की शुरुआत जूनागढ़ किले के परिसर में ऊंटों के एक रंगीन जुलूस के साथ होती है। स्थानीय भाषा में गोरबंध कहे जाने वाले लगाम और विस्तृत हार पहनकर लुभावने प्रदर्शन किए जाते हैं। विभिन्न प्रकार के ऊँट खेलों और गतिविधियों का भी बड़े जोर-शोर से आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक शामिल होते हैं। ऊंट महोत्सव (Camel Festival in Hindi) कार्यक्रम के दौरान सदस्यों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जैसे रस्साकशी, पगड़ी बांधना और कुश्ती कबड्डी। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग कई चीजों के साथ अपनी लालसा को संतुष्ट करना पसंद करते हैं, ऊंट उत्सव के समय विशेष रूप से उपलब्ध कराई जाने वाली ऐसी ही एक डिश है ऊंट चाय। यह ऊँट महोत्सव कालबेलिया, घूमर आदि जैसे जीवंत प्रदर्शनों के साथ समाप्त होता है। #जागरूकता दिवस