#श्री गणेशाय नमः
⁉️ सांसारिक रुचि का नाश कैसे हो ?⁉️
✍️जितना सुख लिया है, उससे कुछ अधिक दुःख हो जाय तो रुचि नष्ट हो जायगी। यह दुःख होगा विचार से अथवा सत्संग से। इनसे भी न हो तो भगवान् से प्रार्थना करे। *विचार से यह रुचि उतनी जल्दी नहीं छूटती, जितनी जल्दी दूसरों को सुख देने से अथवा भगवान् के शरण होकर उनको पुकारने से छूटती है।* जिनकी भगवान् में रुचि है, भोगों में रुचि नहीं है, उनके पास बैठने से भी रुचि मिटती है! ✍️
⁉️भगवान् सांसारिक रुचि क्यों नहीं छुड़ाते ?⁉️
✍️भगवान् अपनी तरफ से किसी के सुख को नहीं छुड़ाते। यह काम चोर-डाकुओं का है! ✍️
⁉️ हम रुचि छोड़ना चाहते ही हैं, फिर भगवान् क्यों नहीं छुड़ाते ?⁉️
✍️ सांसारिक रुचि तो अधिक है, *पर उसको छोड़ने की चाहना कमजोर है,* तभी भगवान् नहीं छुड़ाते! ✍️