sn vyas
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21 hours ago
#कर्म ही पूजा है #कर्म 🙏🌹🥀 कर्म फल 🥀🌹🙏 इन्सान जैसा कर्म करता है परमात्मा वैसा ही उसे लौटा देता है। यह विधि का विधान है l एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट पर गयी। प्रातः काल (भोर) का समय था तभी उसका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लँगोटी थी। साधु स्नान के पश्चात अपनी दुसरी लँगोटी लेने गया तो वो लँगोटी अचानक हवा के झोके से उड़कर पानी मे चली गयी और बह गयी। सँयोगवस साधु ने जो लँगोटी पहनी थी वो भी फटी हुई थी। साधु सोच में पड़ गया कि अब वह अपने सम्मान की रक्षा कैसे करे l उसे लाज बचाने की चिन्ता सताने लगी l वो चिंताग्रस्त होकर सोचने लगा कि,,,,,, थोडी देर में सुर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड़ बढ़ जाएगी। साधु तेजी से पानी से बाहर आया और पास की झाड़ी मे छिप गया! द्रोपदी यह सारा दृश्य देख अपनी साड़ी जो पहन रखी थी, उसमे आधी फाड़ कर उस साधु के पास गयी और उसे आधी साड़ी देते हुए बोली… तात मै आपकी परेशानी समझ गयी। इस वस्त्र से अपनी लाज ढँक लीजिए। साधु ने सकुचाते हुए साडी का टुकडा ले लिया और प्रसन्नतापूर्वक आशीष दिया और कहा कि,,,,,, 🙏🌹❤️जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचायी उसी तरह एक दिन प्रभु तुम्हारी लाज बचाएगें।❤️🌹🙏 एक दिन जब भरी सभा मे द्रोपदी का चीर हरण होने लगा तो द्रोपदी की करुण पुकार नारद जी ने भगवान तक पहुचायी l प्रभु ने कहा… 🙏🌹🥀 मेरी कृपा कर्मों के बदले में बरसती है, क्या द्रोपदी के खाते में कोई पुण्य है ?🥀🌹🙏 खाते बही खोले गए और जाँचा परखा गया तो उस दिन साधु को दिया वस्त्र का दान हिसाब में मिला और जिसका ब्याज भी कई गुणा बढ गया था। जिसको चुकता करने प्रभु को द्रोपदी की मदद करने आना प़डा , दुस्साशन चीर खीचता गया और कपड़ा बढता ही चला गया। इंसान यदि सुकर्म करे तो उसका फल सूद सहित मिलता है और दुष्कर्म करे तो सूद सहित दण्ड भी भोगना पड़ता है। 🙏🌹🥀जय श्री राधे कृष्ण 🥀🌹🙏