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1 days ago
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) भारतवर्ष की लगभग 90% आबादी शादी विवाह में प्रतिष्ठा प्रतीक के तौर पर सोने की खरीदारी विवशता वश करती है ! एक प्रकार की मानसिक दबाव की स्थिति मे ही करती है ! उनके निजी शौक को पूरी करने की खुशी वाली भावना इसमे शामिल नहीं रहती ! प्राचीन काल मे आर्थिक भविष्य के प्रति आरंभिक दृष्टिकोण रखने वाली यह परंपरा अब प्रदर्शन का रूप ले चुकी है जिसके पीछे जनता मे जागरूकता मे कमी मूल कारण है ! विवाह के अतिरिक्त भी कई समारोहों एवं सम्मान के नाम पर, झूठी संतुष्टि के नाम पर, पूंजी पतियों एवं उच्च वर्ग द्वारा आडंबर करते रहने की आदत अब संपूर्ण समाज को पूरी तरह से अब नकली जीवन के दलदल मे घसीट चुका है ! इसका एकमात्र दीर्घकालिक उपाय समाज के शीर्ष वर्ग द्वारा सादगीपूर्ण जीवनशैली को अपनाकर जागरूकता प्रस्तुत करने से अथवा उनके फिजूल खर्च को एक निश्चित दायरे मे सीमित करने के कठोर कानूनों के निर्माण और अनुशासन पूर्वक अनुपालन करने से ही संभव होगा ! जैसे कि लोन मे दबे पूंजीपतियों को किश्त से अधिक खर्च न करने देने का कानून ! महंगे शौकों का सार्वजनिक प्रदर्शन ही देश की अर्थ व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का व निम्नवर्गीय परिवारों को अनुचित प्रदर्शन की जीवनशैली की तरफ धकेलने का काम कर रही है ! अतः इसका नियंत्रण पूर्णतः सरकार की इच्छाशक्ति पर निर्भर है !