#जय श्री कृष्ण
॥ विजयते् श्रीबालकृष्ण प्रभु ॥
एक दिन, माता यशोदा रसोई में काम कर रही थीं। बालकृष्ण को भूख लगी थी, लेकिन मां के व्यस्त होने के कारण वे क्रोधित हो गए और माखन का मटका फोड़ दिया। वे न केवल खुद माखन खाने लगे, बल्कि बंदरों को भी खिलाने लगे।
ऊखल से बांधना:
जब माता यशोदा ने यह देखा, तो उन्होंने कान्हा को सजा देने के लिए एक लकड़ी के ऊखल से बांधने का फैसला किया।दो अंगुल छोटी रस्सी: एक चमत्कारिक बात यह हुई कि माता यशोदा जितनी भी रस्सियाँ जोड़तीं, वे हर बार "दो अंगुल" छोटी पड़ जातीं। यह इस बात का प्रतीक था कि ईश्वर को केवल शक्ति से नहीं, बल्कि प्रेम से ही बांधा जा सकता है। अंत में, मां का परिश्रम और प्रेम देखकर कृष्ण खुद बंधने के लिए तैयार हो गए।नाम का अर्थ: "दाम" का अर्थ है रस्सी और "उदर" का अर्थ है पेट। क्योंकि उनके पेट पर रस्सी बंधी थी, इसलिए उनका नाम "दामोदर" पड़ा।
जय हो नन्द किशोर।
जय हो प्रभु।
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