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4 days ago
2122 1212 22 बोझ दिल का उतार आये क्या दर्द की हद गुज़ार आये क्या हम समझ लेते है इशारों को दिल कहीं अपना हार आये क्या हर मुहब्बत सफल नही होती तुम मुकद्दर सवार आये क्या उम्र गुस्ताखियों में गुजारी कोई अच्छे विचार आये क्या हिज्र की रात ढल गई तेरी दिल मे फिर भी करार आये क्या चाँदनी मिल गई भले तुमको ज़िन्दगी में मयार आये क्या वस्ल की रातेँ खुश नुमा होगी कोई पल खुशगवार आये क्या ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 27/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️