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❣️शुभ और अशुभ कर्मों का फल❣️
📕गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि शुभ कर्म जिसने किया तो जरूरी नहीं कि सफल हो लेकिन, ऐसे व्यक्ति की कोई दुर्गति नहीं होती है। कृपया इसे अच्छे से समझ लें। श्री कृष्ण जी बहुत अद़्भुत बात कह रहे हैं। शुभ कर्म सफल हो, तब तो दुर्गति होती ही नहीं अर्जुन, लेकिन तू जैसा कहता है, अगर ऐसा भी हो जाए कि तू शुभ की यात्रा पर निकले और तेरा मन साथ न दे; तेरी सच्ची श्रद्धा तो हो, लेकिन तेरी शक्ति साथ न दे; तेरा भाव तो हो, लेकिन तेरे संस्कार साथ न दें; तू चाहता तो हो कि दूसरे किनारे पर पहुंच जाऊं, लेकिन तेरी पतवार कमजोर हो; तेरी आकांक्षा तो दृढ़ हो कि निकल जाऊं उस पार, लेकिन तेरी नाव ही छिद्र वाली हो और तू बीच में डूब भी जाए; तो भी मैं तुझसे कहता हूं कि शुभ कर्म जिसने किया, उसकी दुर्गति कभी नहीं होती है। 📕
🌷शुभ कर्म जिसका सफल हो जाए, उसकी तो दुर्गति का सवाल ही नहीं है। लेकिन शुभ कर्म जिसका सफल भी न हो पाए, उसकी भी दुर्गति नहीं होती। इससे दूसरी बात भी आपको कह दूं, तो आपको जल्दी समझ आ जाएगा। अशुभ कर्म जिसने किया, वह पूरे न भी हो पाए, तो भी दुर्गति हो जाती है। मैंने आपकी हत्या करने का मन में गलत विचार किया और इस अशुभ कर्म को किया भी नहीं, तो भी दुर्गति हो जाती है। 🌷
🤹भीतर उठा अशुभ का विचार भी दुर्गति की यात्रा पर पहुंचा देता है। बीज बो दिया गया। ऐसा क्यों? क्योंकि अंततः हमारा विचार ही हमारे जीवन का फल बन जाता है। फल कहीं बाहर से नहीं आते। हमारे ही भीतर उनकी ग्रोथ, उनका विकास होता है। भगवान श्री कृष्ण का भाव है कि तुम जो भी हो, वह तुम्हारे विचारों का फल हो। अगर दुखी हो, तो अपने विचारों में तलाशना, तुम्हें वे बीज मिल जाएंगे, जो दुख के फल लाए। अगर पीड़ित हो, तो खोजना; तुम्हीं अपने हाथों को पाओगे, जिन्होंने पीड़ा के बीज बोए। अगर अंधकार ही अंधकार है तुम्हारे जीवन में, तो तलाश करना; तुम पाओगे कि तुम्हीं ने इस अंधकार का बड़ी मेहनत से निर्माण किया। 🤹
👩❤️👩हम अपने नर्कों का निर्माण बड़ी मेहनत से करते हैं। दोनों ही बातें सोच लेना। गलत विचार भी काफी है अपनी दुर्गति के लिए। सही विचार भी काफी है अपनी दुर्गति से बचने के लिए। शुभ कर्म, शुभ विचार जिसका सफल हो जाए, उसकी तो दुर्गति का सवाल ही नहीं है। लेकिन शुभ कर्म, शुभ विचार जिसका सफल भी न हो पाए, उसकी भी दुर्गति नहीं होती। इसलिए ध्यान के अभ्यास से स्वयं को जानना नितांत आवश्यक है क्योंकि आत्मबोध ही इंसान के भीतर शुभ विचारों के बीज का रोपण करके शुभ कर्म करवाता है और परमानंद के अनुभव से संपूर्ण मानवता के प्रति समर्पित करता है।👩❤️👩