ज्येष्ठ अधिक मास सोमवती अमावस्या
अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या हर तीन साल में एक बार आने वाली अत्यंत दुर्लभ और पवित्र तिथि है। यह महीना भगवान विष्णु की आराधना और पितरों की शांति के लिए समर्पित होता है, इसलिए इस अमावस्या पर किया गया स्नान, दान और तर्पण कई गुना अधिक पुण्य फल प्रदान करता है。इस बार यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ रही है, जिसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाता है。 इस दुर्लभ संयोग के कारण इस दिन का महत्व काफी बढ़ जाता है。
जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तब इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है और इसे एक शुभ और सौभाग्यशाली दिन माना जाता है। इस विशेष दिन पर, भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और अपने पूर्वजों की पूजा भी करते हैं। हिंदू महिलाएं अपने पति के सौभाग्य और दीर्घायु के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखती हैं। अमावस्या को किए गए स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन मौन रहना बहुत फलदायी होता है। देव ऋषि व्यास के अनुसार मौन रहकर स्नान और दान करने से हजार गायों के दान के समान पुण्य मिलता है।
इसके अतिरिक्त, व्रत रखने वाला व्यक्ति पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करता है और भगवान विष्णु और पेड़ की पूजा करता है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं करती हैं। इसके बाद उनकी क्षमता के अनुसार दान किया जाता है। सोमवती अमावस्या के अवसर पर हजारों लोगों को हरिद्वार में डुबकी लगाते देखा गया। कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर में डुबकी लगाने से इस दिन व्यक्ति को शुभ फल मिलते हैं। इससे अक्षय फल मिलता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक लोगों की भीड़ को पवित्र नदी में स्नान करते देखा जा सकता है। पवित्र श्लोक की प्रतिध्वनि सभी दिशाओं में फैली हुई है। इन कार्यों को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
#शुभ कामनाएँ 🙏