Jagdish Sharma
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5 days ago
।।ॐ।। मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। ममेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥ #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #यथार्थ गीता #🧘सदगुरु जी🙏 अर्जुन ! मेरे में ही मनवाला हो। सिवाय मेरे दूसरे भाव मन में न आने पायें। मेरा अनन्य भक्त हो, अनवरत चिन्तन में लग। श्रद्धासहित मेरा ही निरन्तर पूजन कर और मेरे को ही नमस्कार कर। इस प्रकार मेरी शरण हुआ, आत्मा को मुझमें एकीभाव से स्थित कर तू मुझे ही प्राप्त होगा अर्थात् मेरे साथ एकता प्राप्त करेगा।