Jaswant Dass
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21 hours ago
#GodNightTuesday #Kisan_Majdoor_Bachao_Abhiyan #बाढ़_का_स्थाई_समाधान_Phase2 . सर्व मनुष्य एक प्रभु के बच्चे हैं कोई कहे मेरा राम बड़ा है, कोई कहे खुदाई री। कोई कहे मेरा ईसा मसीह बड़ा है, ये बटा रहे लगाई री। सभी मनुष्य एक परमात्मा की संतान हैं, अज्ञानता वस अलग-अलग धर्मों में मजहबो में जाति में बट गए सबका मालिक एक है, लेकिन उस सच्चे मालिक को पाने की सही विधि किसी के पास नहीं है। परमात्मा के पाने की विधि पूर्ण संत ही बताते हैं । सर्व मनुष्य एक प्रभु के बच्चे हैं, जो दो मानता है वह अज्ञानी है। सिकन्दर लोदी द्वारा रामानंद जी की हत्या के बाद रामानंद जी के शरीर से आधा खून और आधा दूध निकला हुआ था। जब साहेब कबीर से स्वामी रामानन्द जी ने कारण पूछा तो साहेब ने बताया कि स्वामी जी आपके अन्दर यह थोड़ी-सी कसर और रह गई है कि अभी तक आप हिन्दू और मुसलमान को दो समझते हो। इसलिए आधा खून और आधा दूध निकला है। आप अन्य जाति वालों को अपना साथी समझ चुके हो। यह जीव सभी एक हैं। आप तो जानीजान हो। आप तो लीला कर रहे हो अर्थात् उसको गोल-मोल भी कर दिया और समझा भी गए। कबीर-अलख इलाही एक है, नाम धराया दोय। कहे कबीर दो नाम सुनी , भरम परो मति कोय। कबीर-राम रहीमा एक है,नाम धराया दोय। कहै कबीर दो नाम सुनी, भरम परो मति कोय।। कबीर-कृष्ण करीमा एक है,नाम धराया दोय। कहै कबीर दो नाम सुनी, भरम परो मति कोय।। कबीर-काशी काबा एक है, एकै राम-रहीम। मैदा एक पकवान बहु,बैठी कबीरा जीम।। कबीर-एक वस्तू के नाम बहु, लीजै वस्तू पहचान। नाम पक्ष नहीं कीजिये, सार तत्व ले जान।। कबीर- सब कहुका लीजिये, सांचा शब्द निहार। पक्षपात ना कीजिये, कहै कबीर विचार।। कबीर-राम कबीरा एक है, दूजा कबहु ना होय। अंतर टाटी कपट की, ताते दिखे दोय।। कबीर-राम कबीरा एक है, कहन सुनन को दोय दो करी सोई जानइ , सद्गुरु मिला न होय।। रामानंद जी ने सिकंदर को सीने से लगाया तथा उसके बाद हिन्दू तथा मुसलमान को तथा सर्व जाति व धर्मों के व्यक्तियों को प्रभु के बच्चे जानकर प्यार देने लगे तथा अपने औपचारिक शिष्य वास्तव में परमेश्वर कबीर साहेब जी का धन्यवाद किया कि आपने मेरा अज्ञान पूर्ण रूप से दूर कर दिया। हम एक पिता प्रभु की संतान हैं, मुझे दृढ़ विश्वास हो गया। दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के साथ उनका धार्मिक गुरु शेखतकी भी बनारस गया था। वह रैस्ट हाऊस(विश्राम गृह) में ही रूका था। क्योंकि शेखतकी हिन्दू संतों से बहुत ईष्र्या करता था तथा उन्हें व उनके शिष्यों को काफिर कहता था। इसलिए स्वामी रामानन्द जी के आश्रम में जाने से इंकार कर दिया था। राजा सिकंदर लोधी के साथ स्वामी रामानन्द जी के आश्रम में नहीं गया था। महाराजा सिकंदर ने विश्राम गृह में आकर परमेश्वर कबीर साहेब जी द्वारा अपने असाध्य रोग का निवारण केवल आशीर्वाद मात्र से करने तथा स्वामी रामानन्द जी को पुनर् जीवित करने की कथा खुशी के साथ अपने धार्मिक पीर शेखतकी को बताई तथा कहा कि पीर जी मैं पूर्ण रूप से स्वस्थ हूँ। मेरे किसी अंग में कोई पीड़ा नहीं है। रात्रि का समय था। प्रभु कबीर साहेब जी सुबह आने की कहकर अपनी कुटिया पर चले गये थे। शेखतकी ने बादशाह के मुख से अन्य संत की भूरी-भूरी प्रशंसा सुनी तो अन्दर ही अन्दर जल-भुन गया। रात भर करवटें बदलता रहा। परमेश्वर कबीर साहेब जी को नीचा दिखाने की योजना बनाता रहा। Sant Rampal Ji Maharaj #कबीर