पूर्ण की गुरु पहचान
रामचरितमानस, उत्तरकाण्ड, दोहा 92 (ख), चौपाई 3 में लिखा है :
गुरु बिन भव निधि तरै न कोई, जौ बिरंचि संकर सम होई। अर्थ : गुरु के बिना मनुष्य भवसागर (जन्म-मृत्यु के चक्र) को पार नहीं कर सकता, भले ही वह ब्रह्मा और शंकर के समान ही क्यों न हो।
अधिक जानकारी के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल
संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र
+91 7496801823
Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये
GET IT ON Google Play
#🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏