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Lakshmi
@287896346
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Lakshmi
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1 days ago
#मेंटल_हेल्थ_मैटर्स 😐🙂‍↕️ मानसिक स्वास्थ्य समस्या....एक ऐसी समस्या जिस पर न तो कोई समय रहते ध्यान देता हैं....न उसके बारे में बात करना चाहता है....यहां तक कि परिवार के लोग भी व्यवहार में बदलाव नोटिस करने के बावजूद इग्नोर कर देते हैं....कुछ अलग लगे तो कृपया ध्यान दें क्योंकि जब कोई असमय चला जाता है तो बहुत तकलीफ होती हैं 🥹🥹 जहां परिवारजनों के मोरल सपोर्ट की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है....हम वहीं पर सामने वाले को अकेला छोड़ देते हैं। कई बार हम बीमारी को पेशेंट के जिद्द, अक्खड़पन, बदतमीजी और बहुत सारी बातों से जोड़कर देखने लगते हैं और ये सोचना ही नहीं चाहते कि हो सकता है....कोई परेशानी हो....किसी तरह का तनाव हो....कहीं किसी बात पर दिमाग अटक गया हो....जहां से निकलना मुश्किल हो रहा हो....लोग क्यों बात नहीं करते....क्यों थोड़ा अंदर झांकने का प्रयास नहीं करते 🥹🥹 एक लड़की जो स्वयं मनोचिकित्सक थी....उसके पिता भी मनोचिकित्सक ही हैं....फिर भी किसी को समझ में नहीं आया होगा समय रहते या कई बार समस्या इतनी ज्यादा गंभीर होती है कि कोई इलाज ही संभव नहीं होता होगा....कोई चाहकर भी कुछ भी नहीं कर पाता होगा....पेशेंट के दिमाग से सुसाइडल थॉट्स बाहर ही नहीं निकलते होंगे 😐😐 मन बहुत विचलित हो रहा है....जिस लड़की ने बहुत से लोगों को तलाक के बाद होने वाले मानसिक तनाव से उबरने में मदद की होगी वो खुद ही तलाक से उबर नहीं पाई.....तलाक के वजह से ही उसकी खुद की जिंदगी खत्म हो गई। जब किसी व्यक्ति से इतना ज्यादा लगाव हो कि हम अलग होना बर्दाश्त ही न कर पाएं तो थोड़ी एडजस्टमेंट कर लेनी चाहिए....जो हुआ ठीक नहीं हुआ....ऐसे नहीं जाना था 😐😐 #Gurgaon #Psychiatrist #mentalhealth #mentalhealthawareness #mentalhealthmatters #nonfollowers #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌙 गुड नाईट
Lakshmi
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1 days ago
पूजा की सामग्री नादियो में ना फेके🙏 #ram ram
Lakshmi
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2 days ago
"वह दिन जब एक पुरुष ने पहली बार अपनी पत्नी का दर्द देखा" घर वही था। दीवारें वही थीं। लोग वही थे। लेकिन उस दिन उस घर का अर्थ बदल गया था। क्योंकि कभी-कभी घर नहीं बदलता, इंसान की आँखें बदल जाती हैं। और जिस दिन आँखें सच देख लेती हैं, उस दिन कई पुराने भ्रम टूट जाते हैं। एक स्त्री जब माँ बनती है, तो केवल एक बच्चे को जन्म नहीं देती। वह अपने शरीर का एक हिस्सा छोड़कर, अपनी नींदों का बलिदान देकर, अपने डर को छुपाकर एक नए जीवन को संभालने लगती है। लोग उसके हाथों में बच्चे को देखते हैं। लेकिन कोई उसके काँपते हाथ नहीं देखता। लोग उसकी मुस्कान देखते हैं। लेकिन कोई उसकी थकी हुई आँखों के पीछे छिपी हुई रातें नहीं देखता। वह रातों में उठती है। कभी दर्द से। कभी चिंता से। कभी केवल इसलिए कि उसे लगता है कि अगर वह एक पल भी कमजोर पड़ी, तो सब बिखर जाएगा। उसके शरीर ने बहुत कुछ सहा होता है। लेकिन समाज उससे उम्मीद करता है कि वह तुरंत पहले जैसी हो जाए। जैसे उसके भीतर कोई तूफान आया ही न हो। जैसे वह इंसान नहीं, केवल एक जिम्मेदारी हो। वह रसोई में खड़ी होती है तो उसके पैर दर्द करते हैं। वह मुस्कुराती है तो होंठ मुस्कुराते हैं, मन नहीं। वह सबके लिए सोचती है, लेकिन कई बार उसके लिए सोचने वाला कोई नहीं होता। गहरा दर्द तब नहीं होता जब कोई मदद नहीं करता। गहरा दर्द तब होता है जब कोई देखता है कि वह टूट रही है, फिर भी कह देता है... "इतना भी क्या मुश्किल है?" एक स्त्री को अक्सर काम से ज्यादा उन शब्दों से चोट लगती है जो उसके संघर्ष को छोटा कर देते हैं। क्योंकि थकान शरीर की हो तो आराम से दूर हो सकती है। लेकिन जब अपने ही लोग उसके दर्द पर विश्वास करना छोड़ दें, तो मन थक जाता है। वह अपने आँसू धीरे-धीरे छुपाना सीख जाती है। क्योंकि उसे डर होता है कि कहीं उसे कमजोर न समझ लिया जाए। कहीं यह न कह दिया जाए कि "दूसरों ने भी तो किया है।" लेकिन कोई यह नहीं समझता कि हर स्त्री की लड़ाई अलग होती है। हर शरीर की सहनशक्ति अलग होती है। हर मन की सीमाएँ अलग होती हैं। पुरानी पीड़ा को परंपरा बनाकर अगली पीढ़ी को देना कोई महानता नहीं है। एक दिन एक पुरुष ने अपने घर में पहली बार यह देखा। उसने देखा कि उसकी पत्नी केवल थकी हुई नहीं थी। वह भीतर से अकेली हो चुकी थी। उसकी चुप्पी में शिकायत नहीं थी। उसकी चुप्पी में एक आखिरी उम्मीद थी। शायद कोई आएगा। शायद कोई समझेगा। शायद कोई कहेगा... "तुम्हें भी संभालने की जरूरत है।" उस दिन उस पुरुष ने जाना कि पति होना केवल साथ रहने का नाम नहीं है। पति होना उस समय खड़े होने का नाम है, जब आपकी पत्नी खुद के लिए खड़ी होने की स्थिति में न हो। एक पुरुष की असली परीक्षा तब नहीं होती जब वह दुनिया से लड़ता है। उसकी असली परीक्षा तब होती है जब वह अपने घर के भीतर किसी अपने के आँसू पहचानता है। क्योंकि कई बार स्त्री को बड़ी-बड़ी बातें नहीं चाहिए होतीं। उसे बस यह महसूस होना चाहिए कि उसका दर्द किसी के लिए महत्वपूर्ण है। कि कोई उसकी थकान को आलस नहीं समझेगा। कि कोई उसकी चुप्पी को जिद नहीं कहेगा। कि कोई उसके टूटने से पहले उसका हाथ पकड़ लेगा। रिश्ते तब नहीं बचते जब लोग अपनी-अपनी सही साबित करने में लगे रहते हैं। रिश्ते तब बचते हैं जब कोई एक व्यक्ति रुककर पूछता है... "तुम सच में कैसी हो?" एक माँ से हर कोई बच्चे के बारे में पूछता है। बहुत कम लोग माँ से पूछते हैं कि वह कैसी है। एक पत्नी से हर कोई घर की उम्मीद करता है। बहुत कम लोग पूछते हैं कि उसका मन किस हाल में है। यही छोटी-सी कमी कई बार वर्षों का दर्द बन जाती है। जिस स्त्री ने आपके घर को अपना जीवन दिया है, उसे केवल जिम्मेदारियों की सूची मत दीजिए। उसे अपना हाथ दीजिए। उसे अपना समय दीजिए। उसे यह भरोसा दीजिए कि इस दुनिया में कम से कम एक जगह ऐसी है जहाँ उसे मजबूत बनने का अभिनय नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि घर वह जगह नहीं जहाँ लोग केवल साथ रहते हैं। घर वह जगह है जहाँ कोई टूटे तो दूसरा उसे गिरने से पहले पकड़ ले। और जिस दिन एक पुरुष यह समझ लेता है, उस दिन वह केवल पति नहीं रहता। वह अपनी पत्नी के जीवन का सबसे सुरक्षित स्थान बन जाता है। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌙 गुड नाईट
Lakshmi
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2 days ago
नमन है, एक ऐसी भारतीय नारी को जिन्होंने पति की महान प्रतीक्षा में जीवन गुजार दिया, ना शिकवा, ना गिला किया, और पति को महान बनते एवं देखते हुए जीवन गुजार दिया। लिबरल और "पालतु "मीडिया "सेकुलर और गटर के कॉकरोचो क़ो यह समझ में नहीं आएगा! 🙂 🌹मोदी v जसोदाबेन 🌹 कोई यूं ही नरेंद्र मोदी नहीं बनता__! उनके पीछे होता है, एक पतिव्रता स्त्री का अनदेखा त्याग विरह और वफादारी, देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति की पत्नी... फिर भी एक निर्वासित जीवन__! कल्पना कीजिए..! आपका विवाह हो चुका है। जिस पुरुष के साथ सात फेरे लिए थे, वो एक दिन देश सेवा पर निकल पड़ता है और प्रधानमंत्री भी बन जाता है। पूरा देश उसे जानता है, दुनिया उसके स्वागत में लाल कालीन बिछाती है, लेकिन आप..! आप वहीं हैं, जहाँ दशकों पहले थीं। ना कोई प्रधानमंत्री आवास, ना कोई राजनीतिक पद, ना सत्ता का वैभव, ना कैमरों की चमक। सिर्फ एक नाम..! जसोदाबेन मोदी। हम राजनीति में "नरेंद्र मोदी' का मूल्यांकन कर सकते हैं। उनके "फैसलों से "सहमत 'या असहमत हो सकते हैं। "लेकिन 'एक स्त्री के जीवन को राजनीति के चश्मे से मत देखिए। जसोदाबेन की कहानी किसी फिल्मी प्रेम कथा जैसी नहीं है। यह उस भारतीय स्त्री की कहानी है, जिसने विवाह किया, लेकिन वैवाहिक जीवन नहीं पाया। जिसने पति को पाया, लेकिन साथ नहीं पाया। जिसके हिस्से में अधिकार से अधिक प्रतीक्षा आई। यह भी कहा जाता है कि, वे आज भी उनके लिए व्रत रखती हैं?? सच पूछिए, तो यह राजनीति का विषय नहीं, त्याग और आस्था का विषय है। आज के दौर में देखिए, कुछ महीनों की दूरी भी रिश्तों को तोड़ देती है। छोटी छोटी बातों पर एक दूसरे की जान ले लेते हैं! पति पत्नी किसी को यह बताने की जरूरत नहीं है कि, किस तरह का समाज हो गया है, आजकल और आजकल समाज में क्या चल रहा है! बहुत सारी घटनाएं देखते हैं, न्यूज़ पढ़ते हैं, हम लोग नीला ड्रम काफी मशहूर हो चुका है और आए दिन पति-पत्नी एक दूसरे को कोर्ट में घसीटते रहते हैं! लोग छोटी छोटी बातों पर तलाक ले लेते हैं। छोटी छोटी बातों पर एक दूसरे की जान ले लेते हैं! आजकल पति पत्नी, लेकिन एक महिला ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा बिना किसी सार्वजनिक शिकायत के गुज़ार दिया__। यह हर किसी के बस की बात नहीं है। मुझे सबसे अधिक पीड़ा तब होती है, जब सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री का नाम हर दूसरे दिन किसी दूसरी महिला के साथ जोड़कर मीम बनाए जाते हैं। कभी मेलोनी..कभी स्मृति ईरानी..कभी कंगना रनौत..! राजनीतिक व्यंग्य अपनी जगह है, लेकिन एक पल के लिए उस महिला के बारे में भी सोचिए, जो कानूनी रूप से आज भी उनकी पत्नी है। क्या उसके मन में कभी कोई टीस नहीं उठती होगी__?? क्या उसे कभी यह सब देखकर दुख नहीं होता होगा__?? हम नहीं जानते कि, उनके मन में क्या है?? लेकिन इतना ज़रूर जानते हैं कि, किसी भी पत्नी के लिए अपने पति का इस तरह सार्वजनिक मज़ाक देखना आसान नहीं होता। जसोदाबेन ने सत्ता नहीं माँगी। उन्होंने कोई राजनीतिक लाभ नहीं लिया। उन्होंने कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सुर्खियाँ नहीं बटोरीं। उनकी पहचान आज भी उनके अपने जीवन से कम और उनके पति के नाम से अधिक जुड़ी हुई है। यही शायद उनके जीवन का सबसे बड़ा विरोधाभास है। एक तरफ़ वह देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति की पत्नी हैं..! दूसरी तरफ़ उनका जीवन एक साधारण भारतीय महिला जैसा है। इतिहास नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा। लेकिन शायद इतिहास के हाशिए पर एक नाम और भी दर्ज रहेगा..! जसोदाबेन मोदी। एक ऐसी स्त्री, जिसने सत्ता नहीं देखी..! लेकिन प्रतीक्षा देखी। वैभव नहीं देखा..! लेकिन विरह देखा..! और शायद यही उनके जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। इसलिए सनातन धर्म में स्त्री को देवी का दर्जा दिया गया है, एहसास होता है, उनके बारे में देखकर पढ़कर और सुनकर इतना बड़ा त्याग, कोई पवित्र और महान आत्मा ही कर सकती है! सम्माननीय और पूजनीय है, वो! 🙏 नारी तु नारायणी, आप जैसी देवियों के लिए ही लिखा गया है _! 🙏 #nam #namo