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12 hours ago
🌹🌱🌾 ●●●●●●● इन पलकों को उठाइये, और जरा नजरों को खोलिये। दबाकर रखिये फुलझड़ीयाँ दिल में, रहम कीजिये और आँखों से भी बोलिये। *** बिना पूछे बिना रोके-टोके कभी भी चले आते हैं, इन हवाओं को भला कौन रोके...... कम्बख़्त कभी भी कहीं भी दिल में समा जाते हैं।। *** तुम कहो कछु बातें और कछु मै भी कह देता हूँ, तुम रहो इस दिल में और संग मै भी रह लेता हूँ।🍇 *** लटकती जुल्फें मैडम की जब नजरों संग परेशान करे, आप ही बताइए साहेब शख्स कबतक नियत बहाल करे। *** दिल जैसा था आज भी वैसा ही है समझा गया, पुराणा इश्क आज फिर से खुद को ही दुहरा गया। *** कल परेशान थे बहुत और आज गरज गई, चाहती बहुत है पगली बुँद-बूँद बन के बरस गई। *** देखा पहली बार महसूस हुई ये जिंदगी करीब से, मेमसाहेब कभी इश्क कीजिये तो आप भी दिल-ए-मरीज से। *** यूँ तो ये हसीन मुस्कुराहट ही अक्सर परेशान करते हैं, पर कभी-कभी आँखों में कजल भी कत्लेआम करते हैं। *** बस इन्ही ख्वाबोँ में ही, हरवक्त उलझा रहता है दिल! पगली खूबसूरत से दिल से, पता नही कब कितना...... प्यार करे कैसे रोज कत्लेआम करे!💞 *** .....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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12 hours ago
🌹🌱🌾 ●●●●●● सोंचिये सुनिए व समझिये, पर नब्ज पूछकर.... यूँ जिंदगी आसान मत कीजिये। *** बड़ी कसमकस हो जब दिल में, धड़कनो के रंग भी बेहिसाब कहते हैं। *** अब तो रहम कर दीजिये जनाब, बच्चा दिल है पर यूँ भी नादान नही। *** अंधेरी ये रात और बारिश की बूंदें, यूँ मुस्कुराओ कि दिल बेताब हो जाए। *** जज्बातों के दौर में है कहाँ कोई हमदम, ये रास्तें हसीन पर मंजिलें बेलगाम होती हैं।😉 *** चलो करलो शिकायत आज फुर्सत मे हैं हम, फिर कभी न कहना बड़े होशियार हो तुम। *** भरी महफिल में चाहे जैसे भी आजमाइये, पर जले दिल पर प्यार का मरहम मत लगाइये।😉 *** सोंचता हूँ मै कुछ सवाल लिख दूँ, अपने मन के कुछ ख्याल लिख दूँ। जिसे देख कलियाँ भी मुर्झा जाएँ, तब क्यूँ न तुम्हे मै गुलाब लिख दूँ।। *** दिल के कोने में रख दो कुछ ऐसा, ताउम्र सिर्फ तुम्हारा ही इन्तजार करूँ मैं! *** हूँ तुम्हारा पर दिल पे अख्तियार नही, लोल प्यार लूटानेे का अंदाज अच्छा है!😉 *** लोग कहते हैं कि सिर्फ चेहरे हसीन होते हैं, कभी अदाएँ भी देखिये सारे वहम टूट जायेंगे। *** दिल को चैन नही किसी को खबर हो गया है, बेदर्दी नींद आज तो तू भी बेखबर हो गया है।💕💞 *** ..............✍रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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1 days ago
🌹🌱🌾 ●●●●●● बस खामोशी से चलिए, बढ़िए आगे और कदमताल कीजिए, जालिम पीछे मूड़-मूड़ कर, न यूँ दिल को बेहाल कीजिए। *** संगदिल गजब की बात कहते हो, जब भी कहते हो जज्बात कहते हो। *** आँखें अब भी कहती हैं, अब होश में तो आओ। कुछ-कुछ ही अब ख्याल करो, जालिम हमे इतना न तड़पाओ। *** ये सत्संगी नजरें भी सही में, कभी-कभी ही ख्याल करतीं हैं। जब भी आजमाइये सादगी से, कसम से बहुत ही बेहाल करती हैं।😉 *** यूँ हुनरमन्द के हर हुनर को, भला कोई कैसे परखे। जुल्फों के बादल नैनो से बारिश, कब-कब बरसे कैसे-कैसे बरसे।😉 *** खुद संग जो बुरा हुआ, कमबख्त इश्क बेवफा हो गई। गर जो कुछ अच्छा होता, तब पता नही क्या हाल होता। *** क्या ख़ाक तरक़्क़ी की दुनिया ने साहब मरीज़-ए-इश्क़ तो आज भी लाइलाज बैठे हैं। *** तबियत खराब थी ना कोई दवा, ना कोई दुआ ही काम आया। बेगम जब दिनभर लड़ी मियाँजी से, लोल तब जाकर कहीं आराम आया। *** कागजों पे लिख के ज़ाया करे हरबात, वो बुझे हुए शख्स नही..... साहब दिलों पे लिखने का, लाजवाब हुनर भी बखूबी आता है हमे। *** इस दिल पे लगा कर मुहर, अब कहाँ जाते हो हमदम... मुस्कुराओ अभी तो धड़कनों में, छुपे हए हरएक जज्बात बाकी हैं। *** जनाब रूठिये और हमदम को, कभी-कभी मनाने का मौका दीजिये। ये इश्क हो जरा चटपटा और मजेदार, कभी यूँ भी मीठा-मीठा सा धोखा दीजिये। *** बादल बारिश और फिर, इन फुहारों से ही ख्याल कीजिये, बस यूँ ही आजमाइए दिल को, और झमझमा कर ही कमाल कीजिए।💕💞 .........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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2 days ago
🌹🌱🌾 ●●●●●● खुश्क गर्मी जो यूँ ही, बहते हवाओं में है! बहकते हुए कदम जो, इन फिजाओं में है! इतना भ्रम जो फैला, तुम्हरी निगाहों में है! उंगलियों को चटकाती, तल्खियाँ जो आहों में है! दिल न बहके फिर से, अब यूँ ही हर गली-गली... पगली सम्भाल भी लो, आज से ये दिल... फिर से तुम्हरी पनाहों में हैं! .......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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2 days ago
🌹🌱🌾 ●●●●●● हे उपर वाले कुछ ऐसे भी गुमनाम न कर, रहने दे बादलों की तरह ही हमे............ इस दामन को महकते फूलों के नाम न कर। *** ना कभी जाते जैसे यादों के वादे हैं, हमेशा ही लगते हैँ ताजे....... पता नही कैसे-कैसे तेरी यादों के इरादे हैं। *** एक मधुर सरस धुन को यूँ बजाना तुम, पंख लगा मेरे ख्वाबों को यूँ सजाना तुम। मन मेरा दिल तुम्हारा फिर साथ-साथ, कभी याद बेइन्तहाँ आए तो बस आजाना तुम। *** उसके इश्क के बारिश मे कुछ ऐसे भिगते जाना है, लाल जलेबी है भाया खाना है और पछताना है। *** सुहाना दिन है सुहानी रात है, जैसे सुहाना हुआ ये जमाना है। तारीफ तो हुई है बस तुम्हारी, बाकी मौसम तो एक बहाना है। *** आज फुर्सत मे जमकर के, एकदूजे को बेकरार करते हैं। चलो फिर से आपस मे, एक प्यारा सा तकरार करते हैं। *** इतनी बेरहम निगाहेँ कभी हमने सोंचा था, कैसे कहें जनाब कि फूलों से चोट नही लगते।😘 *** बीतते वक्त के साथ वो , नजर आए कुछ इस अंदाज से। जैसे नजरें उसकी , मिलगई हो किसी अंजान से। देखकर उसका यूँ मुड़जाना, एक तसल्ली दे गया यारों। रिश्ता तो आज भी बहुत गहरा है, पगली का इस दिल-ए-नादान से।💕💞 *** ......✍रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💝 शायराना इश्क़ #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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3 days ago
"स्वप्नदर्शी" ●●●●●●● 🌹🌱🌾 सुंदरता की एक प्रतिमूर्ति, कुछ ऐसे दिल पर छाया है। आसमान से चाँद उतरकर, इस धरा पर जैसे आया है। बनाया होगा जिसने भी तुमको, जैसे कला जगत का कामी है। अर्पण किया हो जैसे सबकुछ ही, वो सुंदरता का जैसे अनुगामी है। बूँद-बूँद अपने हरपल का, स्वभाव स्वरूप ही लुटाया है। स्वर्ग से जैसे माँग देवो से, किसी अप्सरा को जमीन पर लाया है। खोकर अपना सुधबुध सारा, सधे हाथों को जैसे चलाया है। वो शिल्पकार ही अद्भुत है, जिसने इतना सुन्दर तुम्हे बनाया है ।1। चंचल चितवन अनिन्द्य सुंदरी, बेहोश करती नजर कजरारी है। अवाक रहे हर मनुज देख तुम्हे, तिरछी नजर ही इतनी प्यारी है। ओठ तुम्हारे जैसे कली कोंपल, मन में स्वाद मधुरतम भरते हैं। तारतार हर जनजन ही होता, हरमन को ही ये बेकाबू करते हैं। रेशमी कोमल ये बाल तुम्हारे, हरदिल में आह जगाते हैं। नाक गाल कुछ ऐसे दिखते, हरदिल में ही अगन बढ़ाते हैं। दमकता हुआ ये चेहरा तुम्हरा, जैसे दिल में धड़कन की आशा है। अंगप्रत्यंग ही है संगमरमर सा, जैसे खिले गुलाब की ही परिभाषा है ।2। देख तुम्हे दिल थम सा जाए, धड़कन भी चुप सा हो जाए। क्या करे भूल के सबकुछ, सब तुम्हरा ही अनुरागी हो जाए। असाध्य रोग उपजाए सब में, हरमन को ही पागल करते हैं। लूट ले प्रेम से जनजन को, कुछ ऐसे सब आतुर ही रहते है। योगी योग को भूल जाए, वैरागी भी अनुराग करे। ऐ सुंदरी तुम्हरे एकपल को, अचेत होकर भी प्रयास करे। समझ में आए कुछ भी ना, मुँह से कुछ भी बोले ना। बंद कर ले जो हृदय में तो, आँखों को कभी खोले ना ।3। मन पुल्कित हो तन पुल्कित हो, तो उपहास नही कभी होता है। दैव ही जिसे भला वर्णित करे, दिल में अवकाश नही तब होता है। होश न रहता मन में कभी, मन पागल सा होता है। सुंदरता ये चीज ही ऐसी, हरजन को ही पागल करता है। दोष नही है इस दिल का भी, भला अभिमान कहाँ फिर होता है । प्रत्यक्ष खड़ी हो परी सदृश जो, भला तिरस्कार कहाँ कभी होता है। मन सुन्दर हो तन सुन्दर हो, तो दैव ही साथी होता है। मुलभुत तो ये सुंदरता ही है, जिसका हरमन ही अभिलाशी होता है ।4। अहो सुंदरी तनिक देख इधर भी, हमपर भी तनिक उपकार करो। तीर नजर को खिंच हृदय तक,। इस घयल पर तनिक तुम वार करो। ऐ मोहिनी इन घनेरी बादलों को, तनिक इस मुखरे पे भी छाने दो। अपने प्रेम के कुछ बूँद-बूँद कोे, इस हृदय में भी तो समाने दो। हे कामिनी इस पीड़ हृदय को, अपने नयण झील में रहने दो। अपने हृदय के गहन समुन्द्र से, अब कुछ धार प्रेम के बहने दो। मन पुल्कित हो तन पुल्कित हो, कुछ ऐसे भी हमपे आधार धरो। थाम हृदय को हमरा भी........ कुछ अपना भी हमपे आभार करो ।5। अपने प्रेम के नदी धार कोे, कुछ इस प्यासे मन के नाम करो। बरसते अपने प्रेम बूंदों से, इस दिल पर भी सन्धान करो। अहो सुंदरी तनिक देख इधर भी, इस घायल का तनिक उपचार करो। तीर नजर को खिंच हृदय तक, इस घयल पर तनिक तुम वार करो। तीर नजर को खींच हृदय तक...... इस घायल पर तनिक तुम वार करो।।।💕💞 .........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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4 days ago
"अदा" ●●●●●● 🌹🌱🌾 नई नवेली अजब अठखेली, तब से मन भरमाया है। नही रहा हूँ होश मे मै, जब से तुमको पाया है। दिल-मन किनारे पता नही, एकाएक कहाँ से आइ तुम। मैं देखता पिछे को था, और सामने से टकराइ तुम। समझ पाता जबतक कुछ भी, गुस्से मे मुँह खोल पड़ी। मेरी नजर भले पिछे थी, और गलती मेरी है बोल पड़ी। ये अदा ना देखा था, लिया फाँस मे ऐसे जकड़। मै सोचता जबतक कुछ भी, तिरछी बातों मे लिया पकड़।1। दिन हीन दिखने लगा, और दया ना फिर आई तुम्हे। ठेठ हृदय के इस पंक्षी पे, बिजली ऐसे गिराइ प्रिय। कभी तोर से कभी जोर से, मुझको यूँ धमाके लगी। लगा जैसे मै मुजरिम हूँ, और तुम शब्द बाण बरसाने लगी। मेरा मन दंग रहा फिर, समझ मे कुछ ना आया। हे विधाता क्या हुआ, ये कहाँ मुझे फँसाया। मन ही मन उलझा रहा, बक बक भी सुनता रहा। प्रभु क्षमा करो भी अब, ये मन ही मन कहता रहा।2। कहा अनाड़ी फिरते हो, ना जाने कहाँ से आए तुम। सारे लड़के एक ही होते, जानबूझ ही टकराए तुम। तभी समझ मे आया कुछ, ये लड़की कुछ भरमाती है। नजर चुराकर पिछले को, कुछ अजीब तरह मुसकाती है। कभी ताव मे आती है, कभी नर्म बन जाती है। अगर बुरा हूँ इतना तो, ये छोर क्यों नही जाती है। उसकी सहेली को देखा जब, मैने तब कुछ जान लिया। इस गोरी को कही देखा है, मन ही मन पहचान लिया।3। मन मे आया तब कुछ यूँ, कुछ प्रसाद इसे दे देता हूँ। बहुत तंग कर चुकी है ये, दो थाप इसे जर देता हूँ। बहुत चाहा पर दिल भी, कभी हाँ नही कर पाया। हरबार सा एकबार फिर से, मैं ये उपकार नही कर पाया। कहाँ हुआ आज तक ये कि, पुरुष नारी से शर्माया है। पर सच ये भी तो है कि, पुरुष नारी से भरमाया है। उसकी मुस्कान के आगे युँ, मै भी फिर तब टूट गया। चलो जाव हटो भी अब, कहके सबकुछ भूल गया।4। तभी देखा दोनो को ही, कुछ बात थी जो मुस्काने लगी। मुझे देख देख कर फिर क्यों, बड़े जोर खिलखिलाने लगी। हाय समझ मे आया तभी, ये ढोंग बना एक झोंका है। उल्लु बना रही थी तब से, ये चंचलता का एक धोखा है। ये भाव क्यों ना समझ पाया, आखिर मै भी धँस हीं गया। बड़ा उड़ता फिरता था, आज यहाँ फँस हीं गया। क्या कहुँ मै क्या करूँ, सर को तब खुजलाने लगा। ना समझ आया कुछ तो, फिर उन्ही के संग मुस्काने लगा।5। पता नही क्यों फिर हम, साथ साथ ही चलने लगे। क्या हुआ जो एकदुजे को, नजरों से कुछ कहने लगे। धन्य धन्य हे उपर वाले, ये कोमलता भी बड़ी मस्तानी है। दिल बोलता हार मानकर, ये अदा भी बड़ी निराली है। झलक पलक के साथ से ही, ये अजीब एहसास कराती है। एक क्षण के समय साथ से, कितना प्रित छलकाती है। बहुत हुआ सो वहाँ से अब, घर को अपने आने लगे। नजर के बातों से आखिर। दोनो ही मुस्काने लगे।6। फिर जब भी मिलती कही, सखियों संग इठलाती है। मै वहाँ ना कर पाता कुछ, वो तिर चला मुस्काती है। लोग बोलते बात है क्या? आखिर कैसे ये बरसात हुई। तू तो बड़ा उड़ता रहता था, फिर ये मौसम क्यों मेहरबान हुई? अब मैं क्या कहुँ अपनों को, कि दिल ही दिल घबराता हूँ। समझ नही आता है कुछ, और अपने को भरमाता हूँ। क्या कहुँ मै प्रिय तुमसे, ये कैसे मुझे उलझाया है। नही रहा हूँ होश मे पगली, जब से तुमको पाया है।7। जब से तुमको..............💕💞 .........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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5 days ago
"Deep Falls" ●●●●●●●●● 🌹🌱🌾 When someone falls in deep, Trying in his own style... Then ask towards similarly, What's wrong with someone? However some do with mind, Somewhere with humming lips... And somewhere your eyes will say, What are the questions of the heart? When the helpless eyes turn, From the sea of ​​buildings... Hold and touch the heart, What are the answers to These beats? The heart that ever takes leisure, On the embers of fierceness... Grope still inside yourself, What are the confused regrets? The things on which the Eyelids kept laying, Every moment is waiting in the way... Whenever you don't want to slip, Then what are the Movements of the ascending breath? Till now you was with yourself, How hearts were lost in the streets... If you get it, if not right.... Ask yourself what are Your thoughts now!💕💞 .......✍️Ravi Pratap Singh ("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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6 days ago
🌹🌱🌾 ●●●●●● नया ख्वाब जो फिर इसबार दिया है, फिर से दिल ने मुझे ये आवाज दिया है। चिराग उल्फत में हैं फिर से आज, जलने का जो यूँ अख्तियार दिया है। पढ़ ले कभी मेरे मन का उजाला, दिल ने छापकर ऐसे ऐतवार दिया है। मेरा कुछ नही है सबकुछ है तेरा, धड़कन ने कुछ ऐसा इश्तेहार दिया है। कातिल है जिसकी हरएक ही अदाएँ, कुदरत ने कुछ ऐसा बेजोड़ हथियार दिया है। बहुतकुछ मिला जिंदगी में मुझे भी, हसीन तूने जो दिल को करार दिया है। क्या क्या न मिला जिन्दगी को तुझसे, कैसे न कहे कि पगलीं तुमने बहुत प्यार दिया है।💕💞 ...✍ रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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7 days ago
"अजनबी" ●●●●●●● 🌹🌱🌾 परवाह नहीं करते कभी हम, जो किन्ही भी फितरतों की.... अजनबी बनकर ही फिर से, हमे आजमाने लगा है कोई! दिल अपना है कुछ ऐसा कि, उतर जाए हर ख्वाबों में... छुपछुप कर इन सपनों में भी, आजकल आने लगा है कोई! अब दिल का क्या है कभी भी गुजर जाए किन्ही गलियों से... जानबूझकर ही अपने एहसासों में, अक्सर गले लगाने लगा है कोई! चाहकर भी जो कह न सके कभी, अपनी जुबाँ से हाल-ए-दिल कहीं... बखूभी यही बात सम्भलकर ही, खामोशी से हमसे छुपाने लगा है कोई! जिंदगी के जाने पहचाने पलों में, कई बार गुजर गए दिल-ए-हलचल.. बस अपना बनकर ही बेवजह भी, हमे भी अपना बनाने लगा है कोई! ये दिल करते रहे हैं इंतजार पर भी, कभी भी इकरार कर न पाए... बस बहुत दूर से ही हमे कहकर, बेजुबान हो सबकुछ बताने लगा है कोई! हर दूरियों में भी भला अब क्या-क्या, दिलतक बचा हुआ भरपूर बाकी है... हमाए मन टीम में 18-20 के नाम दिखे, बस 2-2 के झुनझुना बजाने लगा है कोई! इन रातों में भी जानबूझकर हमे ही, छेड़-छेड़ बहुत ही सताने लगा है कोई!!💕💞 ............✍रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️