*📖 कविता: बेनाम सवाल*
पूछने थे तुमसे कुछ सवाल मुझे,
पर खामोश कर गए तेरे ख्याल मुझे!!
जब भी देखा आइना, इक कसक सी जगी,
होने लगा खुद की सूरत पर मलाल मुझे!!
तेरे इश्क की राहों में ऐसा भटका हूँ,
कर दिया है वक्त ने बेहद बदहाल मुझे!!
वो जो कल तक मेरा हाल पूछा करते थे,
आज बना गए वो महज़ 'माज़ी' का कंकाल मुझे!!
चैन खोया, नींद रूठी, सुकून कहाँ है अब?
आता नहीं है ज़रा भी अब आराम मुझे!!
खुदा का वास्ता, अब और ना आज़माओ,
मत डालो इन जानलेवा मुश्किलों में मुझे!!
तारीखें धुंधली हुईं, कैलेंडर पुराने हो गए,
याद भी नहीं अब दिन, महीने या साल मुझे!!
तेरी यादों की ये सोच, एक कैद सी बन गई,
आकर बना जाती है हर पल बेहाल मुझे!!
दुनिया तो बस दूर से तमाशा देखती है,
तड़पता देख, बना देती है 'मिसाल' मुझे!!
पर इस मिसाल के पीछे का दर्द कौन समझे?
बस खाए जा रहे हैं तेरे अनकहे सवाल मुझे!!
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