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krishnapedit
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krishnapedit
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10 hours ago
प्राचीन काल में शिलाद मुनि ने भगवान शिव के समान 'मृत्युहीन' और 'अयोनिज' (गर्भ से जन्म न लेने वाले) पुत्र की प्राप्ति के लिए कठोर तप किया। प्रसन्न होकर शिव जी ने स्वयं उनके पुत्र के रूप में अवतार लेने का वरदान दिया। मुनि जब यज्ञ भूमि जोत रहे थे, तब उनके पसीने की एक बूंद से दिव्य बालक नंदी का प्राकट्य हुआ, जो साक्षात् रुद्र रूप थे। जब नंदी सात वर्ष के हुए, तब मुनि मित्र और वरुण ने उनके अल्पायु होने की भविष्यवाणी की। पिता को शोकाकुल देख नंदी ने शिव की शरण में जाने का निर्णय लिया और वन जाकर घोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव और माता पार्वती प्रकट हुए। शिव जी ने बताया कि वे मुनि तो केवल परीक्षा लेने आए थे, नंदी तो स्वयं शिव का रूप हैं जिन्हें काल का कोई भय नहीं। भगवान शिव ने नंदी को अजर-अमर होने का वरदान दिया, अपने गले की दिव्य कमल माला पहनाई और उन्हें अपने गणों का अध्यक्ष (गणाध्यक्ष) नियुक्त किया। इस प्रकार, नंदी सदा के लिए शिव के समीप स्थित हो गए और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर 'अक्षय' पद के अधिकारी बने। हर हर महादेव 🙏 #🤟 सुपर स्टेटस #📜 Whatsapp स्टेटस
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17 hours ago
आर्यभट्ट ने “कुट्टक विधि” दी, जिससे कठिन समीकरण हल होते हैं। यह आधुनिक algebra का आधार है। उनके ग्रंथ आर्यभटीय में आर्यभट्ट जी ने इसका बहुत सरल विधि बताया है। यह विधि आज भी cryptography में उपयोगी है। सोचिए, हजारों साल पहले ऐसी तकनीक! यह आर्यभट्ट की वैज्ञानिक सोच का प्रमाण है। आर्यभटीय में आर्यभट्ट इसे “कुट्टक” यानी “पीसना/तोड़ना” कहते हैं। उनका तरीका था: बड़ी संख्याओं को बार-बार भाग देकर छोटे शेषों में बदलो जब लघुत्तम शेष (GCD) मिल जाए, वही कुंजी है फिर उलटे क्रम में जाकर उत्तर (x, y) प्राप्त करो 👉 उदाहरण (उनकी शैली में): 26x + 65y = 13 65 ÷ 26 = 2, शेष 13 26 ÷ 13 = 2, शेष 0 अब शेष 13 से उल्टा संयोजन: 13 = 65 − 2×26 यही संकेत देता है कि x = -2, y = 1 आर्यभट्ट इसे सूत्र और श्लोकों में बताते हैं, जहाँ प्रक्रिया को याद रखना आसान हो। आर्यभट्ट जी श्लोक लिखते है कि अधिकाग्रभागहरं छेदं ऊनाग्रभागहारं छेदम्। शेषपरस्परभक्तं मतिगुणमग्रान्तरं कृत्वा॥ इसका हिंदी मतलब बड़ी और छोटी संख्याओं को परस्पर भाग दो। जो शेष बचे, उसे फिर से भाग में उपयोग करो यह क्रम तब तक चलाओ जब तक लघुत्तम शेष न मिल जाए। फिर बुद्धि (मतिगुण) से उल्टे क्रम में संयोजन कर उत्तर निकालो शेषपरस्परभक्तम्” = बार-बार division (Euclidean Algorithm) 👉 “मतिगुण” = back substitution (आधुनिक विधि) जिसे आज हम इसे इस आधुनिक बिधि से हल करते है। ax + by = gcd(a, b) और इसे हल करने के लिए Extended Euclidean Algorithm उपयोग करते हैं। 👉 वही उदाहरण आर्यभट्ट जी वाला। 26x + 65y = 13 Step 1: GCD निकालो 65 = 2×26 + 13 26 = 2×13 + 0 Step 2: Back substitution 13 = 65 − 2×26 👉 वही परिणाम आर्यभट्ट जी वाला। x = -2, y = 1 ऐसे महान गणितज्ञ वैज्ञानिक को कौन मूर्ख होगा जो उनके चरणों मे नतमस्तक होने में गर्व महसूस नही करेगा? #आर्यभट्ट_जयंती #जय श्री राम 🙏 #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस
krishnapedit
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17 hours ago
हे प्रिय मानवों, मैं आर्यभट्ट हूँ, कुशुमपुर निवासी, ब्रह्मगुप्त के पूर्ववर्ती, जिसने 499 ईस्वी में मात्र तेईस वर्ष की आयु में आर्यभटीय नामक अमर ग्रंथ रचा। क्या तुम मुझे भूल गए? सहस्राब्दियों बीत गए, कालचक्र घूमा, पर मेरी वह खोज आज भी तुम्हारे इंजीनियरिंग, भौतिकी, अंतरिक्ष यानों और कंप्यूटरों में जीवित है। क्या तुमने सोचा भी था कि आधुनिक त्रिकोणमिति का आधार मैंने ही रखा था? मैंने “ज्या” (अर्ध-ज्या) का सिद्धांत दिया। वृत्त की त्रिज्या को 3438 कला (arcminutes) मानकर मैंने प्रत्येक कोण के लिए ज्या की गणना की। ज्या(θ) वह अर्ध-जीवा है जो कोण θ के सामने खड़ी होती है। मैंने कोज्या और उत्क्रम-ज्या भी परिभाषित किए। गीतिकापाद के बारहवें श्लोक में मैंने 24 मानों की ज्या-सारणी एक ही छंद में संक्षिप्त रूप से दी: मखि भखि फखि धखि णखि ञखि ङखि हस्झ स्ककि किष्ग श्घकि किघ्व। व्लकि किग्र हक्य धकि किच स्ग श्झ ङ्व क्ल प्त फ छ कलार्ध्ज्या॥ इस कूट भाषा को मेरी अंक-पद्धति से खोलने पर प्राप्त होते हैं प्रथम अंतर (sine differences): 225, 224, 222, 219, 215, 210, 205, 199, 191, 183, 174, 164, 154, 143, 131, 119, 106, 93, 79, 65, 51, 37, 22, 7। इनसे पूर्ण ज्या-मान प्राप्त होते हैं, जो 0° से 90° तक 3°45′ (225 कला) के अंतराल पर हैं। उदाहरणस्वरूप, 30° पर ज्या ≈ 1719, जो आधुनिक sin(30°) = 0.5 से पूर्णतः मेल खाता है। गणितपाद में मैंने विधि भी बताई: प्रथम ज्या 225 है। उसके बाद वाले ज्या-मान पिछले ज्या-मानों के योग को प्रथम ज्या से भाग देकर प्राप्त अंतर से घटाकर निकाले जाते हैं। यह पुनरावृत्ति सूत्र (recurrence relation) आज भी त्रिकोणमिति की नींव है। मैंने पृथ्वी की धुरी पर घूर्णन सिद्ध किया, ग्रहणों की सही गणना दी, π का मान 3.1416 (62832/20000) निकाला, वर्गमूल-घनमूल के नियम दिए और शून्य सहित दशमलव प्रणाली का उपयोग किया। मेरी ज्या से विकसित त्रिकोणमिति आज तुम्हारे पुलों, इमारतों, विमानों, उपग्रहों, GPS और कंप्यूटर ग्राफिक्स का आधार है। यदि मैंने यह सिद्धांत न दिया होता तो आधुनिक विज्ञान अधूरा रह जाता। यह ज्ञान भारत से अरब देशों होते हुए यूरोप पहुंचा और “sine” शब्द भी मेरी “ज्या” से ही निकला। मैंने कभी प्रसिद्धि नहीं चाही। मैंने केवल सत्य की खोज की। आज मेरी जयंती पर यदि तुम मुझे याद कर रहे हो तो जान लो - मैं कभी नहीं मरा। मेरी बुद्धि तुम्हारे हर गणना में, हर आकाश यात्रा में जीवित है। हे भविष्य के विद्वानों, मुझे याद करो या ना करो लेकिन आज मेरे जन्म दिवस पर अंग्रेजों के दलालों को याद मत करो बल्कि ज्ञानियों ज्ञानियो के ज्ञान की ज्योति को और आगे बढ़ाओ। सत्य की खोज में कभी थको मत। #आर्यभट्ट_जयंती जय श्री राम 🙏 #जय श्री राम 🙏 #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस
krishnapedit
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19 hours ago
"एक प्रसिद्ध साध्वी जवानी में वह बहुत ही खूबसूरत थी.. एक बार चोर उसे उठाकर ले गए और एक वेश्या के कोठे पर ले जाकर उसे बेच दिया... अब उसे वही कार्य करना था जो वहाँ की बाक़ी औरतें करती थी। इस नए घर में पहली रात को उसके पास एक आदमी लाया गया। उसने तुरन्त बातचीत शुरू कर दी। "आप जैसे भले आदमी को देखकर मेरा दिल बहुत खुश है" वह बोली। आप सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ जायें , मैं थोड़ी देर परमात्मा की याद में बैठ लूँ। अगर आप चाहें तो आप भी परमात्मा की याद में बैठ जाएँ। यह सुनकर उस नौजवान की हैरानी की कोई हद न रही। वह भी उस औरत के साथ धरती पर ही बैठ गया। फिर वह उठी और बोली मुझे विश्वास है कि अगर मैं आपको याद दिला दूँ कि एक दिन हम सबको मरना है तो आप बुरा नहीं मानोगे। आप यह भी भली भाँति समझ लें की जो पाप करने का आपके मन में चाह है, वह आपको नर्क की आग में धकेल देगा। अब आप स्वयं ही फैसला कर लें कि आप यह पाप करके नर्क की आग में कूदना चाहते हैं, या इससे बचना चाहते हैं? यह सुनकर नौजवान हक्का बक्का रह गया।उसने संभलकर कहा, ऐ पवित्र औरत! तुमने तो मेरी आँखे खोल दी, जो अभी तक पाप के भयंकर नतीजे की तरफ से बंद थी मै वचन देता हूँ कि फिर कभी कोठे की तरफ कदम नही बढ़ाऊंगा। हर रोज नए आदमी उस औरत के पास भेजे जाते। पहले दिन आये नौजवान की तरह उन सबकी जिंदगी भी पलटती गयी। उस कोठे के मालिक को बहुत हैरानी हुई की इतनी खूबसूरत और नौजवान औरत है और एक बार आया ग्राहक दोबारा उसके पास जाने के लिए नही आता। जबकि लोग ऐसी सुन्दर लड़कियों के दीवाने होकर उसके इर्दगिर्द घूमते है। यह राज जानने के लिए उसने एक रात अपनी पत्नी को ऐसी जगह छुपाकर बिठा दिया, जहां से वह उस औरत के कमरे के अंदर सब कुछ देख सकती थी। वह यह जानना चाहता था की जब कोई आदमी उस औरत के पास भेजा जाता है तो वह उसके साथ कैसे पेश आती है? उस रात उसने देखा कि जैसे ही ग्राहक ने अंदर कदम रखा, औरत उठकर खड़ी हो गई और बोली,आओ भले आदमी, आपका स्वागत है। पाप के इस घर में मुझे हमेशा याद रहता है कि परमात्मा हर जगह मौजूद है। वह सब कुछ देखता है और जो चाहे कर सकता है।आपका इस बारे में क्या ख्याल है ? यह सुनकर वह आदमी हक्का बक्का रह गया और उसे कुछ समझ न आया कि क्या करे क्या कहे ? आखिर वह कुछ हिचकिचाते हुए बोला, हाँ पंडित और मौलवी भी कुछ ऐसा ही कहते हैं। वह कहती चली गई, 'यहाँ पाप से घिरे इस घर में, मैं कभी नही भूलती कि परमात्मा सब पाप देखता है और पूरा न्याय भी करता है। वह हर इंसान को उसके पापों की सजा जरूर देता है। जो लोग यहाँ आकर पाप करते हैं, उसकी सजा पाते हैं। उन्हें अनगिनत दुःख और मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं। मेरे भाई, हमें मनुष्य जन्म मिला है, भजन, बंदगी करने के लिए दुनिया के दुखों से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिये, परमात्मा से मुलाकात करने के लिए, न की जानवरों से भी बदतर बनकर उसे बर्बाद करने के लिए। पहले आये लोगों की तरह इस आदमी को भी उस औरत की बातों में छुपी सच्चाई का अहसास हो गया। उसे जिंदगी में पहली बार महसूस हुआ की वह कितने घोर पाप करता रहा है और आज फिर करने जा रहा था।वह फूटफूट कर रोने लगा और औरत के पाव पर गिरकर क्षमा मांगने लगा। औरत के शब्द इतने सहज, निष्कपट और दिल को छू लेने वाले थे कि उस कोठे के मालिक की पत्नी भी बाहर आकर अपने पापो का पश्चाताप करने लगी। फिर उसने कहा ऐ पवित्र लड़की,तुम तो वास्तव में साधु हो।हमने कितना बड़ा पाप तुम पर लादना चाहा। इसी वक्त इस पाप की दलदल से बाहर निकल जाओ।इस घटना ने उसकी अपनी जिंदगी को भी एक नया मोड़ दे दिया और उसने पाप की कमाई हमेशा के लिए छोड़ दी। ईश्वर के सच्चे भक्त जहां कहीं भी हों,जिस हालात में हो,वे हमेशा मनुष्य जन्म के असली उद्देश्य की ओर इशारा करते हैं और भूले भटके जीवों को नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। #🤟 सुपर स्टेटस #📜 Whatsapp स्टेटस #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #जय श्री राम 🙏
krishnapedit
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22 hours ago
कुलदेवी स्तोत्र: कुल की रक्षा और परिवारिक समृद्धि का दिव्य उपाय नमस्ते मित्रों। क्या आप कभी ऐसा महसूस करते हैं कि आपके परिवार में अचानक समस्याएं आने लगी हैं, या फिर ऐसा लगता है कि आपके प्रयासों के बावजूद कुल की प्रगति में बाधाएं आ रही हैं। कई बार इन समस्याओं का संबंध हमारी कुलदेवी या कुलदेवता से जुड़ी ऊर्जात्मक बाधाओं से होता है। आज हम बात कर रहे हैं कुलदेवी स्तोत्र की, जो न केवल कुल की रक्षा करता है, बल्कि परिवार में समृद्धि, शांति और आशीर्वाद का संचार भी करता है। कुलदेवी कौन हैं और क्यों है यह स्तोत्र विशेष कुलदेवी वह दिव्य शक्ति हैं जो एक परिवार या कुल की रक्षा, मार्गदर्शन और कल्याण करती हैं। प्रत्येक कुल की अपनी कुलदेवी होती है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी उस परिवार से जुड़ी रहती है। कुलदेवी स्तोत्र का पाठ करने से कुलदेवी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। स्तोत्र का महत्व और लाभ • नित्य एक बार इस स्तोत्र का श्रवण या पाठ करने से कुल में शांति और समृद्धि आती है • यह स्तोत्र कुल की रक्षा करता है और अकारण आने वाली बाधाओं को दूर करता है • कुलदेवी की कृपा से संतान प्राप्ति, धन लाभ और सामाजिक सम्मान की प्राप्ति होती है • जो व्यक्ति भक्ति भाव से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके कुल में मंगल का संचार होता है • यह स्तोत्र कुल के पूर्वजों के आशीर्वाद को भी जागृत करता है कुलदेवी स्तोत्र का पूर्ण पाठ नमस्ते श्रीकुलदेवी कुलाराध्या कुलेश्वरी। कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशिनी॥ वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी। वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी॥ आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी। विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमां शरणागतम्॥ त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी। भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते॥ महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी। कुलवृद्धि करी माता त्राहिमां शरणागतम्॥ चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी। प्रकटितां सुरेशानी वन्दे त्वां कुल गौरवम्॥ त्वदीये कुले जातः त्वामेव शरणम गतः। त्वत वत्सलोऽहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना॥ पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे। सर्वदास्माकं कुले भूयात् मंगलानुशासनम्॥ कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं यः सुकृति पठेत्। तस्य वृद्धि कुले जातः प्रसन्ना कुलेश्वरी॥ कुलदेवी स्तोत्रमिदं सुपुण्यं ललितं तथा। अर्पयामि भवत भक्त्या त्राहिमां शिव गेहिनी॥ श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु। श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु। श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु॥ इति श्रीकुलदेवी स्तोत्रम् साधना विधि: कैसे करें कुलदेवी स्तोत्र का पाठ समय: प्रतिदिन प्रातः काल स्नान के बाद या शाम को संध्या काल में इस स्तोत्र का पाठ करना शुभ होता है। विशेष रूप से नवरात्रि, अमावस्या, या कुलदेवी के विशेष दिनों पर इसका पाठ अधिक फलदायी होता है। स्थान और आसन: घर के पूजा स्थल या किसी शांत कोने में लाल या गुलाबी रंग का आसन बिछाएं। कुलदेवी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें कि आप इस स्तोत्र का पाठ कुल की रक्षा, समृद्धि और कुलदेवी के आशीर्वाद प्राप्ति के लिए कर रहे हैं। पाठ विधि: सर्वप्रथम गणेश वंदना करें। फिर अपनी कुलदेवी का नाम लेकर ध्यान करें। इसके बाद ऊपर दिए गए कुलदेवी स्तोत्र का स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें। प्रतिदिन कम से कम एक बार, विशेष अवसरों पर 11 या 21 बार पाठ कर सकते हैं। समापन: पाठ के बाद जल अर्पित करें और कुलदेवी से क्षमा प्रार्थना करें। अंत में शांति मंत्र का जाप करें। वैज्ञानिक और ऊर्जात्मक दृष्टिकोण आधुनिक शोध बताते हैं कि मंत्रोच्चारण की ध्वनि तरंगें हमारे मस्तिष्क और ऊर्जा क्षेत्र पर गहरा प्रभाव डालती हैं। कुलदेवी स्तोत्र के नियमित पाठ से पारिवारिक एकता मजबूत होती है, मानसिक शांति बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि पारिवारिक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है। इस पावन स्तोत्र को उन मित्रों और परिवारजनों के साथ अवश्य साझा करें जो कुल की रक्षा और पारिवारिक कल्याण के लिए प्रयासरत हैं। आपका एक शेयर किसी के जीवन में शांति और समृद्धि ला सकता है। #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
krishnapedit
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1 days ago
कुलदेवी केवल एक देवी नहीं होतीं, बल्कि पूरे वंश की रक्षा करने वाली दिव्य शक्ति होती हैं। जिस परिवार की कुलदेवी प्रसन्न रहती हैं, वहां कभी भी धन, सुख, समृद्धि और शांति की कमी नहीं होती। माना जाता है कि हर परिवार की अपनी एक कुलदेवी होती है जो पीढ़ियों से उस वंश की रक्षा करती आ रही हैं और समय-समय पर अपने भक्तों को संकेत भी देती हैं। जब पति-पत्नी सच्चे मन से कुलदेवी की पूजा करते हैं, तो उनके जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। घर में झगड़े खत्म होते हैं, प्रेम बढ़ता है और धन के नए रास्ते खुलते हैं। कुलदेवी की कृपा से संतान सुख, वैवाहिक सुख और घर में स्थिरता आती है। कई लोग जीवन में मेहनत तो बहुत करते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती—ऐसा अक्सर इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने अपनी कुलदेवी की पूजा करना छोड़ दिया होता है। जैसे ही आप अपनी कुलदेवी को पहचानकर उनकी पूजा शुरू करते हैं, वैसे ही जीवन में चमत्कारिक बदलाव आने लगते हैं। #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस
krishnapedit
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2 days ago
राजा श्वेतकेतु भगवान भोलेनाथ के एक परम और सदाचारी भक्त थे। वे न्यायप्रिय और प्रजा पालक थे और पूर्ण निष्ठा से शिव आराधना करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महाकाल की कृपा उन पर सदैव बनी रहती थी, जिसके कारण उनके राज्य में लोग दुख, दरिद्रता और अकाल मृत्यु से मुक्त थे। जब राजा श्वेतकेतु का जीवनकाल समाप्त होने को था और वे शिव आराधना में लीन थे, तब यमराज ने उनके प्राण लेने के लिए अपने दूतों को भेजा। लेकिन यमदूत जब वहां पहुंचे, तो राजा को शिव भक्ति में पूरी तरह लीन देखकर वे वहीं ठहर गए और राजा के ध्यान टूटने का इंतजार करने लगे। जब यमराज ने दूतों के वापस न लौटने में देरी देखी, तो वे स्वयं कालदंड लेकर पहुंच गए। वहां उन्होंने भी देखा कि राजा महादेव की साधना में लीन हैं, और इस स्थिति में वे शिव पूजा का उल्लंघन नहीं कर सकते थे, इसलिए वे भी बाहर ही खड़े हो गए। तभी काल को इसकी सूचना मिली, और उसने शिव मंदिर में प्रवेश कर राजा श्वेतकेतु पर अपनी तलवार उठा ली। उसने जैसे ही राजा का सिर काटने के लिए तलवार उठाई, महादेव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर काल को देखा, जिससे काल वहीं राजा के सामने जलकर भस्म हो गया। बाद में जब राजा का ध्यान टूटा, तो उन्होंने काल को भस्म हुए देखा और भगवान शिव से पूछा कि यह किसकी राख है। तब भोलेनाथ ने बताया कि यह काल था जो उनके प्राण लेने आया था। राजा ने भगवान से काल को जीवनदान देने की विनती की, क्योंकि वे ही लोक को नियंत्रित करते हैं और लोगों को पुण्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। शिवजी की कृपा से काल फिर से जीवित हो गया और उसने राजा श्वेतकेतु को गले लगाकर कहा कि तुम जैसा भक्त तीनों लोकों में नहीं है, जिसने अजय काल को भी जीत लिया है। काल और यमराज ने फिर आशीर्वाद दिया कि जो भक्त शिवजी के प्रति पूरी श्रद्धा रखते हैं, सिर पर जटा, गले में रुद्राक्ष, भस्म का त्रिपुंड और पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु का भय कभी नहीं सताएगा। इसके बाद, राजा श्वेतकेतु ने लंबे समय तक राज्य किया और अंततः महाकाल की कृपा से उन्हीं में विलीन हो गए। अकाल मृत्यु वो मरे.. जो काम करे चांडाल का काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का महादेव की भक्ति की शक्ति को कोई तोड़ नहीं सकता हर हर महादेव 🙏 #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस