यह कविता उन वीर जवानों को समर्पित है जिन्होंने पहलगाम की वादियों की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। एक साल बीत जाने पर उनकी वीरता और शहादत को नमन l
🌟पहलगाम के प्रहरी🌟
पहलगाम की उन बर्फीली, वादियों में शोर हुआ था,
शांति की उस पावन धरती पर, गद्दारों का ज़ोर हुआ था।
एक साल बीत गया उस दिन को, पर घाव अभी तक ताज़ा हैं,
वीर शहीदों की गौरव गाथा के, गूंजते आज भी दरवाज़ा हैं।
लिद्दर नदी की लहरों में, आज भी उनका अक्स नज़र आता है,
देश के उन रखवालों का, हर कतरा फर्ज़ निभाता है।
दुश्मन ने सोचा था कि हम, डर कर पीछे हट जाएंगे,
पर भूल गए थे वो कि हिंदुस्तानी, तिरंगे के लिए कट जाएंगे।
वो बर्फीली हवाएं गवाह हैं,
वो ऊंचे पहाड़ गवाह हैं,
जो माँ के लाल लौट न सके,
उनकी शहादत की राह गवाह है।
एक वर्ष की टीस है दिल में, और गर्व का ये सम्मान रहे,
जब तक सूरज-चाँद रहेगा, भारत माँ की शान रहे।
नमन है उन वीरों को, जिन्होंने सरहद पर जान दी,
पहलगाम की मिट्टी ने भी, लहू से अपनी पहचान दी।
जय हिन्द, जय भारत।
#🙏पहलगाम हमले की पहली बरसी🕯️ #🕯️पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि🙏 #🕯️पहलगाम हमले की दर्दनाक यादें🙏 #📢 ताजा खबर 📰 #🆕 ताजा अपडेट