गायत्री

ayutspiritual
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17 days ago
॥ २२ शक्तिशाली गायत्री मंत्र ॥ 🙏✨ ॐ ​गायत्री मंत्र केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि चेतना जागृत करने का एक दिव्य माध्यम है। अलग-अलग देवी-देवताओं के इन विशिष्ट गायत्री मंत्रों का जप हमें उनके विशेष गुणों और आशीर्वाद से जोड़ता है। ॐ NOTE - गुरु से दीक्षा लेकर ही ये मंत्र जपे ॐ ✅ Follow करें @ayutspiritual आध्यात्मिक ज्ञान के लिए। ॐ ​ #gayatri #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
sn vyas
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1 months ago
#गायत्री माता गायत्री की उत्पत्ति की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा सृष्टि के कल्याण के लिए पुष्कर में एक महान यज्ञ का आयोजन कर रहे थे। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी बड़े यज्ञ की पूर्णता के लिए पत्नी का साथ होना अनिवार्य होता है। यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था, लेकिन ब्रह्मा जी की पत्नी देवी सावित्री (सरस्वती) समय पर यज्ञ स्थल पर नहीं पहुँच सकीं। वे अपनी सखियों के आने की प्रतीक्षा कर रही थीं। मुहूर्त बीतता देख ब्रह्मा जी चिंतित हो गए, क्योंकि यदि मुहूर्त निकल जाता तो यज्ञ निष्फल हो जाता। यज्ञ की रक्षा के लिए ब्रह्मा जी ने देवराज इंद्र से कहा कि वे शीघ्र ही किसी योग्य कन्या की खोज करें जिससे विवाह कर यज्ञ संपन्न किया जा सके। तब इंद्र ने एक अत्यंत रूपवती और तेजस्विनी कन्या को खोजा, जो वास्तव में साक्षात वेदों की अधिष्ठात्री देवी थीं। भगवान विष्णु की सहमति से ब्रह्मा जी ने उस कन्या से विवाह किया। उस कन्या का नाम 'गायत्री' रखा गया। गायत्री माता ने ब्रह्मा जी के साथ यज्ञ में बैठकर उसे विधिपूर्वक संपन्न कराया। जब देवी सावित्री यज्ञ स्थल पर पहुँचीं और ब्रह्मा जी के साथ दूसरी स्त्री को देखा, तो वे क्रोधित हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पूरे संसार में उनकी पूजा केवल पुष्कर में ही होगी। साथ ही उन्होंने इंद्र और विष्णु जी को भी श्राप दिए। बाद में माता गायत्री ने अपने तप और सौम्यता से देवी सावित्री के क्रोध को शांत किया और सभी देवताओं को श्राप के प्रभाव से मुक्त होने का मार्ग दिखाया। माता गायत्री ने ही सावित्री (ज्ञान) और गायत्री (कर्म) के बीच संतुलन स्थापित किया। पंचमुखी स्वरूप: माता गायत्री को अक्सर पांच मुखों और दस हाथों के साथ दिखाया जाता है, जो पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और मानवीय ज्ञान की इंद्रियों का प्रतीक हैं। वेदों की जननी: माना जाता है कि चारों वेदों की उत्पत्ति गायत्री मंत्र से ही हुई है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का सार गायत्री में ही समाहित है। गायत्री मंत्र: यह मंत्र (ॐ\ भूर्भुवः\ स्वः...) सूर्य की ऊर्जा (सविता देव) को समर्पित है, जो मनुष्य की बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करता है। देवी गायत्री की कथा हमें सिखाती है कि शुद्ध बुद्धि और अनुशासन के बिना कोई भी महान कार्य (यज्ञ) सफल नहीं हो सकता। वे केवल एक देवी नहीं, बल्कि चेतना और सद्बुद्धि का साक्षात रूप हैं। जय गायत्री माता! 🚩
All World Gayatri Pariwar Official
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3 months ago
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All World Gayatri Pariwar Official
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3 months ago
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All World Gayatri Pariwar Official
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3 months ago
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All World Gayatri Pariwar Official
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3 months ago
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All World Gayatri Pariwar Official
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3 months ago
!! #गायत्री_माता_मंदिर #Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 09 Feburay 2026 !! #गायत्रीमाता