राष्ट्रकवि एवं पद्मभूषण से सम्मानित स्व.मैथिलीशरण गुप्त जी की 61वी पुण्यतिथि पर मैं उन्हे कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
मैथिलीशरण गुप्त जी हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के,विशेष रूप से द्विवेदी युग के एक प्रमुख कवि थे,जिन्हें खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवियों में गिना जाता है।
"उसी उदार की सदा,सजीव कीर्ति कूजती;
तथा उसी उदार को,समस्त सृष्टि पूजती।
अखण्ड आत्मभाव जो,असीम विश्व में भरे¸
वही मनुष्य है कि जो,मनुष्य के लिये मरे।"
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त,1886 को चिरगाँव,झाँसी,उत्तर प्रदेश में एक संभ्रान्त वैश्य कुल के कनकने परिवार में हुआ था।
मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी काव्य के निर्माता थे।महात्मा गांधी जी ने 'भारत-भारती' की लोकप्रियता के कारण आप को राष्ट्रकवि कहा था।
आप की प्रमुख रचनाओं में रंग में भंग,जयद्रथ वध, पद्य प्रबंध,भारत-भारती, शकुन्तला,किसान, पत्रावली,वैतालिक, पंचवटी,स्वदेश संगीत, हिंदु, त्रिपथगा, शक्ति (मौलिक काव्य रचनाएं), तिलोतमा,चन्द्रहास, अनध, गृहस्थ गीता (गीतिनाट्य),मुंशी अजमेरी (संस्मरण),शब्द चित्र (श्रद्धांजलि संस्मरण), स्वप्नवासवदत्ता,विरहिणी बृजांगना,प्लासी का युद्ध, गीतामृत,वीरांगना (अनुदित कृतियां), गणेशाजी,आचार्यदेव, अनुज,श्रद्धांजलि,हमारा वृन्दावन (संस्मरण एवं आत्मकथा), हिंदी कविता किस ढंग की हो, बृजनन्द सहाय के उपन्यास (निबंध एवं समालोचना) आदि शामिल हैं।
आप ने "साकेत" नामक महाकाव्य की रचना की थी जिसके लिए आप को मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया।राष्ट्रपति ने आप को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया था। भारत सरकार ने आप को ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया
12 दिसम्बर,1964 को हृदयगति रूक जाने के कारण 78 वर्ष की आयु में चिरगाँव में ही आप का देहावसान हो गया।🙏शत् शत् नमन 🙏
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