राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन

🇭ARISH🇯AHIREY
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5 महीने पहले
#मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि “चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में।” — मैथिलीशरण गुप्त ( 3 अगस्त 1886 – 12 दिसंबर 1964) भारतीय साहित्य की महान विभूति, राष्ट्रकवि “मैथिलीशरण गुप्त जी” की 61वीं पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन। जिन्होंने अपनी काव्यधारा से जन-जन में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रकाश फैलाया। उनकी काव्य रचनाएँ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना की अमूल्य धरोहर हैं। #मैथिलीशरण गुप्त #राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
Ajay Sharma
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5 महीने पहले
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त - पुण्य तिथि 12 दिसंबर 1964 हिंदी साहित्य में खड़ी बोली की शुरुआत करने वाले कवि मैथिलीशरण गुप्त को महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपमा दी थी। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।। 🙏🙏 #🌷मैथिलीशरण गुप्त जी की जयंती 3 अगस्त🇮🇳 #मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि #राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन #मैथिलीशरण गुप्त #💐राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी जयंती🙏
Praveen Kumar Yadav
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5 महीने पहले
राष्ट्रकवि एवं पद्मभूषण से सम्मानित स्व.मैथिलीशरण गुप्त जी की 61वी पुण्यतिथि पर मैं उन्हे कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। मैथिलीशरण गुप्त जी हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के,विशेष रूप से द्विवेदी युग के एक प्रमुख कवि थे,जिन्हें खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवियों में गिना जाता है। "उसी उदार की सदा,सजीव कीर्ति कूजती; तथा उसी उदार को,समस्त सृष्टि पूजती। अखण्ड आत्मभाव जो,असीम विश्व में भरे¸ वही मनुष्य है कि जो,मनुष्य के लिये मरे।" राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त,1886 को चिरगाँव,झाँसी,उत्तर प्रदेश में एक संभ्रान्त वैश्य कुल के कनकने परिवार में हुआ था। मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी काव्य के निर्माता थे।महात्मा गांधी जी ने 'भारत-भारती' की लोकप्रियता के कारण आप को राष्ट्रकवि कहा था। आप की प्रमुख रचनाओं में रंग में भंग,जयद्रथ वध, पद्य प्रबंध,भारत-भारती, शकुन्तला,किसान, पत्रावली,वैतालिक, पंचवटी,स्वदेश संगीत, हिंदु, त्रिपथगा, शक्ति (मौलिक काव्य रचनाएं), तिलोतमा,चन्द्रहास, अनध, गृहस्थ गीता (गीतिनाट्य),मुंशी अजमेरी (संस्मरण),शब्द चित्र (श्रद्धांजलि संस्मरण), स्वप्नवासवदत्ता,विरहिणी बृजांगना,प्लासी का युद्ध, गीतामृत,वीरांगना (अनुदित कृतियां), गणेशाजी,आचार्यदेव, अनुज,श्रद्धांजलि,हमारा वृन्दावन (संस्मरण एवं आत्मकथा), हिंदी कविता किस ढंग की हो, बृजनन्द सहाय के उपन्यास (निबंध एवं समालोचना) आदि शामिल हैं। आप ने "साकेत" नामक महाकाव्य की रचना की थी‌ जिसके लिए आप को मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया।राष्ट्रपति ने आप को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया था। भारत सरकार ने आप को ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया 12 दिसम्बर,1964 को हृदयगति रूक जाने के कारण 78 वर्ष की आयु में चिरगाँव में ही आप का देहावसान हो गया।🙏शत् शत् नमन 🙏 #🥰मोटिवेशन वीडियो #🌞 Good Morning🌞 #🙌 Never Give Up #👍 डर के आगे जीत👌 #राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन