BHUTIYA KAHANIYA

Shivani Sharma
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15 hours ago
बरसात का मौसम था। रात के करीब ग्यारह बजे थे। बाहर तेज हवा चल रही थी और बीच-बीच में बिजली चमक रही थी। पूरा मोहल्ला लगभग सो चुका था। सिर्फ बारिश की बूंदों की आवाज़ और कभी-कभी कुत्तों के भौंकने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। रोहित अपने कमरे में बैठा मोबाइल चला रहा था कि तभी उसे छत से किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज़ बिल्कुल साफ थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई भारी कदमों से धीरे-धीरे छत पर टहल रहा हो। पहले तो रोहित ने सोचा कि शायद कोई बिल्ली या बंदर होगा। लेकिन कुछ देर बाद वही आवाज़ फिर सुनाई दी। इस बार कदमों की रफ्तार और भी धीमी थी, जैसे कोई जानबूझकर धीरे-धीरे चल रहा हो। सुबह उसने यह बात अपने पापा को बताई। पापा ने हँसते हुए कहा कि पुराना मकान है, ऐसी आवाज़ें आती रहती हैं। रोहित ने भी बात को वहीं खत्म कर दिया। लेकिन अगले दिन रात को फिर वही आवाज़ सुनाई दी। फिर तीसरी रात भी। धीरे-धीरे यह रोज़ की बात बन गई। करीब एक हफ्ते बाद रोहित ने तय किया कि अब वह सच जानकर रहेगा। उस रात जब आवाज़ शुरू हुई तो उसने टॉर्च उठाई और धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़कर छत की ओर बढ़ने लगा। उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। जैसे ही उसने छत का दरवाज़ा खोला, ठंडी हवा का एक तेज झोंका उसके चेहरे से टकराया। उसने पूरी छत पर टॉर्च घुमाई। वहाँ कोई नहीं था। न कोई इंसान, न कोई जानवर। सिर्फ बारिश से भीगा हुआ फर्श और चारों तरफ फैला अंधेरा। रोहित ने राहत की साँस ली और वापस मुड़ने लगा। तभी उसकी नज़र छत के एक कोने पर पड़ी। वहाँ पानी जमा हुआ था और उस पानी के बीच कुछ पैरों के निशान बने हुए थे। अजीब बात यह थी कि निशान दिखाई तो दे रहे थे, लेकिन उनका कोई अंत नहीं था। जैसे कोई अचानक वहीं आकर खड़ा हुआ हो और फिर गायब हो गया हो। उस रात वह किसी तरह नीचे आ गया, लेकिन अब उसके मन में डर बैठ चुका था। अगले कुछ दिनों तक उसने छत पर जाना बंद कर दिया। फिर एक रात उसकी आँख अचानक खुल गई। कमरे की खिड़की पर किसी के उँगलियों से खटखटाने जैसी आवाज़ आ रही थी। उसने घड़ी देखी। रात के ठीक बारह बजे थे। रोहित ने हिम्मत करके खिड़की की तरफ देखा। बाहर घना अंधेरा था। लेकिन बारिश की बूंदों के बीच उसे ऐसा लगा जैसे कोई सफेद-सी आकृति खिड़की के पास खड़ी हो। उसने तुरंत आँखें बंद कर लीं। जब दोबारा देखा तो वहाँ कुछ नहीं था। अगली सुबह वह मोहल्ले के सबसे बुजुर्ग शर्मा जी के पास पहुँचा और सारी बात बता दी। उसकी बात सुनते ही शर्मा जी का चेहरा गंभीर हो गया। उन्होंने बताया कि कई साल पहले उसी मकान में एक बुजुर्ग आदमी अकेले रहते थे। एक रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा। मदद माँगने के लिए वह छत पर गए, लेकिन किसी ने उनकी आवाज़ नहीं सुनी। सुबह उनकी लाश छत पर मिली थी। रोहित के शरीर में सिहरन दौड़ गई। उस रात उसने तय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह कमरे से बाहर नहीं निकलेगा। लेकिन आधी रात को फिर वही कदमों की आवाज़ शुरू हो गई। कुछ देर बाद आवाज़ छत से नीचे उतरती हुई महसूस हुई। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सीढ़ियाँ उतर रहा हो। फिर अचानक उसके कमरे के बाहर आकर कदम रुक गए। कुछ सेकंड तक गहरा सन्नाटा छाया रहा। और फिर... ठक... ठक... दरवाज़े पर दो हल्की दस्तक हुई। रोहित का गला सूख गया। उसके पूरे शरीर में डर दौड़ गया। वह बिस्तर पर बैठा रहा, लेकिन दरवाज़ा खोलने की हिम्मत नहीं हुई। तभी बाहर से एक धीमी और काँपती हुई आवाज़ सुनाई दी— "बेटा... दरवाज़ा खोल दो..." आवाज़ किसी बूढ़े आदमी की थी। रोहित ने आँखें कसकर बंद कर लीं और पूरी रात भगवान का नाम लेता रहा। सुबह जब सूरज निकला और उसने दरवाज़ा खोला, तो बाहर कोई नहीं था। लेकिन दरवाज़े के सामने धूल पर गीले पैरों के निशान बने हुए थे। निशान उसके कमरे तक आते थे... मगर वापस जाने के कोई निशान नहीं थे। उस दिन के बाद रोहित ने कभी उस आवाज़ का पीछा नहीं किया। लेकिन मोहल्ले के लोग आज भी कहते हैं कि बरसात की कुछ रातों में उस घर की छत पर कोई धीरे-धीरे चलता है। और अगर आधी रात को आपके दरवाज़े पर दो हल्की दस्तक सुनाई दे... तो भूलकर भी दरवाज़ा मत खोलना। क्योंकि हो सकता है... बाहर कोई इंसान आपका इंतज़ार न कर रहा हो। 👣🌑 गहरी सीख 📌 अगर आधी रात को और मौसम खराब हो तो किसी की भी आवाज पर तुरंत दरवाजा ना खोले वो आवाज आपके परिवार के किसी भी सदस्य की हो सकती है लेकिन यह जरूरी नहीं कि वो आपके ही परिवार के सदस्य ने लगाई हो। Follow 🚨 ऐसी ही सच्ची भूतिया कहानी और गहरी सीख सीखने के लिए मुझे Follow कर ले हो सकता है, बाद में आपको मेरा पेज ना मिले..!! #📚कविता-कहानी संग्रह #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #📓 हिंदी साहित्य #Bhutiya Kahani
chandrashekhar
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12 days ago
AI indicator
कहानी टंकी वाली मछली की ll बच्चों के लिए मजेदार वीडियो ll यूट्यूब पर पूरा वीडियो देखें https://youtu.be/b9iTfg3RD80?si=Y5DPtC6jfr8X9Hwo #कहानी #kids #story #video YouTube channel name @NotOutCK
HARISH PATRE
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1 months ago
एक परिवार की कहानी नहीं है—ये उस कड़वे सच की झलक है जहाँ रिश्ते “खून” से नहीं, “स्वार्थ” से चलने लगते हैं। एक बाप का कर्तव्य होता है कि वो अपने बच्चों के बीच न्याय करे, सहारा बने—लेकिन यहाँ उल्टा हो रहा है। बड़ी बेटी, जो खुद संघर्ष में है, उससे लाखों की मांग करना और ना देने पर रिश्ता तोड़ देना—ये पिता का नहीं, एक स्वार्थी व्यक्ति का व्यवहार है। और छोटा बेटा, जो खुद गलत रास्ते पर है, वही बहन पर दबाव बना रहा है—ये भी दिखाता है कि परिवार में मूल्य कहाँ खो गए। सबसे ज्यादा दर्दनाक बात ये है कि जो बेटियाँ चुपचाप सब सहती हैं—उन्हें ही सबसे कम समझा जाता है। बड़ी बेटी ने खेत की पर्ची तक लगाकर भाई की मदद की, लेकिन बदले में सम्मान नहीं मिला। छोटी बेटी, जो गरीब होते हुए भी बाप को संभालती है, उसी वक्त जब उसे जरूरत होती है, बाप साथ छोड़ देता है—ये सिर्फ लापरवाही नहीं, संवेदनहीनता है। रिश्ते तब तक ही खूबसूरत लगते हैं, जब तक उनमें “लेन-देन” नहीं घुसता। जहाँ स्वार्थ हावी हो जाए, वहाँ अपनापन धीरे-धीरे मर जाता है। लेकिन एक बात साफ है—गलती सिर्फ रिश्तों की नहीं, लोगों के चुनाव की भी है। हर रिश्ते को बचाना जरूरी नहीं होता। जहाँ सम्मान और समझ खत्म हो जाए, वहाँ दूरी बनाना कमजोरी नहीं, समझदारी होती है। आज के समय में शायद यही सबसे बड़ी सच्चाई है: “रिश्ते निभाने के लिए खून नहीं, दिल और नीयत साफ होनी चाहिए #story #कहानी