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puran
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3 months ago
बीच सड़क DSP पर चाकू से जानलेवा हमला, हालत गंभीर ! छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से एक बड़ी घटना सामने आई है। सुकमा जिले में पदस्थ DSP तोमेश वर्मा पर अज्ञात युवक ने चाकू से हमला किया। यह घटना दंतेवाड़ा शहर में टीवीएस शोरूम के पास हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घायल डीएसपी को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। हमले के बाद पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है। #cg #cg news #cg news #chattisgarh #chattisgarh
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3 months ago
RTE नियमों में बड़ा बदलाव | SA News Chhattisgarh #cg #cg news #cg news #chattisgarh #छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार अब RTE के तहत छात्रों का दाखिला सीधे कक्षा पहली में ही होगा। इससे पहले तक यह व्यवस्था नर्सरी और केजी कक्षाओं में भी लागू थी, लेकिन अब प्रारंभिक कक्षाओं को इससे बाहर कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले का छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि नर्सरी और केजी बच्चों की बुनियादी शिक्षा की नींव होती है। यदि इन कक्षाओं को RTE से बाहर रखा गया, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शुरुआती शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का तर्क है कि पहली कक्षा में सीधे प्रवेश लेने वाले बच्चों को पहले से स्कूल वातावरण की आदत नहीं होती, जिससे पढ़ाई में परेशानी आ सकती है। साथ ही निजी स्कूलों पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि नर्सरी और केजी से ही छात्रों की संख्या तय होती है। वहीं शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से नियमों में स्पष्टता आएगी और RTE के क्रियान्वयन में आसानी होगी। सरकार का कहना है कि पहली कक्षा से शिक्षा को अनिवार्य करने से बच्चों की औपचारिक पढ़ाई एक समान स्तर से शुरू होगी।
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3 months ago
केनापारा में प्राथमिक विद्यालय का अभाव | सरगुजा | जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत केनापारा में शासकीय प्राथमिक विद्यालय नहीं होने से ग्रामीण बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में विद्यालय न होने के कारण नन्हे बच्चों को प्रतिदिन लगभग दो किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पोड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय में #cg #cg news #cg news #chattisgarh #छत्तीसगढ़ पढ़ने जाना मजबूरी बन गया है। इस स्थिति ने बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने बताया कि जब केनापारा आश्रित ग्राम था, उस समय यहां शासकीय प्राथमिक शाला संचालित होती थी। वर्ष 2015 में शिक्षा विभाग द्वारा एक ही ग्राम पंचायत क्षेत्र में दो प्राथमिक शालाएं होने का हवाला देते हुए केनापारा की शाला को पोड़ी प्राथमिक शाला में मर्ज कर दिया गया। बाद में वर्ष 2019 में केनापारा को अलग ग्राम पंचायत का दर्जा मिला, लेकिन इसके बावजूद यहां पुनः प्राथमिक शाला शुरू नहीं की गई। विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों को कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ते और भी जोखिम भरे हो जाते हैं, जिससे छोटे बच्चों को रोज़ाना आने-जाने में काफी कठिनाई होती है। कई बार मौसम और दूरी के कारण बच्चों की उपस्थिति भी प्रभावित होती है।
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3 months ago
छत्तीसगढ़ में शासकीय कामकाज पर एक बार फिर हड़ताल की मार पड़ने वाली है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारी अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 29 से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल के चलते राज्य के सरकारी दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। #cg #cg news #cg news #छत्तीसगढ़ #chattisgarh हड़ताल की तैयारियों के तहत 13 दिसंबर को रायपुर स्थित इंद्रावती भवन में छत्तीसगढ़ संचालनालयीन शासकीय कर्मचारी संघ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए अलग-अलग पदाधिकारियों की टीमें गठित की गईं। ये टीमें प्रदेश के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों को आंदोलन के उद्देश्य और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दे रही हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू करना, डीए एरियर्स को जीपीएफ खाते में समायोजित करना, चार स्तरीय समयमान वेतनमान का लाभ, विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पिंगुआ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करना शामिल है। इसके अलावा पंचायत सचिवों के शासकीयकरण, अनुकंपा नियुक्ति नियमों में शिथिलीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अर्जित अवकाश नगदीकरण सीमा 300 दिवस करने और दैनिक व संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की भी मांग की गई है। फेडरेशन ने सरकार से अपील की है कि हड़ताल से पहले मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इसका असर आम जनता की सेवाओं पर भी देखने को मिल सकता है।