Newsgenix

Newsgenix
1.5K ने देखा
2 दिन पहले
#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📹 वायरल वीडियो भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप, राघोपुर-नरकटिया तटबंध पर तेज कटाव; 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर नदी में समाया, बांध बचाने की जद्दोजहद जारी #Bhagalpur #GangaRiver #GangaFlood #ViralVideo #Newsgenix
Newsgenix
1.4K ने देखा
3 दिन पहले
#🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📋1 सितंबर से होगा बड़ा बदलाव! देखें लिस्ट🔀 अगस्त का महीना समाप्त होने के साथ ही 1 सितंबर 2026 से देश में 8 बड़े वित्तीय और व्यावहारिक बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव आम जनता के बजट पर पड़ेगा। हर महीने की पहली तारीख की तरह तेल विपणन कंपनियां एलपीजी (LPG) सिलेंडर की नई कीमतें और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के दाम जारी करेंगी। वहीं, जिन एलपीजी ग्राहकों ने 31 अगस्त तक अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर से घरेलू सिलेंडर मिलने में परेशानी आ सकती है या महंगा सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है। #SeptemberRules2026 #LPG #eKYC #FinancialChanges #Newsgenix
Newsgenix
444 ने देखा
5 दिन पहले
#📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🌐 राष्ट्रीय अपडेट नेपाल में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने देश की जलविद्युत परियोजनाओं को बड़ा झटका दिया है। भोटेकोशी और त्रिशूली घाटियों में ग्लेशियर ढहने के बाद आई अचानक बाढ़ में 14 हाइड्रोपावर परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं या पूरी तरह तबाह हो गई हैं। इनमें छह निर्माणाधीन परियोजनाएं भी शामिल हैं। नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार, इन परियोजनाओं को हुए नुकसान से करीब 431 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। यह देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 12 प्रतिशत से अधिक है। इस नुकसान ने नेपाल की उस आर्थिक रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें हिमालयी नदियों से मिलने वाली जलविद्युत क्षमता को देश के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार माना गया है। नेपाल सरकार लंबे समय से खुद को नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े उत्पादक और बिजली निर्यातक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से भारत, चीन और दूसरे देशों की कंपनियों ने भी नेपाल के हाइड्रोपावर क्षेत्र में निवेश बढ़ाया है। नेशनल यूनिवर्सिटी आफ सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज के रिसर्च फेलो पुष्प शर्मा के मुताबिक, नेपाल के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं। एक तरफ जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है। दूसरी तरफ जलविद्युत परियोजनाओं के विकास और बिजली के निर्यात के लिए नेपाल की भारत पर भारी निर्भरता भी एक चुनौती है। नेपाल की अतिरिक्त बिजली का सबसे बड़ा और व्यावहारिक बाजार फिलहाल भारत ही है। दूसरे देशों तक बिजली पहुंचाने के लिए भी भारत का ग्रिड महत्वपूर्ण है। ऐसे में नेपाल के लिए बड़े पैमाने पर जलविद्युत परियोजनाओं का विकास केवल उत्पादन का सवाल नहीं, बल्कि निवेश, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। भारत और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ता है। नेपाल में करीब 83 गीगावाट की सैद्धांतिक जलविद्युत क्षमता मानी जाती है, जिसमें लगभग 43 गीगावाट आर्थिक और तकनीकी रूप से विकसित की जा सकने वाली क्षमता है। हालांकि, इस क्षमता का अभी छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया है। बांधों, बिजलीघरों, ट्रांसमिशन लाइनों और दूसरे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए नेपाल को बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। सीमित संसाधनों और भौगोलिक चुनौतियों के बीच यह आसान काम नहीं है। नेपाल की स्थापित जलविद्युत क्षमता 2024 में करीब 3,000 मेगावाट से बढ़कर अब 4,000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है। #Nepal #Newsgenix #Newsgenix
Newsgenix
504 ने देखा
5 दिन पहले
#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से बाल-बाल बचे भारतीय-अमेरिकी दंपति अंजना राजा और पट्टाभिराम वेंकटेशन के बेटे विक्रम रवि ने कहा कि उनके माता-पिता का बच जाना सिर्फ एक चमत्कार था। विक्रम रवि ने बताया कि वे बिस्तर पर आराम कर रहे थे जब उनकी मां का फोन आया। मां अंजना की पहली बात थी कि शिव ने हमें बचाया, और वे रो रही थीं। अंजना राजा और पट्टाभिराम वेंकटेशन तिब्बत की तीर्थ यात्रा पर गए थे। उनका टूर बस वहां खड़ा था जब उन्होंने पानी का पहाड़ अपनी ओर आता देखा। अंजना ने इसे सुनामी जैसा बताया। पट्टाभिराम ने सीबीएस न्यूज को बताया कि यह 60-70 फीट ऊंचा लग रहा था। काला-काला सुनामी जैसा। मैं सोच रहा था कि यह पानी नहीं, जंगल की आग है। अंजना ने पति का कॉलर पकड़कर खींचा और कहा- भागो! दोनों बस से कूद गए। रास्ते में घर गिरते दिखे। अंजना ने कहा कि मैंने मौत को अपनी आंखों के सामने देखा। एक गाइड ने उन्हें पास के पहाड़ की चोटी पर समतल जगह तक ले गया। चढ़ाई बहुत कठिन थी – संकरी, फिसलन भरी, कीचड़, पत्थर और चट्टानों से भरी। अंजना ने कहा कि इतनी ऊंचाई पर हम कैसे चढ़ गए, पता नहीं। वे रात बकरी के शेड में अन्य बचे हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों के साथ रहे। अगले दिन उन्हें हेलीकॉप्टर से निकाला गया। टूर बस में सवार सभी लोग बच गए। विक्रम ने सीएनएन को बताया कि वे बहुत राहत महसूस कर रहे हैं कि माता-पिता खुद बता सके कि वे सुरक्षित हैं। अंजना ने कहा कि घर लौटकर सबसे पहले बच्चों को गले लगाएंगी और उन्हें जीवन को गंभीरता से लेने की सीख देंगी। #Nepal #Newsgenix #Newsgenix
Newsgenix
3.1K ने देखा
5 दिन पहले
हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) के अधिकारियों के इस दावे पर हैरानी जताई है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले के बारे में जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि एक आम आदमी भी इसके बारे में जानता है, लेकिन एनएमसी के अधिकारियों को इसके बारे में पता नहीं है। इसमें एक आईएएस अधिकारी (एनएमसी कमिश्नर) भी शामिल हैं। जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस रजनीश व्यास की बेंच ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 4 सितंबर से पहले अलग-अलग हलफनामे (affidavits) दाखिल करें। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि क्या वे अपनी पिछली सफाई पर कायम हैं या कोई स्पष्टीकरण देना चाहते हैं। अदालत महल दंगा मामले के मुख्य आरोपी फहीम खान की 69 वर्षीय मां मेहरुन्निसा शमीम खान और अब्दुल हफीज (96) द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब्दुल हफीज की संपत्ति का कुछ हिस्सा इसलिए गिरा दिया गया था क्योंकि उनका एक रिश्तेदार महल दंगे का आरोपी था। बेंच के सामने मुख्य मुद्दा यह था कि नगर निकाय ने नोटिस जारी करने के बाद किस तरह और कितनी तेजी से तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। 10 जुलाई को कोर्ट ने एनएमसी को रिकॉर्ड पर यह जानकारी देने का निर्देश दिया था कि पिछले 10 सालों में कितनी बार उसने इतनी ही तेजी दिखाई और नोटिस की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद अनधिकृत या अवैध निर्माणों को गिराया। नगर निकाय ने माना कि उसके आधिकारिक डेटा में पिछले 10 सालों में ऐसा कोई मामला नहीं मिला, जिसमें नोटिस की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद ऐसी कार्रवाई की गई हो। जजों ने दूसरे मामलों में कोर्ट के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि एक दशक से ज्यादा समय से निर्देश दिए जाने के बावजूद एनएमसी ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सिविक बॉडी से 13 नवंबर, 2024 को आए बुलडोजर फैसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के बारे में सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी भी ढांचे को गिराने से पहले अधिकारियों को 15 दिन का नोटिस देना होगा। यह नियम तब भी लागू होगा जब किसी कानून में कम समय का नोटिस (जैसे 24 घंटे का नोटिस) देने की इजाजत हो। #SC #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #Newsgenix
Newsgenix
582 ने देखा
24 दिन पहले
#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट सीएम धामी का बड़ा फैसला: मानव-वन्यजीव संघर्ष में दूसरों की जान बचाने वालों को मिलेगा राज्य पुरस्कार। #Newsgenix #CMDhami #Uttarakhand #UttarakhandNews #Devbhoomi