🙏🏼 🌷श्री राम लक्ष्मण सीता हनुमानजी🌷🙏🏼

sn vyas
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27 days ago
#🙏🏼 🌷श्री राम लक्ष्मण सीता हनुमानजी🌷🙏🏼 #🙏🌺ॐ रामदूताय नमः🌺🙏 🙏 जय श्री राम🙏 🙏🌺 जय हनुमानजी 🌺🙏 जय बालाजी महाराज हनुमान जी और भगवान शिव का संबंध अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक है। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार माने जाते हैं, इसलिए उनका शिव भक्त होना वास्तव में स्वयं के ही एक अंश का दूसरे पूर्ण स्वरूप के प्रति समर्पण है। हनुमान जी के शिव भक्त बनने और उनके अवतार लेने के पीछे मुख्य रूप से भगवान विष्णु की सेवा का संकल्प था। जब भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में श्री राम के रूप में अवतार लेने का निश्चय किया, तब भगवान शिव ने भी उनकी सहायता के लिए पृथ्वी पर आने की इच्छा प्रकट की। शिव जी जानते थे कि श्री राम को एक ऐसे सहायक की आवश्यकता होगी जो शक्ति, बुद्धि और भक्ति में अद्वितीय हो। हनुमान जी के इस स्वरूप और भक्ति के पीछे कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं: * रुद्र अवतार: वायु पुराण और शिव पुराण के अनुसार, हनुमान जी शिव के अंश हैं। माता अंजनी की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें पुत्र रूप में प्राप्त होने का वरदान दिया था, जिसके फलस्वरूप हनुमान जी का जन्म हुआ। * दास्य भाव की पराकाष्ठा: हनुमान जी ने शिव के अंश होते हुए भी श्री राम (विष्णु अवतार) की भक्ति को सर्वोपरि माना। शिव जी स्वयं श्री राम के अनन्य भक्त हैं, और हनुमान जी के रूप में उन्होंने 'सेवक' बनकर भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। * गुरु रूप में सम्मान: कई कथाओं में उल्लेख मिलता है कि हनुमान जी भगवान शिव को अपना आराध्य और गुरु मानते हैं। हनुमान जी की असीम शक्ति और ज्ञान का स्रोत भी शिव तत्व ही माना जाता है। इस प्रकार, हनुमान जी का शिव भक्त होना एक ओर उनके स्वयं के मूल स्वरूप (रुद्र) से जुड़ाव है, तो दूसरी ओर श्री राम की सेवा के माध्यम से शिव जी की ही इच्छा को पूर्ण करना है।