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*॥ अथ सूर्य द्वादश नाम स्तुतिः ॥*
*॥ पद्मपुराण , उत्तरखण्ड – निम्बार्कदेवतीर्थ माहात्म्य ॥*
[ `सूर्य द्वादश नाम – क्रमशः श्लोकार्थ` ]
*अत्र द्वादशनामानि गत्वा ये वै पठंति च ।*
*ते नराः पुण्यकर्माणो यावज्जीवं न संशयः ॥८॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 इस निम्बार्क तीर्थ में जाकर जो मनुष्य सूर्य के द्वादश नामों का पाठ करते हैं , वे मनुष्य इसमें कोई संशय नहीं कि जीवनपर्यन्त पुण्यकर्म करने वाले बने रहते हैं ।`
*आदित्यं भास्करं भानुं रविं विश्वप्रकाशकम् ।*
*तीक्ष्णांशुं चैव मार्तंडं सूर्यं चैव प्रभाकरम् ॥९॥*
*विभावसुं सहस्राक्षं तथा पूषणमेव च ।*
*एवं द्वादशनामानि यः पठेत्प्रयतः सुधीः ॥१०॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 वे द्वादश नाम ये हैं – १. आदित्य , २. भास्कर , ३. भानु , ४. रवि , ५. विश्वप्रकाशक , ६. तीक्ष्णांशु , ७. मार्तण्ड , ८. सूर्य , ९. प्रभाकर , १०. विभावसु , ११. सहस्राक्ष , १२. पूषण ।`
`श्लोक १० उत्तरार्ध - ११ पूर्वार्ध ~`
*एवं द्वादशनामानि यः पठेत्प्रयतः सुधीः ।*
*धनं वै पुत्रपौत्रांश्च लभते नगनंदिनि ।*
`श्लोकार्थ 👉🏻 हे नगनन्दिनि पार्वती ! जो बुद्धिमान मनुष्य पवित्र होकर इन बारह नामों का पाठ करता है , वह धन एवं पुत्र–पौत्रों को प्राप्त करता है ।`
`श्लोक ११ उत्तरार्ध – १२ ~`
*एकैकं नाम आश्रित्य योऽर्चयेत नरो भुवि ।*
*सप्तजन्मभवेद्विप्रो धनाढ्यो वेदपारगः ।*
*क्षत्रियो लभते राज्यं वैश्यो धनमवाप्नुयात् ॥१२॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो मनुष्य भूलोक में इनमें से एक–एक नाम का आश्रय लेकर सूर्यदेव की अर्चना करता है , वह सात जन्मों तक ब्राह्मण होकर धन से समृद्ध तथ वेदों में पारंगत होता है । क्षत्रिय हो तो उसे राज्य की प्राप्ति होती है औऱ वैश्य हो तो वह धन को प्राप्त करता है ।`
*शूद्रो वै लभते भक्तिं तस्मात्सूक्तं परं जपेत् ॥१३॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 शूद्र हो तो वह उत्तम भक्ति को प्राप्त करता है । इसलिए इस परम् पवित्र सूक्त का सदैव जप करना चाहिए । यही समस्त/सभी वर्णों हेतु कल्याणकारी है ।`
`आदित्याय नमो नमः☀️🚩`
`आप समस्त को सूर्यदेव की कृपा से तेजस्वी , आरोग्यमय प्रभात की मङ्गलकामना💐💐💐`
`शुभ रविवार ☀️ सूर्यदेव की कृपा आप समस्त पर बनी रहे💐💐💐`
`ॐ घृणि सूर्याय नमः🌹`
`ॐ भास्कराय नमः🌞`
`हर हर महादेव🔱`
`हर हर शङ्कर🚩`
`जय जय शङ्कर🚩`
`~सर्वज्ञ शङ्कर🚩`
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