राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन वंदन

🇭ARISH🇯AHIREY
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12 दिन पहले
#💐राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी जयंती🙏 “मस्तक ऊँचा हुआ मही का, धन्य हिमालय का उत्कर्ष । हरि का क्रीड़ा क्षेत्र हमारा, भूमि-भाग्य सा भारतवर्ष ॥” – मैथिलीशरण गुप्त (3 अगस्त 1886 – 12 दिसंबर 1964) हिंदी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत, काव्य-शिरोमणि, प्रखर चिंतक, 'पद्म भूषण', 'राष्ट्रकवि' “मैथिलीशरण गुप्त जी” को 140वीं उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि ! मैथिलीशरण गुप्त जी का साहित्यिक योगदान अमूल्य है। उनकी रचनाएं दीर्घकाल तक हमें प्रेरित करती रहेंगी और हमारे साहित्यिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेंगी। #मैथिलीशरण गुप्त #🌷मैथिलीशरण गुप्त जी की जयंती 3 अगस्त🇮🇳 #राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
pandit gaurav sharma
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12 दिन पहले
पद्म भूषण से सम्मानित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी की जन्म जयंती पर उन्हें मेरा कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं..!! #मैथिलीशरण गुप्त #💐राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी जयंती🙏 #🌷मैथिलीशरण गुप्त जी की जयंती 3 अगस्त🇮🇳 #जयंती #share
Ajay Sharma
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13 दिन पहले
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उपदेश गीता का हमारा युद्ध का ही गीत है, जीवन-समर में भी जनों को जो दिलाता जीत है। हिंदी साहित्य को राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की अमर वाणी देने वाले राष्ट्रकवि, पद्म भूषण मैथिलीशरण गुप्त जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।। 🙏🙏 उनके शब्द पीढ़ियों को सत्य, त्याग और मर्यादा के पथ पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे। जीवन परिचय :- माता का नामः काशीबाई पिता का नामः सेठ रामचरग गुप्त जन्मः 3 अगस्त 1886 (चिरगाँव, झाँसी, उत्तर प्रदेश) निधन: 12 दिसंबर 1964 (नई दिल्ली) #💐राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी जयंती🙏 #🌷मैथिलीशरण गुप्त जी की जयंती 3 अगस्त🇮🇳 #मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि #राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन #मैथिलीशरण गुप्त