हिंदी_शायरी

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21 days ago
2122 2122 2122 212 रूह है मजबूत अपनी और जिस्मो जान भी दर्द है सीने में अपने ओ दिले अरमान भी अब कहें क्या कैसे बदला है मुकद्दर ये मेरा आँधियाँ है ज़िन्दगी में और कुछ तूफान भी दिल दिया है या लिया ये जान ना पाये कभी आग का दरिया मुहब्बत और दिल नादान भी अब इबादत में है सर झुका हुआ अपना सदा टूट चुका हर भरम अपना ओ अभमान भी कर रही बर्बाद हम को दिल्लगी उस की यहाँ घर उजड़ चुका है अपना उजड़ा है बागान भी छोड़ दे अब तो मुहब्बत ऐ दिले नादां यहाँ सज चुकी तेरी चिता ओ मौत का सामान भी ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 28/6/2018 #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️