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#प्रातःकालीन प्रणाम
प्रातःकालीन प्रणाम - प्रणाम ४० प्रातःकालीन मेहनत लगती है सपनो को सच बनाने में, हौसला लगता है को पाने में, बुलन्दियों बरसो लगते है जिन्दगी बनाने में, और जिन्दगी फिर भी कम पडती है रिश्ते निभाने में। नींद के समंदर में ख्वाबों का जहाज मौन बहे जाता है बिन किए आवाज दुःख को सुख में बदलते रहिये. धीरे धीरे ही सही मगर चलते रहिये.. प्रणाम ४० प्रातःकालीन मेहनत लगती है सपनो को सच बनाने में, हौसला लगता है को पाने में, बुलन्दियों बरसो लगते है जिन्दगी बनाने में, और जिन्दगी फिर भी कम पडती है रिश्ते निभाने में। नींद के समंदर में ख्वाबों का जहाज मौन बहे जाता है बिन किए आवाज दुःख को सुख में बदलते रहिये. धीरे धीरे ही सही मगर चलते रहिये.. - ShareChat