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शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
शिव कुमार कुशवाहा
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#प्रातःकालीन प्रणाम
प्रातःकालीन प्रणाम जिंदगी में जो कुछ भी होता है किसी वजह से होता है.. या तो वो आपको कुछ बनाकर जाता है.. या फिर कुछ सिखाकर. प्रातःकालीन प्रणाम जिंदगी में जो कुछ भी होता है किसी वजह से होता है.. या तो वो आपको कुछ बनाकर जाता है.. या फिर कुछ सिखाकर.
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    प्रणाम प्रातःकालीन CTGT 80 रूलाए कटता शार 16[ 616 ಕiಾಗ ಕ कटे হ্য লো कैस प्रणाम प्रातःकालीन CTGT 80 रूलाए कटता शार 16[ 616 ಕiಾಗ ಕ कटे হ্য লো कैस
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    इंसान के शब्दों पर नहीं, उसके इरादों पर गौर कीजिये। कोई डांट कर आपका भला चाहता है, तो कोई मुस्कुराकर जड़ काटता है। समय का इंतज़ार कीजिये, वह नकाब भी हटाता है और सच्चाई भी बताता है! সানঃব্ালীন স্তাম इंसान के शब्दों पर नहीं, उसके इरादों पर गौर कीजिये। कोई डांट कर आपका भला चाहता है, तो कोई मुस्कुराकर जड़ काटता है। समय का इंतज़ार कीजिये, वह नकाब भी हटाता है और सच्चाई भी बताता है! সানঃব্ালীন স্তাম
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    कभी कभी हम गलत नहीं होते,बस R 4 वों शब्द नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके & प्रातःकालीन प्रणाम कभी कभी हम गलत नहीं होते,बस R 4 वों शब्द नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके & प्रातःकालीन प्रणाम
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    प्रातः कालीन प्रणाम !! अपना वक्त देता है, 3 তী वो दरअसल अपनी ज़़िंदगी का हिस्सा अहम 8... ೯೯ उसकी कदर करना सीख लो जनाब, क्योंकि हर कोई इतना अमीर नहीं होता कि वक्त लुटा सके. वरना एक दिन हालात यूँ बदलते हैं न वो शख़्स पास होता है, न उसका दिया हुआ वक्त... प्रातः कालीन प्रणाम !! अपना वक्त देता है, 3 তী वो दरअसल अपनी ज़़िंदगी का हिस्सा अहम 8... ೯೯ उसकी कदर करना सीख लो जनाब, क्योंकि हर कोई इतना अमीर नहीं होता कि वक्त लुटा सके. वरना एक दिन हालात यूँ बदलते हैं न वो शख़्स पास होता है, न उसका दिया हुआ वक्त...
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    प्रातःकालीन प्रणाम पैसा ज़रूरी है लेकिन पैसा ही सब कुछ नहीं है। पैसा घर बना सकता है लेकिन परिवार नहीं। पैसा दवा खरीद सकता है, लेकिन सेहत नहीं| पैसा लोगों की भीड़ जुटा सकता है, लेकिन सच्चे रिश्ते नहीं| इसलिए पैसा कमाइए, खूब कमाइए, लेकिन इतना भी मत कमाइए कि रिश्तों , संस्कारों और इंसानियत की कीमत भूल जाएँ। रखिए  दुनिया में सबसे अमीर इंसान वह याद नहीं जिसके पास सबसे ज़्यादा पैसा है, बल्कि वह है जिसके पास सुकून, सम्मान और अपने लोगों का प्यार है। स्वस्थ रहें मस्त रहें प्रातःकालीन प्रणाम पैसा ज़रूरी है लेकिन पैसा ही सब कुछ नहीं है। पैसा घर बना सकता है लेकिन परिवार नहीं। पैसा दवा खरीद सकता है, लेकिन सेहत नहीं| पैसा लोगों की भीड़ जुटा सकता है, लेकिन सच्चे रिश्ते नहीं| इसलिए पैसा कमाइए, खूब कमाइए, लेकिन इतना भी मत कमाइए कि रिश्तों , संस्कारों और इंसानियत की कीमत भूल जाएँ। रखिए  दुनिया में सबसे अमीर इंसान वह याद नहीं जिसके पास सबसे ज़्यादा पैसा है, बल्कि वह है जिसके पास सुकून, सम्मान और अपने लोगों का प्यार है। स्वस्थ रहें मस्त रहें
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    प्रातःकालीन प्रणाम !! जब हालात बदल जाते हैं तो लोग भी बदल जाते हैं, जो कभी अपने होते थे वो भी अक्सर पराए नज़र आते हैं, क़समें-वादे सब धुंधले हो जाते हैं फिर रिश्तों के रंग फ़ीके पड़ जाते हैं, चेहरे तो वही रहते हैं लेकिन एहसास और जज़्बात बदल जाते हैं। आपका दिन शुभ हो प्रातःकालीन प्रणाम !! जब हालात बदल जाते हैं तो लोग भी बदल जाते हैं, जो कभी अपने होते थे वो भी अक्सर पराए नज़र आते हैं, क़समें-वादे सब धुंधले हो जाते हैं फिर रिश्तों के रंग फ़ीके पड़ जाते हैं, चेहरे तो वही रहते हैं लेकिन एहसास और जज़्बात बदल जाते हैं। आपका दिन शुभ हो
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    प्रातःकालीन प्रणाम ४० की कामयाबी दुसरो देख कर जलो मत उसे प्रेरणा बनाओ, जलोगे तो बिखर जाओगे , और प्रेरणा बनाओगे तो शिखर तक जाओगे। प्रातःकालीन प्रणाम ४० की कामयाबी दुसरो देख कर जलो मत उसे प्रेरणा बनाओ, जलोगे तो बिखर जाओगे , और प्रेरणा बनाओगे तो शिखर तक जाओगे।
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    जन्म से लेकर मरण तक हजार रिश्ते बनते होंगे परन्तु॰. @पिता के जैसा देखरेख करने वाला और 4 मा जैसा प्रेम करने वाला दोबारा कोई नहीं मिलता..!! सत्य कथन प्रातःकालीन प्रणाम जन्म से लेकर मरण तक हजार रिश्ते बनते होंगे परन्तु॰. @पिता के जैसा देखरेख करने वाला और 4 मा जैसा प्रेम करने वाला दोबारा कोई नहीं मिलता..!! सत्य कथन प्रातःकालीन प्रणाम
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    वक्त के साथ चले गए वो। अब वो लौटकर न आएंगे। रह गईं बस उनकी यादें, जिनमें हम हर पल मुस्कुराएंगे। लोग आते हैं, फिर चले जाते हैं, ज़िंदगी के काफ़िले यूँ ही बढ़ते जाते हैं। इसलिए जी लो हर एक लम्हा, खुशियों के रंग में, अपनों के संग। पर कौन छूट जाए, क्या पता किस मोड़ क्योंकि यहाँ सब बिन कहे ही चले जाते हैं।। प्रातःकालीन प्रणाम वक्त के साथ चले गए वो। अब वो लौटकर न आएंगे। रह गईं बस उनकी यादें, जिनमें हम हर पल मुस्कुराएंगे। लोग आते हैं, फिर चले जाते हैं, ज़िंदगी के काफ़िले यूँ ही बढ़ते जाते हैं। इसलिए जी लो हर एक लम्हा, खुशियों के रंग में, अपनों के संग। पर कौन छूट जाए, क्या पता किस मोड़ क्योंकि यहाँ सब बिन कहे ही चले जाते हैं।। प्रातःकालीन प्रणाम
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  • शिव कुमार कुशवाहा - Author on ShareChat
    शिव कुमार कुशवाहा
    #प्रातःकालीन प्रणाम
    किसी को गलत समझने से पहले एक बार   उसकी हालत जानने की कोशिश जरूर करें. . क्योंकि आजकल ग़लती से गलतफहमी से रिश्ते टूट जाते हैं.. ज्यादा प्रातःकालीन प्रणाम ४० किसी को गलत समझने से पहले एक बार   उसकी हालत जानने की कोशिश जरूर करें. . क्योंकि आजकल ग़लती से गलतफहमी से रिश्ते टूट जाते हैं.. ज्यादा प्रातःकालीन प्रणाम ४०
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