Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
630 views • 5 days ago
#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
हरि शरणं (C धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं ள वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम् मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शंकरं वंदे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्री रामभूपप्रियम् धर्म रूपी वृक्ष के मूल, विवेक रूपी समुद्र को आनंद देने वाले पूर्णचन्द्र, वैराग्य रूपी कमल के (विकसित करने पाप रूपी घोर अंधकार को निश्चय ही मिटाने वाले) सूर्य वाले, तीनों तापों को वाले, मोह रूपी बादलों के ೯೯ समूह को छिन्न-भिन्न करने की विधि (क्रिया) में आकाश ब्रह्माजी के वंशज (आत्मज) से उत्पन्न पवन स्वरूप, महाराज श्री रामचन्द्रजी के प्रिय श्री तथा कलंकनाशक शंकरजी की मैं वंदना करता हूँ ५ हर हर महादेव ৫
16 shares

More like this

  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    Minac8e೫q < 8uR9QUuLL0,1d5ಇ7 q೩5855೩೩೩೩ सद्चिब्तन हर  அ 66 यह बरिको स द्खते रहते हं कि सामन बेठ लंबी चेड़रि बातें करने वाला व्यकन हमरे विचरधार $37, बँधा सथि, अखण्ठ ज्यति याहमर सहित्य के मध्यमरः ক हय नहों ? यदि वह इनरबको उपेक्षा कराहे  ,ता हम कि यहदर्तक टिकन वाहानहीं है সময়ল ঠৈন ( जेहमर विचारंको प्यारनहों कर्ते , उनका मूल्य रलेरकेलमीप्र  निर्ढेशब्दभले हि॰ वे शिष्टाचार में नहों सनझते , ) S,SSI,RaE:aek: कानकीकेरई अगानहें खखे { किसबडू दूरहें / उनर्सा ।सकते / ~ परमप्ूज्य उरुद्व॰. (वङ्ग्य कं ६६ ' 7 awgpofficial Shantkun Rishi Chintan  +Wawgp org Shuntikun] Video
    19
    7
  • शुभम अत्री [कुकू, शुभू] - Author on ShareChat
    शुभम अत्री [कुकू, शुभू]
    #🙏जय माँ गायत्री देवी🙏 #🙏🏻💐 जय माँ गायत्री देवी जी 💐🙏🏻 #🌹माँ गायत्री जयंती 🙏 #🪔गायत्री जयंती ✨ #R गुड मार्निग दिल से
    ShareChat @Mahendra Arts गायत्री ज्यँती 28 3/2026 சசர்பபரிசிசி ँ भूर्भुवः स्वः तमसो मा ज्योतिर्गमय ম রান  কা সক্াংা কল | जीवन  सृप्रभात
    16
    18
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    यज्ञ ऐसा आवश्यक कर्म है कि उसे करते ही रहना चाहिए क्योंकि इससे परमात्मा प्रसन्न होते हैं। जिस पर परमात्मा प्रसन्न होते हैं उसे किसी चीज की कमी नहीं रहती। यज्ञ परित्याग करने से मनुष्य अनेक सत्परिणामों से वंचित होकर अधोगामी बनता है। यज्ञ का ज्ञान विज्ञान वांग्मय २.५
    8
    7
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    स्वीकार की हुई गलती एक विजय है.
    11
    13
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं (C3 নিলামতু अनुरागी I I तजत बमन जिमि जन बड़भागी तुलसीदास जी कहते हैं कि जिस मनुष्य के हृदय में भगवान श्री राम के प्रति सच्चा प्रेम जागृत हो जाता है, उसके लिए संसार के बड़े से बड़े धननवैभव और सुख का कोई मूल्य नहीं रह जाता, जिस प्रकार कोई व्यक्ति वमन उल्टी ) करने के बाद उस त्यागी हुई ओर वस्तु की देखना भी नहीं चाहता और उससे घृणा करता है॰ उसी प्रकार रामभक्त सांसारिक भोग-विलास को अत्यंत हेय और निस्सार मानकर त्याग देते हैं॰ हालांकि संसार में धननसंपत्ति छोड़ना आसान नहीं है॰ लेकिन केवल वही जीव ऐसा कर पाता है जो बड़भागी होता है, अर्थात जिस पर भगवान की परम कृपा होती है।
    38
    32
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं जनम अनेक रचित अघ दहहीं सुमिरन जे नर करहीं सादर भव बारिधि गोपद इव तरहीं तुलसीदास जी कहते हैं कि अनजाने या मजबूरी में भी लिया गया राम   नाम जन्मों के पाप मिटा देता है॰ ऐसे में जो साधक पूर्ण श्रद्धा और प्रेम से লিব नाम-्जप करते हैं॰ उनके यह विशाल भवसागर गाय के खुर से बने छोटे से गड्ढे के समान सुगम होे जाता है और वे सहज ही मोक्ष पा लेते हैं। जय सियाराम
    66
    24
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं !! I नियत सा़फ़ और मन में विश्वास हो, तो ईश्वर हर बंद दरवाज़े के पीछे एक नया रास्ता खोल देते हैं सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम हरि शरणं !! I नियत सा़फ़ और मन में विश्वास हो, तो ईश्वर हर बंद दरवाज़े के पीछे एक नया रास्ता खोल देते हैं सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम
    39
    31
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं पितु  स्वामि सखा मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ भगवान जब वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुँचते हैं और हैं, तब महर्षि वाल्मीकि उनसे रहने के लिए योग्य स्थान পুত্তন श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचानते हुए बताते हैं कि उनके रहने के लिए सबसे उत्तम स्थान कहाँ है बाल्मीकि जी कहते है कि हे तात! जिनके स्वामी, मित्र, पिता, माता और गुरु सब कुछ केवल आप ही हैं, उनके मन रूपी मंदिर में आप सीता जी और अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ निवास कीजिए॰ ईश्वर को पाने के लिए बाहरी स्थानों की तलाश करने के बजाय अपने मन को निष्काम, निर्मल और अनन्य भक्ति से भरकर उसे प्रभु का मंदिर बनाना चाहिए हरि शरणं पितु  स्वामि सखा मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ भगवान जब वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुँचते हैं और हैं, तब महर्षि वाल्मीकि उनसे रहने के लिए योग्य स्थान পুত্তন श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचानते हुए बताते हैं कि उनके रहने के लिए सबसे उत्तम स्थान कहाँ है बाल्मीकि जी कहते है कि हे तात! जिनके स्वामी, मित्र, पिता, माता और गुरु सब कुछ केवल आप ही हैं, उनके मन रूपी मंदिर में आप सीता जी और अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ निवास कीजिए॰ ईश्वर को पाने के लिए बाहरी स्थानों की तलाश करने के बजाय अपने मन को निष्काम, निर्मल और अनन्य भक्ति से भरकर उसे प्रभु का मंदिर बनाना चाहिए
    100
    45
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    शुभ अरुणोदय "देह" ম ঐষা "रोग" अपनी होकर भी हानि पहुंचाता है.. और "औषधि" वन में पैदा होकर भी हमारा लाभ ही करती है.. "हित' वाला पराया भी अपना है॰. चाहने और अहित करने वाला अपना भी पराया है..!! गुरुदेव जय
    14
    16
Home
Explore
Wallet
Video