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अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
हरि शरणं !! I नियत सा़फ़ और मन में विश्वास हो, तो ईश्वर हर बंद दरवाज़े के पीछे एक नया रास्ता खोल देते हैं सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम हरि शरणं !! I नियत सा़फ़ और मन में विश्वास हो, तो ईश्वर हर बंद दरवाज़े के पीछे एक नया रास्ता खोल देते हैं सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    जय सियाराम पूजहि प्रभुहि देव बहु वेषा | राम रूप दूसर नहीं देखा। अवलोके रघुपति  ೩೯ನ? / सीता सहित न वेष घनेरे II अनेकों वेष धारण करके देवता प्रभु राम की पूजा कर रहे हैं, परंतु राम का दूसरा रूप कहीं नहीं देखा। देखे, মীনা মমীন যুেনাথ बहुत-से परंतु उनके वेष अनेक नहीं थे। जय सियाराम पूजहि प्रभुहि देव बहु वेषा | राम रूप दूसर नहीं देखा। अवलोके रघुपति  ೩೯ನ? / सीता सहित न वेष घनेरे II अनेकों वेष धारण करके देवता प्रभु राम की पूजा कर रहे हैं, परंतु राम का दूसरा रूप कहीं नहीं देखा। देखे, মীনা মমীন যুেনাথ बहुत-से परंतु उनके वेष अनेक नहीं थे।
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    ज़िंदगी में जब बचपन के खेल खत्म हो जाते हैं, उसके बाद फिर किस्मत के खेल शुरू हो जाते हैं। शुभ रात्रि जय मां गायत्री ज़िंदगी में जब बचपन के खेल खत्म हो जाते हैं, उसके बाद फिर किस्मत के खेल शुरू हो जाते हैं। शुभ रात्रि जय मां गायत्री
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४ हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४
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    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं जनम अनेक रचित अघ दहहीं सुमिरन जे नर करहीं सादर भव बारिधि गोपद इव तरहीं तुलसीदास जी कहते हैं कि अनजाने या मजबूरी में भी लिया गया राम   नाम जन्मों के पाप मिटा देता है॰ ऐसे में जो साधक पूर्ण श्रद्धा और प्रेम से লিব नाम-्जप करते हैं॰ उनके यह विशाल भवसागर गाय के खुर से बने छोटे से गड्ढे के समान सुगम होे जाता है और वे सहज ही मोक्ष पा लेते हैं। जय सियाराम
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    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    श्रीहुरिश्मृूहु प्रभु श्री र्म जी की कृपा आप सुभी पर बरसती रहे आप का दिवस शुभ व मंगलुमय हये सुविचार आज का प्रत्येक कार्य तब तक असंभव प्रतीत होता है, 3[ ಗಹ [ 34' संपन्न न कर लिया जाए! ' सुरेश जायसवाल देवास श्रीहुरिश्मृूहु प्रभु श्री र्म जी की कृपा आप सुभी पर बरसती रहे आप का दिवस शुभ व मंगलुमय हये सुविचार आज का प्रत्येक कार्य तब तक असंभव प्रतीत होता है, 3[ ಗಹ [ 34' संपन्न न कर लिया जाए! ' सुरेश जायसवाल देवास
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    33 श्रीहरि समूह प्रभु श्री राम जी की कृपा आप सभी पर बरसती रहे आप का दिवस शुभ व मंगलमय होः सुविचार  आज का C ৫১ ज्ञान बढ़ने पर यदि विनम्रता न बढ़े, तो वह ज्ञान केवल एक बोझ है। सूरेश जायसवाल देवास 33 श्रीहरि समूह प्रभु श्री राम जी की कृपा आप सभी पर बरसती रहे आप का दिवस शुभ व मंगलमय होः सुविचार  आज का C ৫১ ज्ञान बढ़ने पर यदि विनम्रता न बढ़े, तो वह ज्ञान केवल एक बोझ है। सूरेश जायसवाल देवास
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    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    क्रोध, अहंकार और लोभ मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलताएँ हैं; इन्हें त्यागना ही वास्तविक साधना है। हम बदलेंगे युग बदलेगा , हम सुधरेंगे युग सुधरेगा | क्रोध, अहंकार और लोभ मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलताएँ हैं; इन्हें त्यागना ही वास्तविक साधना है। हम बदलेंगे युग बदलेगा , हम सुधरेंगे युग सुधरेगा |
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    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    Aವn Lue परिपुष्ठता नहीं , शरीर की मनोबल की दृढ़ता ही असली बल है! True strength lies not in a healthy body but in the unwavering courage of the mind. Source: अखण्ड ज्योति - जनवरी १९८९ पूष्ठ ५९ Aವn Lue परिपुष्ठता नहीं , शरीर की मनोबल की दृढ़ता ही असली बल है! True strength lies not in a healthy body but in the unwavering courage of the mind. Source: अखण्ड ज्योति - जनवरी १९८९ पूष्ठ ५९
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    शतिकुणवहाट्स(प ^ 8५३qOL५LL० खिडीयो ११५०३५२१२२ जढ़कृिच्न ೧-೫u೫: भलाई खँ पवित्रत का मार्ग पाप औरनेचत 34 कहों ररल ह। भलाई मेंजे কী स्वाद ह॰ पवित्रत में जे आनन्द हॅ वह पाप और नेचत सरूरर अधिक मजेदार ह ।भलाई करना पाप करने ए ज्यादा आरन ९ क्यां ' कि परगल - स्वरूप मनुष्य की प्रवृति सभवतः पक्त्रितकी ओर ९ | पाप ओर नीचत बेड़ निकृष्त ' अप्रकृतिक हं | मनुष्य नहों चाहत किवह क पंजे नें फँस जगाय पं.श्रीरमः शर्शचर्य . 0 3खण्डः ज्येति अगरट १९४५ ो Shantikunj WhatsApp . 8439014110  सुधरेंगे , युग हम बदलेंगे, युग बदलेगा सुधरेगा हम awgpofficial Shantikunj Video Shantikunj Rishi Chintan WWWaWgpoIg Yougube Youlub;  शतिकुणवहाट्स(प ^ 8५३qOL५LL० खिडीयो ११५०३५२१२२ जढ़कृिच्न ೧-೫u೫: भलाई खँ पवित्रत का मार्ग पाप औरनेचत 34 कहों ररल ह। भलाई मेंजे কী स्वाद ह॰ पवित्रत में जे आनन्द हॅ वह पाप और नेचत सरूरर अधिक मजेदार ह ।भलाई करना पाप करने ए ज्यादा आरन ९ क्यां ' कि परगल - स्वरूप मनुष्य की प्रवृति सभवतः पक्त्रितकी ओर ९ | पाप ओर नीचत बेड़ निकृष्त ' अप्रकृतिक हं | मनुष्य नहों चाहत किवह क पंजे नें फँस जगाय पं.श्रीरमः शर्शचर्य . 0 3खण्डः ज्येति अगरट १९४५ ो Shantikunj WhatsApp . 8439014110  सुधरेंगे , युग हम बदलेंगे, युग बदलेगा सुधरेगा हम awgpofficial Shantikunj Video Shantikunj Rishi Chintan WWWaWgpoIg Yougube Youlub;
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