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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
چ5 जो मनुष्य दूसरों दुःख और कष्ट समझाता है, निश्चित ही ऐसे मनुष्य का दुःख ईश्वर स्वयं हर लेते है।
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    संत कंबीर साहेब धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय | माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय Il भावार्थः- हे मन! तू धीरे-्धीरे चल, सब कुछ समय पर होगा | जैसे माली सैकड़ों घड़े पानी से মীণনা ৪, লক্কিন কল নী ऋतु आने पर ही होता है । बीलक संत कबीर साहेब संत कंबीर साहेब धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय | माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय Il भावार्थः- हे मन! तू धीरे-्धीरे चल, सब कुछ समय पर होगा | जैसे माली सैकड़ों घड़े पानी से মীণনা ৪, লক্কিন কল নী ऋतु आने पर ही होता है । बीलक संत कबीर साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    संत कबीर साहेब जी का दोहा जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नहीं| सब अँधियारा मिट गया, जब दीपक देख्या माहिं।। कबीर எளி भावार्थ तब तक परमात्मा का अनुभव नृहीं हुआ| Uq గౌ '#' (3IeCR) থা, जब ` मैं॰ मिट गया और केवल हरि (परमात्मा ) का स्मरण और अनुभव हुआ, तब जीवन का अज्ञान और अंधकार दूर हो गया। जैसे दीपक के जलने से चारों ओर प्रकाश फैल जाता है, वैसे ही परमात्मा का अनुभव होने से जीवन प्रकाशित हो जाता है। कबीर भजन ज्ञान कबीर वाणी, भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम कचीर्भजन FS संत कबीर साहेब जी का दोहा जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नहीं| सब अँधियारा मिट गया, जब दीपक देख्या माहिं।। कबीर எளி भावार्थ तब तक परमात्मा का अनुभव नृहीं हुआ| Uq గౌ '#' (3IeCR) থা, जब ` मैं॰ मिट गया और केवल हरि (परमात्मा ) का स्मरण और अनुभव हुआ, तब जीवन का अज्ञान और अंधकार दूर हो गया। जैसे दीपक के जलने से चारों ओर प्रकाश फैल जाता है, वैसे ही परमात्मा का अनुभव होने से जीवन प्रकाशित हो जाता है। कबीर भजन ज्ञान कबीर वाणी, भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम कचीर्भजन FS
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    प्रैम प्रैम सब कोई कहै, प्रैम ना चिन्है कोई हरिजी मिलै, जा मारग प्रेम कहाये सोई। 99 3থ- सभी लोग प्रेम-प्रेम बोलते ्कहते हैं परंतु प्रेम को कोई नहीं जानता है। जिस मार्ग पर प्रभु का दर्शन होे जाये वही सच्चा प्रेम का मार्ग है। सदाुरू कबीर साहेब प्रैम प्रैम सब कोई कहै, प्रैम ना चिन्है कोई हरिजी मिलै, जा मारग प्रेम कहाये सोई। 99 3থ- सभी लोग प्रेम-प्रेम बोलते ्कहते हैं परंतु प्रेम को कोई नहीं जानता है। जिस मार्ग पर प्रभु का दर्शन होे जाये वही सच्चा प्रेम का मार्ग है। सदाुरू कबीर साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    मन के हारे हार है, मन के जीते जीत| कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की प्रीत Il संत कबीर साहेब जी সানাথ यदि मन हार मान ले तो व्यक्ति जीवन में हार जाता है, और यदि मन में विश्वास, बीजक और प्रेम है तो वह हर कठिनाई साहस কী নীন লনা ষ! পংসানসা কী পান कबीर साहेब जी का संदेश का मार्ग मन की सच्ची प्रीत (प्रेम ) से ही होकर जाता है। हर दिन को ईश्वर সন কী থান ৪হি নাস ম सत्संग ओर सदग्रंथ प्रेम बढ़ाओ। ओर सथर बनाओ। का सहारा लो। की देन मानो। कबार भजन ज्ञान कयारसजला कबीर वाणी, भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम SlG ঈপ ম নিমী सब में राम को पाओ सत्संग अपनाओ सुमिरण करो नाम मन के हारे हार है, मन के जीते जीत| कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की प्रीत Il संत कबीर साहेब जी সানাথ यदि मन हार मान ले तो व्यक्ति जीवन में हार जाता है, और यदि मन में विश्वास, बीजक और प्रेम है तो वह हर कठिनाई साहस কী নীন লনা ষ! পংসানসা কী পান कबीर साहेब जी का संदेश का मार्ग मन की सच्ची प्रीत (प्रेम ) से ही होकर जाता है। हर दिन को ईश्वर সন কী থান ৪হি নাস ম सत्संग ओर सदग्रंथ प्रेम बढ़ाओ। ओर सथर बनाओ। का सहारा लो। की देन मानो। कबार भजन ज्ञान कयारसजला कबीर वाणी, भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम SlG ঈপ ম নিমী सब में राम को पाओ सत्संग अपनाओ सुमिरण करो नाम
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    66 निंदक नियरे राखिए, 3ಫ ক্রুমী छवाय बिन पानी , साबुन बिन, निर्मल करे सुभाय।। 66 0 भावार्थ निंदक (आलोचक ) को अपने पास रखो, उसे अपने घर के आंगन में कूटी ( झोपड़ी ) बना कर रहने दो। वह बिना पानी और बिना साबुन के ही तुम्हारे स्वभाव को निर्मल (शुद्ध ) कर देता है। कबीर भजन ज्ञान कबीर वाणी , भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम 66 निंदक नियरे राखिए, 3ಫ ক্রুমী छवाय बिन पानी , साबुन बिन, निर्मल करे सुभाय।। 66 0 भावार्थ निंदक (आलोचक ) को अपने पास रखो, उसे अपने घर के आंगन में कूटी ( झोपड़ी ) बना कर रहने दो। वह बिना पानी और बिना साबुन के ही तुम्हारे स्वभाव को निर्मल (शुद्ध ) कर देता है। कबीर भजन ज्ञान कबीर वाणी , भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम
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    মামা মহী ন মন মহা, मर-्मर गए शरीर। आशा तृष्ा न मरी, कह गए दास कबीर।। মামা মহী ন মন মহা, मर-्मर गए शरीर। आशा तृष्ा न मरी, कह गए दास कबीर।।
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    गुरु पारस गुरु पुरुष है, गुरु चंदन बास सुबास| सतगुरु पारस जीव के, दीन्हा मुक्ति निवास।। आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा ) के पावन पर्व पर ஸரHகி आप सभी को गुरु हार्दिक शुभकामनाएं! 0- गुरु पारस गुरु पुरुष है, गुरु चंदन बास सुबास| सतगुरु पारस जीव के, दीन्हा मुक्ति निवास।। आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा ) के पावन पर्व पर ஸரHகி आप सभी को गुरु हार्दिक शुभकामनाएं! 0-
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    कबीर वाणी 66 कबीर मन पंछी भया, 3f3 3f3 45f73I II जो जैसी संगति मिले, सो तैसो फल आस Il 3থ: कबीर साहेब कहते हैं कि यह मन एक पक्षी के समान है जो यहाँ-वहाँ उड़ता रहता है। इसे जैसी संगति मिलती है, यह वैसे ही विचार और फल ग्रहण कर लेता है। कबीर वाणी 4 - कबीर वाणी 66 कबीर मन पंछी भया, 3f3 3f3 45f73I II जो जैसी संगति मिले, सो तैसो फल आस Il 3থ: कबीर साहेब कहते हैं कि यह मन एक पक्षी के समान है जो यहाँ-वहाँ उड़ता रहता है। इसे जैसी संगति मिलती है, यह वैसे ही विचार और फल ग्रहण कर लेता है। कबीर वाणी 4 -
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    संत कबीर साहेब जी का संदेश 66 ಹಾಗ, संध्या समय सुमिरन  दिन सब कर्म मिटाय। कहे कबीर जो नाम जपे, কাল নিকম ন 3াম Il 99 भावार्थ जो व्यक्ति सच्चे मन से संध्या समय परमात्मा का नाम स्मरण करता है, उसका मन शांत होता है, बुरे विचार दूर होते हैं और जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश बढ़ता है। नाम-सुमिरण ही मनुष्य का सबसे बड़ा सहारा है। कबीर af संध्या समय करें ये पाँच कार्य ईश्वर से दिनभर सबके भले की शांत बैठकर दीप जलाएं सत्संग चाचन যা বোংযায কং कामना करें ಹ अंधकार मिटाएं की क्षमा माँगें বুসিনে' Kabir Bhajan Gyan संध्या का महत्व पर आपको संत कबीर साहेब जी की संध्या का समय आत्मचिंतन , নাস-মুসিতো  अमृतवाणी , प्रेरणादायक दोहे, भजन और और परमात्मा को याद करने का सबसे आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी नईन्नई पोस्ट सुंदर समय है। नियमित रूप से देखने को मिलेंगी | दिनभर की भागदौड़ के बाद कुछ पल प्रभु यदि आप कबीर साहेब जी की शिक्षाओं से जुड़ना के नाम में बिताइए, क्यौंकि यही सच्ची चाहते हैं, तो हमारे Page को Follow करना शांति का मार्ग है। न भूलें | Comment # यदि यह संदेश आपके अपने परिवार व मित्रों Like কং सत साहेब ৪নয কী যেং কং, के साथ Share करें अवश्य लिखें सत साहेब संत कबीर साहेब जी का संदेश 66 ಹಾಗ, संध्या समय सुमिरन  दिन सब कर्म मिटाय। कहे कबीर जो नाम जपे, কাল নিকম ন 3াম Il 99 भावार्थ जो व्यक्ति सच्चे मन से संध्या समय परमात्मा का नाम स्मरण करता है, उसका मन शांत होता है, बुरे विचार दूर होते हैं और जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश बढ़ता है। नाम-सुमिरण ही मनुष्य का सबसे बड़ा सहारा है। कबीर af संध्या समय करें ये पाँच कार्य ईश्वर से दिनभर सबके भले की शांत बैठकर दीप जलाएं सत्संग चाचन যা বোংযায কং कामना करें ಹ अंधकार मिटाएं की क्षमा माँगें বুসিনে' Kabir Bhajan Gyan संध्या का महत्व पर आपको संत कबीर साहेब जी की संध्या का समय आत्मचिंतन , নাস-মুসিতো  अमृतवाणी , प्रेरणादायक दोहे, भजन और और परमात्मा को याद करने का सबसे आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी नईन्नई पोस्ट सुंदर समय है। नियमित रूप से देखने को मिलेंगी | दिनभर की भागदौड़ के बाद कुछ पल प्रभु यदि आप कबीर साहेब जी की शिक्षाओं से जुड़ना के नाम में बिताइए, क्यौंकि यही सच्ची चाहते हैं, तो हमारे Page को Follow करना शांति का मार्ग है। न भूलें | Comment # यदि यह संदेश आपके अपने परिवार व मित्रों Like কং सत साहेब ৪নয কী যেং কং, के साथ Share करें अवश्य लिखें सत साहेब
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    दोहा 66 जो जागे सो पाय है, जो सोवे सो खोय। रात गयी फिर हाथ से, कहै कबीर न रोय।। 99 भावार्थ जो व्यक्ति जागरूक होकर अपने जीवन को भक्ति, साधना और सत्कर्म में लगाता है वही सच्चा लाभ पाता है। जो आलस्य और माया की नींद में सोया रहता है, वह अपना कीमती समय खो देता है। समय एक बार निकल जाए, तो लौटकर नहीं आता। सस्ी . इस गहन रात में, उठो और परमात्मा का स्मरण करो। नाम ही सच्चा साथी है, यही जीवन का सार है। कबार भजन ज्ञान ా   न   सत्संग , भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम दोहा 66 जो जागे सो पाय है, जो सोवे सो खोय। रात गयी फिर हाथ से, कहै कबीर न रोय।। 99 भावार्थ जो व्यक्ति जागरूक होकर अपने जीवन को भक्ति, साधना और सत्कर्म में लगाता है वही सच्चा लाभ पाता है। जो आलस्य और माया की नींद में सोया रहता है, वह अपना कीमती समय खो देता है। समय एक बार निकल जाए, तो लौटकर नहीं आता। सस्ी . इस गहन रात में, उठो और परमात्मा का स्मरण करो। नाम ही सच्चा साथी है, यही जीवन का सार है। कबार भजन ज्ञान ా   न   सत्संग , भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम
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