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शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के सवाल पर छात्र-युवाओं ने बुलंद की आवाज
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में छात्र-युवा संसद का आयोजन, बिहार के सभी विश्वविद्यालयों तक आंदोलन पहुंचाने का संकल्प
दरभंगा, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 20 अगस्त, 2026)। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय चौक पर आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छात्र-युवा संसद में बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भाग लिया। संसद में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और रोजगार के सवालों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इन मुद्दों को लेकर संघर्ष तेज करने तथा आंदोलन को बिहार के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों तक ले जाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश के छात्र-युवा पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, एनटीए की कार्यप्रणाली, बढ़ती फीस और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकारी विद्यालयों के विलय और निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे आम विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
NTA और नई शिक्षा नीति के खिलाफ उठी आवाज
छात्र-युवा संसद में “NTA भंग करो, NEP 2020 वापस लो, FYUP वापस लो, 7.5 CGPA की बाध्यता वापस लो और सबको समान डिग्री दो” जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गईं। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों को बंद अथवा मर्ज करने की नीति पर रोक लगाने और उन्हें केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर विकसित करने की मांग की गई।
वक्ताओं ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता पर कथित हमले रोकने, शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करने तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
फीस वृद्धि और विश्वविद्यालयों की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा
छात्र-युवा संसद में UG, PG और PhD की फीस में वृद्धि पर रोक लगाने की मांग की गई। महाविद्यालयों में परीक्षा भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने अतिथि एवं संविदा शिक्षकों की वेतन विसंगतियां दूर करने और उनकी सेवा को स्थायी करने की मांग उठाई। साथ ही विश्वविद्यालयों में आउटसोर्सिंग की नीति समाप्त कर कार्यरत कर्मियों को स्थायी करने की मांग भी सामने रखी गई।
रोजगार के सवाल पर सरकार से जवाब मांगने की मांग
रोजगार के मुद्दे पर छात्र-युवा संसद में ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर सम्मानजनक और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई। सभी रिक्त पदों पर स्थायी बहाली, बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलने तक 10 हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने तथा सरकार द्वारा किए गए रोजगार संबंधी वादों का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई।
इसके अलावा ठेका-पट्टा पर बहाली बंद करने, पीएचडी की नई नियमावली वापस लेने तथा TRE-4 का नोटिफिकेशन अविलंब जारी करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
हर विश्वविद्यालय और कॉलेज तक आंदोलन पहुंचाने का संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के निजीकरण, सरकारी शिक्षण संस्थानों की बदहाली, परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और बेरोजगारी के खिलाफ छात्र-युवा चुप नहीं बैठेंगे। इन मुद्दों को लेकर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा बिहार के हर विश्वविद्यालय और कॉलेज तक छात्र-युवा संघर्ष को पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम को जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव दानिस अली, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड अजीत कुशवाहा, आइसा के महासचिव प्रसेनजीत तथा आइसा के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय ने संबोधित किया।
छात्र-युवा संसद के अंत में शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के सवालों पर संघर्ष को तेज करने तथा आने वाले दिनों में व्यापक छात्र-युवा आंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया गया। उपरोक्त जानकारी वाट्सप्प माध्यम से आइसा (AISA) | आरवाईए (RYA) द्वारा दी गई।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #samastipur #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##Samastipur news #🆕 ताजा अपडेट