sn vyas
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शिव परिवार की संपूर्ण ब्रह्मांडीय परिक्रमा की पौराणिक कथा और उसका दार्शनिक संदेश #🔱शिवपुराण कथा📖 #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 शिव पुराण में वर्णित गणेश और कार्तिकेय (स्कंद) द्वारा पृथ्वी की परिक्रमा की कथा सनातन धर्म के सबसे गहरे जीवन मूल्यों और माता-पिता के प्रति सर्वोच्च आदर को उजागर करती है। ब्रह्मांड की परिक्रमा की प्रतियोगिता एक बार देवर्षि नारद एक दिव्य और अत्यंत दुर्लभ ज्ञान-फल लेकर कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुंचे। दोनों बालकों—भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश—ने उस दिव्य फल को पाने की इच्छा जताई। समस्या के समाधान हेतु भगवान शिव और माता पार्वती ने एक शर्त रखी: "तुम दोनों में से जो भी संपूर्ण पृथ्वी (ब्रह्मांड) का चक्कर सबसे पहले लगाकर वापस कैलाश पहुंचेगा, वही इस दिव्य फल का अधिकारी होगा।" कार्तिकेय का पुरुषार्थ और त्वरित प्रस्थान बड़े भाई कार्तिकेय अत्यंत फुर्तीले और शक्तिशाली थे। वे तुरंत अपने वाहन मयूर (मोर) पर सवार हुए और वायु वेग से उड़ते हुए संपूर्ण पृथ्वी और समस्त तीर्थों की परिक्रमा करने निकल पड़े। श्री गणेश की दिव्य बुद्धि और माता-पिता की परिक्रमा भगवान गणेश का शरीर भारी था और उनका वाहन मूषक (चूहा) था, जिसकी गति अत्यंत धीमी थी। गणेश जी ने अपनी तीव्र बुद्धि और विवेक से विचार किया। शास्त्रों के अनुसार माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड, समस्त तीर्थ और सभी देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती को एक साथ आसन पर बैठाया, उनके चरण स्पर्श किए, पुष्प अर्पित कर विधिपूर्वक पूजन किया और श्रद्धापूर्वक उनकी सात बार परिक्रमा (प्रदक्षिणा) की। निर्णय और प्रथम पूज्य का अधिकार जब महादेव ने पूछा कि तुमने पृथ्वी की परिक्रमा क्यों नहीं की, तो गणेश जी ने हाथ जोड़कर कहा: "हे माता-पिता! शास्त्रों के अनुसार माता पृथ्वी स्वरूपा हैं और पिता आकाश स्वरूप। आप दोनों के चरणों में ही समस्त ब्रह्मांड समाया हुआ है। आपकी परिक्रमा करने से मेरी संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा स्वतः पूर्ण हो गई।" इस असीम ज्ञान, विवेक और भक्ति को देखकर शिव-पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुए और वह दिव्य ज्ञान-फल गणेश जी को प्रदान किया। साथ ही उन्हें समस्त ब्रह्मांड में 'प्रथम पूज्य' होने का वरदान प्राप्त हुआ। इस प्रसंग की मुख्य सीख बुद्धि और बल का संतुलन: शारीरिक बल और गति से कहीं अधिक श्रेष्ठ मनुष्य का विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता होती है। माता-पिता का स्थान: सांसारिक तीर्थों के भ्रमण से कहीं अधिक पुण्य और फल माता-पिता की सच्चे मन से सेवा और सम्मान करने में निहित है। #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏
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