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अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज लोगों की हड्डियााँ तोड़ डालने वाले , द्ूसरों का பc cHacl J, घोडा , सम्पत्ति आदि eFs का हरण करने चाले औट राष्ट्र में विप्लव मचाने चाले लोग भी मेल कर लेते हैं उनमें भी एका हो जाता है॰ तब (हे धर्म प्रेमियों ) तुम्हारा मेल क्यों नहीं होता? भगबान बुद्ध युग बदलेगा , हम बदलेंगे - युग सुधरेगा  हम सुधरेंगे  शता्दी Gu ಇ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी Boc 1926 2026 लव दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial VoU TUag Shantilunj Rishi Chintan 8439014110 wwwawgporg गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज लोगों की हड्डियााँ तोड़ डालने वाले , द्ूसरों का பc cHacl J, घोडा , सम्पत्ति आदि eFs का हरण करने चाले औट राष्ट्र में विप्लव मचाने चाले लोग भी मेल कर लेते हैं उनमें भी एका हो जाता है॰ तब (हे धर्म प्रेमियों ) तुम्हारा मेल क्यों नहीं होता? भगबान बुद्ध युग बदलेगा , हम बदलेंगे - युग सुधरेगा  हम सुधरेंगे  शता्दी Gu ಇ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी Boc 1926 2026 लव दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial VoU TUag Shantilunj Rishi Chintan 8439014110 wwwawgporg
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  • kirti Sahu - Author on ShareChat
    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं राम ब्रह्म परमारथ रूपा अबिगत अलख अनादि अनूपा सकल बिकार रहित गतभेदा कहि नित नेति निरूपहिं बेदा श्री रामजी परमार्थस्वरूप |परमवस्तु) परब्रह्म वे अविगत |जानने में न आने वाले। हैं, अलख दृष्टि से देखने में न आने वाले , अनादि (स्थूल (आदिरहित , अनुपम ।उपमारहित) सब विकारों से रहति और भेद शून्य हैं॰ वेद जिनका नित्य कहकर निरूपण करते हैं ননি-ননি' हरि शरणं राम ब्रह्म परमारथ रूपा अबिगत अलख अनादि अनूपा सकल बिकार रहित गतभेदा कहि नित नेति निरूपहिं बेदा श्री रामजी परमार्थस्वरूप |परमवस्तु) परब्रह्म वे अविगत |जानने में न आने वाले। हैं, अलख दृष्टि से देखने में न आने वाले , अनादि (स्थूल (आदिरहित , अनुपम ।उपमारहित) सब विकारों से रहति और भेद शून्य हैं॰ वेद जिनका नित्य कहकर निरूपण करते हैं ননি-ননি'
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    समाधि स्थलवकैा 1दिथ्य दर्शन युगतीर्थ गायत्री तीर्थ शांतिकुंज, हरिँद्वार से 25.07.2026 जीवन की प्रत्येक चुनौती हमें परखने नहीं बल्कि पहले से अधिक मजबूत , विवेकशील और आत्मनिर्भर বনান ক লিং आती है। बीते हुए कॅल से॰ेसीखना और आने वाले कल के लिए तैयार रहना अच्छी बात है.. लेकिन इनकी चिंता में अपने वर्तमान को व्यर्थ करना सही नहीं रूप से चित्त है..! इस क्षण का हुए सद्ुपयोग को आनंदित » రగా समाधि स्थलवकैा 1दिथ्य दर्शन युगतीर्थ गायत्री तीर्थ शांतिकुंज, हरिँद्वार से 25.07.2026 जीवन की प्रत्येक चुनौती हमें परखने नहीं बल्कि पहले से अधिक मजबूत , विवेकशील और आत्मनिर्भर বনান ক লিং आती है। बीते हुए कॅल से॰ेसीखना और आने वाले कल के लिए तैयार रहना अच्छी बात है.. लेकिन इनकी चिंता में अपने वर्तमान को व्यर्थ करना सही नहीं रूप से चित्त है..! इस क्षण का हुए सद्ुपयोग को आनंदित » రగా
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  • kirti Sahu - Author on ShareChat
    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    पाप नाशिनी गायत्री भगवती महाशक्ति गायत्री यह नहीं देखती कि साधक का पिछला जीवन कैसा रहा है | इस आधार किसी से घृणा भी नहीं करती | 4 दीपक प्रत्येक व्यक्ति को, चाहे वह भला हो या बुरा उसे प्रकाश देता है, उसका किसी व्यक्ति से बैर-विरोध नहीं माँ अपने बुरे से बुरे बेटे से भी सुधरने की आशा रखती है और उस पर अन्य पुत्रों की तरह स्नेह वर्षा करती है | गायत्री महाशक्ति की तुलना न तो दीपक से की जा सकती है और न ही शरीर को जन्म देने वाली माँ से। गायत्री महाशक्ति अपने शरण में आने वाले को दिव्य সক্াথা ঐলী ঔ, 3মী মন্সাযযািমী ননন কী ঈহতা प्रदान करती है और सच्ची सुख   शान्ति का अधिकारी बना देती है | पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य पुस्तकःगायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन पाप नाशिनी गायत्री भगवती महाशक्ति गायत्री यह नहीं देखती कि साधक का पिछला जीवन कैसा रहा है | इस आधार किसी से घृणा भी नहीं करती | 4 दीपक प्रत्येक व्यक्ति को, चाहे वह भला हो या बुरा उसे प्रकाश देता है, उसका किसी व्यक्ति से बैर-विरोध नहीं माँ अपने बुरे से बुरे बेटे से भी सुधरने की आशा रखती है और उस पर अन्य पुत्रों की तरह स्नेह वर्षा करती है | गायत्री महाशक्ति की तुलना न तो दीपक से की जा सकती है और न ही शरीर को जन्म देने वाली माँ से। गायत्री महाशक्ति अपने शरण में आने वाले को दिव्य সক্াথা ঐলী ঔ, 3মী মন্সাযযািমী ননন কী ঈহতা प्रदान करती है और सच्ची सुख   शान्ति का अधिकारी बना देती है | पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य पुस्तकःगायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन
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    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ जहॅँ न राम पद पंकज भाऊ जोगु कुजोगु ग्यानु अग्यानू जहँ नहिं राम प्रेम परधानू वह सुख, वह कर्म और वह धर्म जल जाए॰ जिसमें श्री राम जी के चरण कमलों के प्रति प्रेम या भाव न हो, वह योग भी कुयोग है और वह ज्ञान भी अज्ञान के समान है, जहाँ श्री राम जी के प्रति प्रेम सर्वोपरि न हो, अर्थात संसार का कोई भी सुख, कर्म, धर्म, योग या ज्ञान तब तक निरर्थक और जब तक कि मनुष्य के हृदय में भगवान श्री राम बेकार है के प्रति सच्ची भक्ति और प्रेम न हो, राम-प्रेम के बिना बड़ी से बड़ी उपलब्धि भी व्यर्थ मानी गई है हरि शरणं सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ जहॅँ न राम पद पंकज भाऊ जोगु कुजोगु ग्यानु अग्यानू जहँ नहिं राम प्रेम परधानू वह सुख, वह कर्म और वह धर्म जल जाए॰ जिसमें श्री राम जी के चरण कमलों के प्रति प्रेम या भाव न हो, वह योग भी कुयोग है और वह ज्ञान भी अज्ञान के समान है, जहाँ श्री राम जी के प्रति प्रेम सर्वोपरि न हो, अर्थात संसार का कोई भी सुख, कर्म, धर्म, योग या ज्ञान तब तक निरर्थक और जब तक कि मनुष्य के हृदय में भगवान श्री राम बेकार है के प्रति सच्ची भक्ति और प्रेम न हो, राम-प्रेम के बिना बड़ी से बड़ी उपलब्धि भी व्यर्थ मानी गई है
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं আনামি ত্রীরয অত্ নীত বুতা ೩iಚ नतोड़्हं सदा सर्वदा तुभ्यं दुःखोद्य तातप्यमानं जरा जन्म प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म | मृत्यु) के दुःख समूहों की दुःख से रक्षा कीजिए। हे से जलते हुए मुझ दुःखी ईश्वर! हे शम्भो! मैं आपको नमस्कार करता हूँ हरि शरणं আনামি ত্রীরয অত্ নীত বুতা ೩iಚ नतोड़्हं सदा सर्वदा तुभ्यं दुःखोद्य तातप्यमानं जरा जन्म प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म | मृत्यु) के दुःख समूहों की दुःख से रक्षा कीजिए। हे से जलते हुए मुझ दुःखी ईश्वर! हे शम्भो! मैं आपको नमस्कार करता हूँ
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४ हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४
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  • AshaKushwah - Author on ShareChat
    💥❤️‍🔥Asha🦋Kushwah❤️‍🔥💥
    जय माता गायत्री 🙏🌹🌅🇮🇳 #जय हो गायत्री माता की #🙏जय गायत्री माता🙏 #🙏जय गायत्री माता🌺 #जय गायत्री माता #जय गायत्री माता 🙏🙏
    शुभं कुरु त्वं कल्याणी , आरोग्यं धनसंपदाम्। माँ गायत्री का आशीर्वाद Sassy Ashu शुभं कुरु त्वं कल्याणी , आरोग्यं धनसंपदाम्। माँ गायत्री का आशीर्वाद Sassy Ashu
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  • kirti Sahu - Author on ShareChat
    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं ಡಡ তিমি থল जल रहि न सकाई कोटि भाँति कोउ करै उपाई तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई न सकइ हरि भगति बिहाई जिस प्रकार कोई चाहे करोड़ों उपाय ले, लेकिन पृथ्वी రగగా जल के बिना नहीं रह सकती अर्थात जल के बिना धरती H और जीवनहीन हो जाती है ठीक उसी प्रकार सूखी भगवान की भक्ति को छोड़कर (बिना भक्ति के) मोक्ष का सुख भी नहीं मिल सकता और न ही वह सुख ठहर काकभुशुंडि जी गरुड़ जी से कह रहे हैं सकता है यहाँ कि ज्ञान मार्ग कठिन हो सकता है॰ लेकिन भक्ति मार्ग सुलभ और सर्वोपरि है, क्योंकि मोक्ष जैसा परम सुख भी हरि-भक्ति के अधीन है हरि शरणं ಡಡ তিমি থল जल रहि न सकाई कोटि भाँति कोउ करै उपाई तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई न सकइ हरि भगति बिहाई जिस प्रकार कोई चाहे करोड़ों उपाय ले, लेकिन पृथ्वी రగగా जल के बिना नहीं रह सकती अर्थात जल के बिना धरती H और जीवनहीन हो जाती है ठीक उसी प्रकार सूखी भगवान की भक्ति को छोड़कर (बिना भक्ति के) मोक्ष का सुख भी नहीं मिल सकता और न ही वह सुख ठहर काकभुशुंडि जी गरुड़ जी से कह रहे हैं सकता है यहाँ कि ज्ञान मार्ग कठिन हो सकता है॰ लेकिन भक्ति मार्ग सुलभ और सर्वोपरि है, क्योंकि मोक्ष जैसा परम सुख भी हरि-भक्ति के अधीन है
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    सदूचिन्तन ^ द० ०८ १६ जिस पकार सुन्दर बीज बाने सउत्म फसल {Baxer वनत ह रसा प्रकार बलुवान  रे मनुष्य में पतिघात ओर पतिकृल्तस पुरूपार्थ पकट होगह ।ऋद्वि सिट्टविको पन ক करनेका शदि स्थत मनुष्य के मन में सस्थेत ( टदहींर उस पकट करने का प्रयल्न करन चहिर | पंःश्रीरमवीर्ग ठचर्य . (२खनज्यति - अगर्त -१९४४ ) Shantikunj WhatsApp . 8439014110  सुधरेंगे , युग हम बदलेंगे, युग बदलेगा सुधरेगा हम awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan WwW awgp.org Shantikunj Viden Youfubel Youlube  सदूचिन्तन ^ द० ०८ १६ जिस पकार सुन्दर बीज बाने सउत्म फसल {Baxer वनत ह रसा प्रकार बलुवान  रे मनुष्य में पतिघात ओर पतिकृल्तस पुरूपार्थ पकट होगह ।ऋद्वि सिट्टविको पन ক करनेका शदि स्थत मनुष्य के मन में सस्थेत ( टदहींर उस पकट करने का प्रयल्न करन चहिर | पंःश्रीरमवीर्ग ठचर्य . (२खनज्यति - अगर्त -१९४४ ) Shantikunj WhatsApp . 8439014110  सुधरेंगे , युग हम बदलेंगे, युग बदलेगा सुधरेगा हम awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan WwW awgp.org Shantikunj Viden Youfubel Youlube
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