Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
534 views • 7 days ago
#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
युगतीर्थ समाधि स्थल का दिव्य दर्शन शांतिकुंज, हरिँद्वार से যামন্সী নীথf 29.08.20261 66. को दूसरों बदलने की अपेक्षा छोड़िए। स्वयं बदलना ही सबसे बड़ा समाधान है। युग बदलेगा , हम सुधरेगा| युग सुयरेंगे acm मनःलोक का जैसा निर्माण किया जाता हैं बाहरी दुनिया वैसी ही बन जाती है.. जिसने मनःलोकॅ में स्वर्ग स्थापित कर लिया है॰ उसके लिए इस संसार में सर्वत्र स्वर्ग है..! जिसके मन में नरक है॰ उसे सब ओर नरक की ज्वाला जलती हुई दिखाई देती रहेगी.. !
9 shares

More like this

  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    মীতুন संसार में हैं ? क्या स्वर्ग और नरक इसी सबके मूल में स्वर्ग जितने भी सात्विक दैवी भाव हैं 37 की स्वर्णिम आभा है। उन्हें धारण करने में मनुष्य आंतरिक सुख का अनुभव करता है। क्षमा, दया, प्रेम॰ मृदुता, और संतोष सहानुभूति इन सभी दैवी  को अपने जीवन में गुणों सत्याचार उतारने से स्वर्ग जैसा सुख मिलता है। इन सबके मूल में भगवान भगवान की विशेष कृपा से मनुष्य इनके अनंत सुख का हैं उसका विवेक जाग्रत होता है । उसके हृदय में अनुभव करता है विराजित परम प्रभु उसे स्वर्ग का सुख प्रदान करते हैं | स्वर्ग आप की भी पहुँच के भीतर है, क्योंकि आप इन ईश्वरीय गुणों को धारण कर सकते हैं| चरित्र का पूर्ण विकास कर सकते हैं। रखिए मनुष्य शुभ कार्य करके देव बनते हैं। अतः याद शुभ कर्म कीजिए और इसी शरीर से भूसुर का पवित्र पद प्राप्त कीजिए। शुभ कार्य ही हैं | उन्हें करने में मनुष्य स्वर्ग का पुजते सुख और शांति प्राप्त करता है। आप शुद्ध, तेजस्वी, आनंदमय एवं प्रकाशवान् हैं | इसलिए आत्मबंधु दैवी को धारण करके स्वर्ग का सुख लूटिए। TUi नरक का प्रधान कारण तामसी भाव है। मनुष्य जब अज्ञान में होता है, तभी पाप करता है। मन में जमे हुए मनुष्य से दुर्भाव कराते हैं, अनेक नारकीय परेशानियों में धकेलते हैं दुष्कर्म अनीति और अधर्म के विचार सर्वथा त्यागने योग्य है।जो दैवी गुणों की उपेक्षा कर असत्य और पाशविक भावों को अपनाते हैं, उन्हें अपयश ही मिलता है ज्योति फरवरी १९६० पृष्ठ-१२ १४ २६८ अखण्ड মীতুন संसार में हैं ? क्या स्वर्ग और नरक इसी सबके मूल में स्वर्ग जितने भी सात्विक दैवी भाव हैं 37 की स्वर्णिम आभा है। उन्हें धारण करने में मनुष्य आंतरिक सुख का अनुभव करता है। क्षमा, दया, प्रेम॰ मृदुता, और संतोष सहानुभूति इन सभी दैवी  को अपने जीवन में गुणों सत्याचार उतारने से स्वर्ग जैसा सुख मिलता है। इन सबके मूल में भगवान भगवान की विशेष कृपा से मनुष्य इनके अनंत सुख का हैं उसका विवेक जाग्रत होता है । उसके हृदय में अनुभव करता है विराजित परम प्रभु उसे स्वर्ग का सुख प्रदान करते हैं | स्वर्ग आप की भी पहुँच के भीतर है, क्योंकि आप इन ईश्वरीय गुणों को धारण कर सकते हैं| चरित्र का पूर्ण विकास कर सकते हैं। रखिए मनुष्य शुभ कार्य करके देव बनते हैं। अतः याद शुभ कर्म कीजिए और इसी शरीर से भूसुर का पवित्र पद प्राप्त कीजिए। शुभ कार्य ही हैं | उन्हें करने में मनुष्य स्वर्ग का पुजते सुख और शांति प्राप्त करता है। आप शुद्ध, तेजस्वी, आनंदमय एवं प्रकाशवान् हैं | इसलिए आत्मबंधु दैवी को धारण करके स्वर्ग का सुख लूटिए। TUi नरक का प्रधान कारण तामसी भाव है। मनुष्य जब अज्ञान में होता है, तभी पाप करता है। मन में जमे हुए मनुष्य से दुर्भाव कराते हैं, अनेक नारकीय परेशानियों में धकेलते हैं दुष्कर्म अनीति और अधर्म के विचार सर्वथा त्यागने योग्य है।जो दैवी गुणों की उपेक्षा कर असत्य और पाशविक भावों को अपनाते हैं, उन्हें अपयश ही मिलता है ज्योति फरवरी १९६० पृष्ठ-१२ १४ २६८ अखण्ड
    11
    17
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    समाधि स्थल का दिव्य दर्शन युगतीर्थ शांतिकुंज, गायत्री तीर्थ F೫r # 05:092026 अहंकार और स्वार्थ को भस्म कर देना ही सच्ची गायत्री यज्ञ साधना है, और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। Iu Gnynyngy Wos ijie se 0 STrue Gayatri Yagya leads to Selfless Service; Grok के दुःख को महसूस करना , उनकी ट्रूसरों सहायता करना और उन्हें सहारा देना ही सच्ची मानवता है..! मानवता का यह सेँण व्यक्ति को न केवल सामाजिक रुप बल्कि आत्मिक मूल्यवान बनाता है.. संतोष भी देता है..!
    16
    11
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    Ming Tct ವu< 8uRoqluLL0,1dJM7 q೩5935೩೩೩  सदूचिन्तनः. मिंकर२६ . 08,0g.38 भगवान Oaarl कृष् जिनको हन परमला काा मानने ( , जिन्हने अपनेजीवन க3ன नें मह५ कार्यकिय हैं अनुकणण कखे हमशीक्ुदर गरणगकीओर কিল্ু? ध्र्ने उ॰कोे इतनी लेक॰ Sorr &rqaa& ! टॅप्रियग ह किलखं व्यक्त उनको अपना आर्ननकर पूजतेहं | ख्चे अर्थेनें उनको प्ूजायी ह किहमभी उबक रवहर् स्मनें बनय हुए नुर्ग पर्चलें | कष्णा <न्मष्ट ahonotnicial . Shantikun] RIshl Chintan  shantikunj Vided WWawgporg
    11
    7
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    भज का सदूचिन्तन छलिष ३१ Sg दर्श॰को उनके अवतरकी आला 37 _ कहना चहिए | वही सनातन उनके शरीर जन्न वाले जन्माष्ट्मी पर्व शश्वत ९ I!FC' रश्नी उसका गल्ल अधिक 6 | यं जिन्ें जन्माष्टमके नध्यम र कृष्ण द३नःका प्रकाश (भिलेन् ( ,उन्ें उनकोलीला - क्रीड़्ओं तक सीनित न रकर गैत पर Siled ' ٥١٢؟ मनन करना चहिए | अन्यथा चरित्रभरका प्रधानगद्ेरे एधारण व्यक्तिश्रन नें पड एकत त அா ೦೫೬ . Shantikunj WhatsApp 8439014110 हम सुधरेंगे , युग हम बदलेंगे, युग बदलेगा सुधरेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan WWW awgp.org Shantikunj video You@he V0ll I1g
    15
    11
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    समाधि स्थल का दिव्य दर्शन gfவf शांतिकुंज, हरिद्वार से गायत्री तीर्थ 03.09.2026 भगवान से केवल सुख मत माँगिए, ೧ सुख दुःख में सही राह पर चलने की बुद्धि भी माँगिए। हम बदलेंगे युग़ बदलेगा, हम सुर्थरेंगे युग सुधरेगा  गुरुवचन केवल शब्द नहीं होते , वे जीवन को प्रकाश देने चाले दीपक होते हैं..! जो गुरु के वचनों को अपने जीवन में उतार लेता है, उसकी हर राह सरल और सफल हाो जाती है./
    14
    12
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    समाधि स्थल का दिव्य दर्शन युगतीर्थ शांतिकुंज, हरिँद्वार से गायत्री तीर्थ 02.09.2026 ईश्वर की आराधना का श्रेष्ठ फल यही है कि मनुष्य का जीवन , के लिए आशा , शांति और বুমযী प्रेरणा का कारण बन जाए। वदलंगे यग तदलेगा हम শযা মুখযো பர मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण मॅन ही है.. मन के विषयासक्त होने बंधन एवं निर्विकार या निर्विषय से. होने से.. मोक्ष होता है..!
    9
    6
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गायत्रीतीर्थ शान्तिकञ्ज मानसिक पापों कीजिए का परित्याग अखण्ड ज्योति ्मई -१९५५ युग बदलेगा , हम बदलेंगे - युग सुधरेगा  हम सुधरेंगे  ೪irlr) ' Gu वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी जन्म शवा्ी 1926' 2026 दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YOU[UE}] Shantikunj Rishi Chintan 8439014110 wwwawgporg गायत्रीतीर्थ शान्तिकञ्ज मानसिक पापों कीजिए का परित्याग अखण्ड ज्योति ्मई -१९५५ युग बदलेगा , हम बदलेंगे - युग सुधरेगा  हम सुधरेंगे  ೪irlr) ' Gu वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी जन्म शवा्ी 1926' 2026 दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YOU[UE}] Shantikunj Rishi Chintan 8439014110 wwwawgporg
    12
    5
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    मनुष्य का वास्तविक 3@[எ &எ எ8l, எfcc श्रेष्ठ विचारों, पवित्र भावनाओं और सत्कर्मों से होता है । युगऋषि, वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ, पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
    10
    9
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    युगतीर्थ समाधि स्थल का दिव्य दर्शन থানিক্তিত; गायत्री तीर्थ हरिद्वार से 01.09.2026 सच्ची तपस्या परिस्थितियों से लडन नहीं, अपने भीतर की বুনলনাগী; को परिष्कृत निरंतर करना है। हम बदलंगे युग बदलेगा  सुधरया । हम सुधरेंगे युग सकारात्मक विचारों एवं भावनाओं आनंदपूर्ण जीवन को बढावा देना.. को व्यतीत करने का मूल मंत्र है..!
    18
    7
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर ' DSVV परिसर 2021  01 Sept - 2026 वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी कृष्ण पक्ष, 2083 चतुर्थी , एवं दिव्य अखण्ड दीप का महापर्व २०२६ awgpofficial wwwawgporg 8439014110 YOU TUBB Shantikunj Rishi Chintan
    14
    11
Home
Explore
Wallet
Video