sn vyas
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‼️ भगवतकृपा हि केवलम् ‼️
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🌸#वैराग्य_संदीपनी🌸
🐚 #विश्राम_भाग 🐚
गतांक से आगे --
राग द्वेष की अगिनि बुझानी।
काम क्रोध बासना नसानी॥
तुलसी जबहि सांति गृह आई।
तब उरहीं उर फिरी दोहाई॥
तुलसीदासजी कहते हैं कि जब राग-द्वेष की अग्नि बुझ गयी, काम, क्रोध और वासना का नाश हो गया और घर में अन्तःकरण में शान्ति आ गयी, तभी हृदय में भीतर-ही-भीतर तुरंत राम की दोहाई फिर गयी। फिर अन्तःकरण में अज्ञान तथा तज्जनित काम - क्रोधादि का साम्राज्य नहीं रहा, वहाँ रामराज्य हो गया, सर्वतोभाव से भगवान ही छा गये ॥६०॥
*फिरी दोहाई राम की, गे कामादिक भाजि।*
*तुलसी ज्यों रबि के उदय, तुरत जात तम लाजि॥६१॥*
तुलसीदासजी कहते हैं कि जब राम की दोहाई फिर गयी हृदय में भगवान का प्रकाश तथा विस्तार हो गया, तब कामादि दोष उसी क्षण वैसे ही भाग गये, जैसे सूर्य के उदय होते ही उसी क्षण अन्धकार लजा कर भाग जाता है ॥६१॥
*यह बिराग संदीपनी, सुजन सुचित सुनि लेहु।*
*अनुचित बचन बिचारि के, जस सुधारि तस देहु॥६२॥*
सज्जनो! इस वैराग्य-संदीपनी को सावधान एवं स्थिर चित्त से सुनो और विचारकर अनुचित वचनों को जहाँ जैसा उचित हो सुधार दो ॥६२॥
*॥ श्रीगोस्वामी तुलसीदासजीकृत "वैराग्य-संदीपनी" समाप्त ॥*
*🌺जय जय सियाराम🌺*
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