Newsgenix
783 views 1 days ago
#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बड़ा और दूरदर्शी बयान दिया है। अपनी नई पुस्तक के विमोचन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पाकिस्तान से मिलने वाली आतंकवाद की चुनौती के कारण भारत का ध्यान उस पर अधिक केंद्रित रहा है, लेकिन लंबी अवधि में चीन ही भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगा। जनरल नरवणे ने कूटनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए चीन के लिए दुश्मन शब्द का प्रयोग करने से परहेज किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को बातचीत का रास्ता खुला रखने के साथ-साथ अपनी सैन्य प्रतिरोध क्षमता को भी बेहद मजबूत बनाए रखना होगा। पाकिस्तान और चीन के बीच का अंतर सुरक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ भारत के अनसुलझे सीमा विवाद हैं और युद्ध का इतिहास रहा है, लेकिन दोनों देश पूरी तरह से अलग श्रेणी में आते हैं। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे निरंतर समर्थन के कारण भारत का तात्कालिक ध्यान अपनी पश्चिमी सीमा पर केंद्रित रहता है। हालांकि, लंबे समय में चीन राजनीति, अर्थशास्त्र, व्यापार और सैन्य मामलों सहित सभी क्षेत्रों में भारत का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जहां प्रतिस्पर्धा होती है, वहां संघर्ष की गुंजाइश भी बनी रहती है। वार्ता पहली प्राथमिकता, सैन्य तैयारी अनिवार्य नरवणे ने जोर देकर कहा कि भारत को बल प्रयोग के बजाय कूटनीतिक तंत्र और बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। शक्ति का उपयोग हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए। हालांकि, किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों का हर समय तैयार रहना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई देश शांति चाहता है, तो उसे युद्ध के लिए तैयार रहना होगा ताकि एक मजबूत सैन्य निरोध स्थापित किया जा सके। #Newsgenix #China
9 shares

More like this