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roshan baiplawat - Author on ShareChat
roshan baiplawat
1K views • 1 months ago
#gajal
याद रखना.. एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हें मेरी कमी महसूस होगी, मेरी खामोशी भी तुम्हें बहुत कुछ कहेगी। जिस इंसान ने तुम्हारी हर बात को अपनी खुशी समझा, वही एक दिन यादों में रह जाएगा | 5R तुम्हें याद आएगा वो जो तुम्हारी नाराज़गी भी हंसकर सह लेता था, जो खुद टूट जाता था लेकिन तुम्हें कभी उदास नहीं देख सकता था। तुम्हें समझ आएगा कि हर कोई दिल से फिर प्यार नहीं करता , कुछ लोग सिर्फ वक् के लिए साथ होते हैं। उस दिन तुम मुझे ढूंढोगे , मिलूंगा... पर मैं वहां नहीं क्योंकि जो इंसान दिल से प्यार करता है, Heq वो एक बार दूर चला जाए तो वापस नहीं आता। याद रखना.. एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हें मेरी कमी महसूस होगी, मेरी खामोशी भी तुम्हें बहुत कुछ कहेगी। जिस इंसान ने तुम्हारी हर बात को अपनी खुशी समझा, वही एक दिन यादों में रह जाएगा | 5R तुम्हें याद आएगा वो जो तुम्हारी नाराज़गी भी हंसकर सह लेता था, जो खुद टूट जाता था लेकिन तुम्हें कभी उदास नहीं देख सकता था। तुम्हें समझ आएगा कि हर कोई दिल से फिर प्यार नहीं करता , कुछ लोग सिर्फ वक् के लिए साथ होते हैं। उस दिन तुम मुझे ढूंढोगे , मिलूंगा... पर मैं वहां नहीं क्योंकि जो इंसान दिल से प्यार करता है, Heq वो एक बार दूर चला जाए तो वापस नहीं आता।
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  • Misthi - Author on ShareChat
    Misthi
    #gajal #gajal
    गजल अब्र बनकर बसर अश्क बरसा रहा है। मुहाफिज ही आज दिल तोड़के जा रहा है। दिल का है लहू मेरे अरमानों का, बह रहा हर ख़्वाब अब्सार का टूटकर बिखरता जा रहा है। आशुफ्ता हैं दिल की सारी ख्वाहिशें , वो मेरी हर ख्वाहिश को मिटाके जा रहा है। गम अंदोज हैं दिल से लेके रूह तक, वो मेरी मोहब्बत की बस्ती को कुछ यूं जलाके जा रहा है। ने मुझसे, रुख मोड लिया है सब खुशियों वो सारे गमों से मेरा ताल्लुक जोड़के जा रहा है। कभी कसमें खाता था वो सदा साथ निभाने की आज वो मेरी हयात की नाउ को मझधार में जा रहा है। डुबोके न जाने कब से था उसके दिल में कोई मस्तूर, आज वो उसी की बांहों में सिमटने जा रहा है। मुझे करके बदनाम करके खुद तमाम अस्काम वो बे वज़ह मुझे मौत की सजा देके जा रहा है। Ris विजेन्द्र गजल अब्र बनकर बसर अश्क बरसा रहा है। मुहाफिज ही आज दिल तोड़के जा रहा है। दिल का है लहू मेरे अरमानों का, बह रहा हर ख़्वाब अब्सार का टूटकर बिखरता जा रहा है। आशुफ्ता हैं दिल की सारी ख्वाहिशें , वो मेरी हर ख्वाहिश को मिटाके जा रहा है। गम अंदोज हैं दिल से लेके रूह तक, वो मेरी मोहब्बत की बस्ती को कुछ यूं जलाके जा रहा है। ने मुझसे, रुख मोड लिया है सब खुशियों वो सारे गमों से मेरा ताल्लुक जोड़के जा रहा है। कभी कसमें खाता था वो सदा साथ निभाने की आज वो मेरी हयात की नाउ को मझधार में जा रहा है। डुबोके न जाने कब से था उसके दिल में कोई मस्तूर, आज वो उसी की बांहों में सिमटने जा रहा है। मुझे करके बदनाम करके खुद तमाम अस्काम वो बे वज़ह मुझे मौत की सजा देके जा रहा है। Ris विजेन्द्र
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal #💓 मोहब्बत दिल से
    मैं नहीं जानता की प्रेम क्या होता है, क्यों होता है, क्यों लिखा जाता है। मैं बस इतना जानता हूं अब प्रेमिक तरह की बीमारी होती है मानसिक बीमारी जो मौसम की तरह बदल दे जाती है इंसान को अंदर तक तोड़ देती है मैं नहीं जानता की प्रेम क्या होता है, क्यों होता है, क्यों लिखा जाता है। मैं बस इतना जानता हूं अब प्रेमिक तरह की बीमारी होती है मानसिक बीमारी जो मौसम की तरह बदल दे जाती है इंसान को अंदर तक तोड़ देती है
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal
    कभी-कभी इंसान इसलिए भी चुप हो जाता है, क्योंकि जिसे अपनी दुनिया समझा था, उसे उसकी खामोशी में भी अपनी जगह नहीं मिलती। फिर वह मुस्कुराना तो सीख जाता है, लेकिन दिल से खुश होना जाता है. कभी-कभी इंसान इसलिए भी चुप हो जाता है, क्योंकि जिसे अपनी दुनिया समझा था, उसे उसकी खामोशी में भी अपनी जगह नहीं मिलती। फिर वह मुस्कुराना तो सीख जाता है, लेकिन दिल से खुश होना जाता है.
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal #Shayari
    क्यों हमेशा पुरुष अपनों से पीछे रह जाता है. अपने पापा से गले लगाने में, अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सोने में, और अपनी मनपसंद स्त्री को पाने में। क्योंकि उसे बचपन से ही मज़बूत बनना सिखाया जाता है, अपनी भावनाओं को छुपाना सिखाया जाता है লিব ' वह सबके जीता है, लेकिन अपने हिस्से की मोहब्बत अक्सर अधूरी रह जाती है। उसके आँसू उसकी आँखों तक आकर भी लौट जाते हैं, और उसकी ख़ामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ग़ज़ल बन जाती है। क्यों हमेशा पुरुष अपनों से पीछे रह जाता है. अपने पापा से गले लगाने में, अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सोने में, और अपनी मनपसंद स्त्री को पाने में। क्योंकि उसे बचपन से ही मज़बूत बनना सिखाया जाता है, अपनी भावनाओं को छुपाना सिखाया जाता है লিব ' वह सबके जीता है, लेकिन अपने हिस्से की मोहब्बत अक्सर अधूरी रह जाती है। उसके आँसू उसकी आँखों तक आकर भी लौट जाते हैं, और उसकी ख़ामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ग़ज़ल बन जाती है।
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    हर किसी के दर्द को अपना समझ बैठा था मैं, इसलिए हर मोड़ पर तन्हा ही रह गया मैं। जिनके आँसू पोंछता था रात भर चुपचाप मैं, आज अपने ज़ख्म लेकर किसके घर जाता मैं। মনলনী কী নীs ম रिश्ते सभी खो से गए, ढूँढता फिरता रहा, अपना कहाँ पाता मैं। वक्त ने इतना बदल डाला मेरे हालात को, ৪ুঁস ২৪্া ৪ুঁ মামন, अंदर से मर जाता मैं। हर किसी के दर्द को अपना समझ बैठा था मैं, इसलिए हर मोड़ पर तन्हा ही रह गया मैं। जिनके आँसू पोंछता था रात भर चुपचाप मैं, आज अपने ज़ख्म लेकर किसके घर जाता मैं। মনলনী কী নীs ম रिश्ते सभी खो से गए, ढूँढता फिरता रहा, अपना कहाँ पाता मैं। वक्त ने इतना बदल डाला मेरे हालात को, ৪ুঁস ২৪্া ৪ুঁ মামন, अंदर से मर जाता मैं।
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    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    लड़के किसी के सामने रोते नहीं हैं.. रोते उसी के सामने हैं, जिन्हें वो जान से भी बढ़कर चाहते हैं। उन्हें रोता हुआ देखना हर किसी के नसीब में नहीं होता. या तो उनकी माँ ने देखा होता है, या फिर उनकी मनपसंद स्त्री ने। क्योंकि लड़के अपने आँसू हर किसी के सामने नहीं बहाते , वो अपने सारे दर्द को ख़ामोशी में छुपा लेते हैं। लेकिन जब किसी के सामने उनकी आँखें भर आएँ, तो समझ लेना कि उस इंसान पर उन्हें खुद से भी ज़्यादा भरोसा है। लड़के किसी के सामने रोते नहीं हैं.. रोते उसी के सामने हैं, जिन्हें वो जान से भी बढ़कर चाहते हैं। उन्हें रोता हुआ देखना हर किसी के नसीब में नहीं होता. या तो उनकी माँ ने देखा होता है, या फिर उनकी मनपसंद स्त्री ने। क्योंकि लड़के अपने आँसू हर किसी के सामने नहीं बहाते , वो अपने सारे दर्द को ख़ामोशी में छुपा लेते हैं। लेकिन जब किसी के सामने उनकी आँखें भर आएँ, तो समझ लेना कि उस इंसान पर उन्हें खुद से भी ज़्यादा भरोसा है।
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    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    मैं कहीं भी जाता था ঘুমন, মনব্ধা মাথ ত্ীভব্য বম ৯ং মাথ ফ্ষনা থাI तू बोलती थी, "वो लोग उतर गए हैं", मुझे उनकी नहीं, बस तेरी चिंता थी। रहती कहा भी था, মন gs/ "मुझे उनका नहीं, तुम्हारा डर लगता है, इसलिए मैं हमेशा हूँ 5R साथ रहता तूने हँसकर पूछा था, "मेरा क्यों डर लगता है?" काश... उस दिन मेरे पास कोई जवाब होता। शायद इसलिए नहीं बता पाया, क्योंकि वो डर, डर नहीं.. तुझे खो देने का एहसास था। मैं तो हमेशा बस तेरे साथ रहना चाहता था, पर तू कभी मेरे साथ रहना ही नहीं चाहती थी। शायद... तेरी पसंद कोई और था, और मैं बस तेरी फिक्र करने वाला एक इंसान। आज भी याद आता है कि मैं सबको छोड़ सकता था. तुझे अकेला छोड़ने की हिम्मत कभी नहीं हुई। पर मैं कहीं भी जाता था ঘুমন, মনব্ধা মাথ ত্ীভব্য বম ৯ং মাথ ফ্ষনা থাI तू बोलती थी, "वो लोग उतर गए हैं", मुझे उनकी नहीं, बस तेरी चिंता थी। रहती कहा भी था, মন gs/ "मुझे उनका नहीं, तुम्हारा डर लगता है, इसलिए मैं हमेशा हूँ 5R साथ रहता तूने हँसकर पूछा था, "मेरा क्यों डर लगता है?" काश... उस दिन मेरे पास कोई जवाब होता। शायद इसलिए नहीं बता पाया, क्योंकि वो डर, डर नहीं.. तुझे खो देने का एहसास था। मैं तो हमेशा बस तेरे साथ रहना चाहता था, पर तू कभी मेरे साथ रहना ही नहीं चाहती थी। शायद... तेरी पसंद कोई और था, और मैं बस तेरी फिक्र करने वाला एक इंसान। आज भी याद आता है कि मैं सबको छोड़ सकता था. तुझे अकेला छोड़ने की हिम्मत कभी नहीं हुई। पर
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    तुम्हारे बाद समझ आया।कि कुछ लाग जिंदगी से चले तो जाते हैं, मगर दिल से कभी नहीं जाते। वक़्त बीत जाता है, मौसम बदल जाते है लोग भी बदल जाते हैं ৭ং ক্তৃত্ত যান हर रोज़ नई होकर लौट आती हैं। अब न कोई शिकायत है न किसी से गिला है, बस एक ख़ामोश दर्द है जो हर ` मुस्कुराहट के पीछे छिपा हुआ है। क्योंकि सबसे मुश्किल बात किसी को भूलना नहीं, बल्कि उसके बिना जीना सीखना होता है। और सच यही है - कुछ मोहब्बतें नहीं होतीं,  # उम्र भर साथ चलती हैं। तुम्हारे बाद समझ आया।कि कुछ लाग जिंदगी से चले तो जाते हैं, मगर दिल से कभी नहीं जाते। वक़्त बीत जाता है, मौसम बदल जाते है लोग भी बदल जाते हैं ৭ং ক্তৃত্ত যান हर रोज़ नई होकर लौट आती हैं। अब न कोई शिकायत है न किसी से गिला है, बस एक ख़ामोश दर्द है जो हर ` मुस्कुराहट के पीछे छिपा हुआ है। क्योंकि सबसे मुश्किल बात किसी को भूलना नहीं, बल्कि उसके बिना जीना सीखना होता है। और सच यही है - कुछ मोहब्बतें नहीं होतीं,  # उम्र भर साथ चलती हैं।
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal #💓 मोहब्बत दिल से #Shayari
    दिल की वीरानियों में तेरी याद उतर आई, शाखों पे जैसे कोई बरसात उतर आई। सूखी चाहा था जिसे अपनी की हमने तरह, दुआओं उसकी आँखों में मगर कोई और बात उतर आई। रात भर चाँद से करते रहे तेरी चर्चा, सुबह होते ही निगाहों में तेरी ज़ात उतर आई। मोहब्बत ख़ामोशियों को भी हमने समझा, लब खुले तो फ़क़त रिश्तों की सौगात उतर आई। अब तो तन्हाई भी हमसे गले मिलती है, जब से इस दिल में तेरी पहली मुलाक़ात उतर आई। दिल की वीरानियों में तेरी याद उतर आई, शाखों पे जैसे कोई बरसात उतर आई। सूखी चाहा था जिसे अपनी की हमने तरह, दुआओं उसकी आँखों में मगर कोई और बात उतर आई। रात भर चाँद से करते रहे तेरी चर्चा, सुबह होते ही निगाहों में तेरी ज़ात उतर आई। मोहब्बत ख़ामोशियों को भी हमने समझा, लब खुले तो फ़क़त रिश्तों की सौगात उतर आई। अब तो तन्हाई भी हमसे गले मिलती है, जब से इस दिल में तेरी पहली मुलाक़ात उतर आई।
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