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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
मनुष्य संसार को देखने में पूरा जीवन लगा देता है॰ भीतर पर स्वर्य के बहुत कम उतर पाता है। क्रोध, के दूसरों  छल और अहकार पर निर्णय देना आसान है, पर जब वही बातें अपने भीतर दिखाई देने लगें , तभी वास्तविक जागरूकता शुरू होती है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब मनुष्य संसार को देखने में पूरा जीवन लगा देता है॰ भीतर पर स्वर्य के बहुत कम उतर पाता है। क्रोध, के दूसरों  छल और अहकार पर निर्णय देना आसान है, पर जब वही बातें अपने भीतर दिखाई देने लगें , तभी वास्तविक जागरूकता शुरू होती है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    सत््गुरू कबीर साहेब वाणी चंचल मन की दौड़ को , गुरु ही पावे पार। अंतिम क्षण की चूक भी, भटकावे संसार Il भावार्थ सतगुरु कबीर साहेब कहते हैं कि चंचल और अशांत मन अनेक विचारों और इच्छाओं के इस वाणी से सीख पीछे भागता रहता है। इस मन की दौड़ से जीव थक जाता है, भटक जाता है। ऐसे मन को केवल सटगुरु की शरण, उनकी भक्ति और उनके बताए मार्ग से ही पार पाया 81 जा सकता गुरू भक्ति और गुरु का मार्ग ही ஈ समय रहते और यदि अंतिम समय में भी साधना, स्मरण सतगुरु के चरणों सुमिरन से ही सही दिशा और साधना करो, और गुरू-भक्ति में चूक हो जाए, तो जीव में लगाओ| मन को शांति मिलती है। जीवन अनमोल है। পাং ওনানে নালা ট1 संसार के बंधनों में भटकता ही रहता है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब Y7n ' सत््गुरू कबीर साहेब वाणी चंचल मन की दौड़ को , गुरु ही पावे पार। अंतिम क्षण की चूक भी, भटकावे संसार Il भावार्थ सतगुरु कबीर साहेब कहते हैं कि चंचल और अशांत मन अनेक विचारों और इच्छाओं के इस वाणी से सीख पीछे भागता रहता है। इस मन की दौड़ से जीव थक जाता है, भटक जाता है। ऐसे मन को केवल सटगुरु की शरण, उनकी भक्ति और उनके बताए मार्ग से ही पार पाया 81 जा सकता गुरू भक्ति और गुरु का मार्ग ही ஈ समय रहते और यदि अंतिम समय में भी साधना, स्मरण सतगुरु के चरणों सुमिरन से ही सही दिशा और साधना करो, और गुरू-भक्ति में चूक हो जाए, तो जीव में लगाओ| मन को शांति मिलती है। जीवन अनमोल है। পাং ওনানে নালা ট1 संसार के बंधनों में भटकता ही रहता है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब Y7n '
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    66 सकल कबीर साहेब का उददेश्य सृष्टि संपूर्ण सृष्टि का को कल्याण करना है, यही सच्चे संत की पहचान है। तारों भाई। तब तो नाम कबीर ಹಣತ || श्री सदगुरू कबीर साहेब कबीर साहेब की वाणी और नाम का स्मरण करने से जीव का उद्धार होता है और वह भवसागर से पार हो जाता है | सप्रेम साहेब बंदगी साहेब 66 सकल कबीर साहेब का उददेश्य सृष्टि संपूर्ण सृष्टि का को कल्याण करना है, यही सच्चे संत की पहचान है। तारों भाई। तब तो नाम कबीर ಹಣತ || श्री सदगुरू कबीर साहेब कबीर साहेब की वाणी और नाम का स्मरण करने से जीव का उद्धार होता है और वह भवसागर से पार हो जाता है | सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    कबीर वाणी 66 कबीर मन पंछी भया, 3f3 3f3 45f73I II जो जैसी संगति मिले, सो तैसो फल आस Il 3থ: कबीर साहेब कहते हैं कि यह मन एक पक्षी के समान है जो यहाँ-वहाँ उड़ता रहता है। इसे जैसी संगति मिलती है, यह वैसे ही विचार और फल ग्रहण कर लेता है। कबीर वाणी 4 - कबीर वाणी 66 कबीर मन पंछी भया, 3f3 3f3 45f73I II जो जैसी संगति मिले, सो तैसो फल आस Il 3থ: कबीर साहेब कहते हैं कि यह मन एक पक्षी के समान है जो यहाँ-वहाँ उड़ता रहता है। इसे जैसी संगति मिलती है, यह वैसे ही विचार और फल ग्रहण कर लेता है। कबीर वाणी 4 -
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    सत्यनाम ४कोटि करम लागे रहै, एक क्रोध की लार। किया कराया सब गया, जब आया अहंकार । इसका अर्थ यह है किः भले ही इंसान ने करोड़ों अच्छे काम क्यों न किए हों, लेकिन जैसे किए ही उसके मन में अहंकार (घमंड) आता है, उसके द्वारा गए सभी अच्छे कर्मों का फल नष्ट हो जाता है। अहंकार इंसान की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जिससे उसके अच्छे कर्म भी व्यर्थ हो जाते हैं। इसलिए हमेशा अपने कार्यों में नम्रता और सरलता बनाए रखनी चाहिए। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब सत्यनाम ४कोटि करम लागे रहै, एक क्रोध की लार। किया कराया सब गया, जब आया अहंकार । इसका अर्थ यह है किः भले ही इंसान ने करोड़ों अच्छे काम क्यों न किए हों, लेकिन जैसे किए ही उसके मन में अहंकार (घमंड) आता है, उसके द्वारा गए सभी अच्छे कर्मों का फल नष्ट हो जाता है। अहंकार इंसान की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जिससे उसके अच्छे कर्म भी व्यर्थ हो जाते हैं। इसलिए हमेशा अपने कार्यों में नम्रता और सरलता बनाए रखनी चाहिए। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    जाति पॉति का जाल है, मन का रचा विधान। एक रक्त और एक श्वास हे एक हो सबकी जान।। " मानवता सबसे बड़ा धर्म है। ' कबीर साहिब अमृतवाणी प्रेम ही परमात्मा है | सत साहिब | जाति पॉति का जाल है, मन का रचा विधान। एक रक्त और एक श्वास हे एक हो सबकी जान।। " मानवता सबसे बड़ा धर्म है। ' कबीर साहिब अमृतवाणी प्रेम ही परमात्मा है | सत साहिब |
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    काबा काशी दूर हैं मत भटको संसार | प्रेम भरा जिस हृदय में م प्रभु वहीं साकार।| प्रेम ही प्रभु तक पहुँचने का मार्ग है। कबीर साहिब अमृतवाणी प्रेम ही परमात्मा है सत साहिब | काबा काशी दूर हैं मत भटको संसार | प्रेम भरा जिस हृदय में م प्रभु वहीं साकार।| प्रेम ही प्रभु तक पहुँचने का मार्ग है। कबीर साहिब अमृतवाणी प्रेम ही परमात्मा है सत साहिब |
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    कबीर साहिब जी कहते हैं - बदलने से कुछ नहीं होगा, दुनिया अगर खुद को नहीं बदला | मन शांत होगा तो जीवन में प्रभु का प्रकाश होगा। से वो नहीं मिलेगा, ढूंढने बाहर जो तेरे भीतर ही बैठा है। सतगुरू साहिब की कृपा बनी रहे |l ७७ ccirept ஏ कबीर साहिब जी कहते हैं - बदलने से कुछ नहीं होगा, दुनिया अगर खुद को नहीं बदला | मन शांत होगा तो जीवन में प्रभु का प्रकाश होगा। से वो नहीं मिलेगा, ढूंढने बाहर जो तेरे भीतर ही बैठा है। सतगुरू साहिब की कृपा बनी रहे |l ७७ ccirept ஏ
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    सद्गुण कबीर साहेब जी 6 ব্রুবা তী ঠভসন স অলা, ব্রুহা ন মিলিয়া ক্রীয| जो दिल ख़ोजा आपना , बुरा न कोय।। मुझसे अर्थ कबीर साहेब जी कहते हैं कि  मैं दुनिया में बुराई देखने गया, जब तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला। जब मैंने अपने मन और दिल को टटोला, बडा बुरा कोई तो पाया कि मुझसे नहीं है। हमें किसी और की देखने से पहले अपनी बुराई कमियों को पहचानना चाहिए। ೨೧೦೦>
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    सतगुरू कबीर साहेब वाणी झूठ कहे, मदिरा पीवे ; खावे जीव का मांस ! कहे कबीर उस दुष्ट को; जीवित मुर्दा আন !! खावे जीव का मांस झूठ कहे मदिरा पीवे सत्य, दया, संयम और सदाचार ही मानव जीवन की सच्ची पहचान है ! ऐसे दुष्ट व्यक्ति का हह्दय क्रूर और विवेक नष्ट हो जाता हैं। और संयम से दुर होकर वह केवल शरीर से जीवित सत्य, दया से मूत ; सामान हो जाता है। रहता है, आत्मा सप्रेम साहेब बंदगी साहेबः
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    ज्ञान समागम प्रेम सुख , दया भक्ति विश्वास| गुरु सेवा ते पाईए, सद् गुरु चरण निवास II সনক্ সলি সম, 5எ, H সমাাম, निर्वासनिक सुख, दया, भक्ति सत्य स्वरूप और सदू गुरू की शरण में निवास ये सब गुरू की सेवा से निलते हैं
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