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#श्रीमद् भागवत गीता
श्रीमद् भागवत गीता - SharreGrate श्रोभद्धगवद्गीता के २५ महान उपदेश कर्म करो, फल की चिंता मत करो। मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। क्रोध से भ्रम पैदा होता है, और भ्रम से बुद्धि नष्ट होती है। आत्मा अजर-्अमर है, इसे कोई नष्ट नहीं कर सकता | सफलता और असफलता में समान रहना ही योग है। 537 अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है। मन ही मनुष्य का मित्र और शत्रु दोनों है। अहंकार विनाश का कारण बनता है धैर्य और संयम सफलता की कुजी हैं । सच्चा ज्ञान विनम्रता से आता है लोभ इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। जिसने इच्छाओं पर विजय पा ली, वही सुखी है।  हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना चाहिए। भक्ति से मन को शांति मिलती है। समय से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता | निस्वार्थ सेवा सबसे बड़ा धर्म है। अत्यधिक मोह दुख का कारण बनता है। सकारात्मक सोच जीवन बदल देती है। ज्ञान से बड़ा कोई धन नहीं है। सच्चा इंसान वही है जो दूसरों का सम्मान करे। मन को नियंत्रित करना सबसे कठिन लेकिन सबसे जरूरी कार्य है। ईश्वर हर जीव में विद्यमान हैं। शांति भीतर से आती है, बाहर से नहीं | जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है, वह कभी हारता नहीं | सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। कर्मण्येवाधिकारस्ते ஜ फलेषु कदाचन। औैँ॰ ٦ श्रीमद्धमगवदीता (२ ४७) गीता हमें जीवन को सही दिशा में जीना सिखाती है। SharreGrate श्रोभद्धगवद्गीता के २५ महान उपदेश कर्म करो, फल की चिंता मत करो। मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। क्रोध से भ्रम पैदा होता है, और भ्रम से बुद्धि नष्ट होती है। आत्मा अजर-्अमर है, इसे कोई नष्ट नहीं कर सकता | सफलता और असफलता में समान रहना ही योग है। 537 अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है। मन ही मनुष्य का मित्र और शत्रु दोनों है। अहंकार विनाश का कारण बनता है धैर्य और संयम सफलता की कुजी हैं । सच्चा ज्ञान विनम्रता से आता है लोभ इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। जिसने इच्छाओं पर विजय पा ली, वही सुखी है।  हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना चाहिए। भक्ति से मन को शांति मिलती है। समय से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता | निस्वार्थ सेवा सबसे बड़ा धर्म है। अत्यधिक मोह दुख का कारण बनता है। सकारात्मक सोच जीवन बदल देती है। ज्ञान से बड़ा कोई धन नहीं है। सच्चा इंसान वही है जो दूसरों का सम्मान करे। मन को नियंत्रित करना सबसे कठिन लेकिन सबसे जरूरी कार्य है। ईश्वर हर जीव में विद्यमान हैं। शांति भीतर से आती है, बाहर से नहीं | जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है, वह कभी हारता नहीं | सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। कर्मण्येवाधिकारस्ते ஜ फलेषु कदाचन। औैँ॰ ٦ श्रीमद्धमगवदीता (२ ४७) गीता हमें जीवन को सही दिशा में जीना सिखाती है। - ShareChat