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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
।l सत्यानाम || पंथ श्री हुजूर पंथ श्री हुजूर प्रकाशमुनिनाम साहेब उदितमुनिनाम साहेब सब धरती कागज़ करूॅ , लेखनी सब वनराय | सात समुद्र की मसि करूँ , गुरु गुण लिखा न जाए।। पहिले दाता शिष्य़ भये, जिन तनन्मन अर्पे शीश| दूजे दाता गुरु भये, जिन नाम दिया बख्शीश।। ग़ुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं साहेब बंदगी साहेब 0998 590- ।l सत्यानाम || पंथ श्री हुजूर पंथ श्री हुजूर प्रकाशमुनिनाम साहेब उदितमुनिनाम साहेब सब धरती कागज़ करूॅ , लेखनी सब वनराय | सात समुद्र की मसि करूँ , गुरु गुण लिखा न जाए।। पहिले दाता शिष्य़ भये, जिन तनन्मन अर्पे शीश| दूजे दाता गुरु भये, जिन नाम दिया बख्शीश।। ग़ुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं साहेब बंदगी साहेब 0998 590-
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    जिनके मन विश्वास है, सदा गुरू हैं संग | कोटि काल झकझोरिए, तऊ न हो चित भंग Il 3মল নিংনাম अट्रट शांति মাট্ন कबीर श्री सतगुरू गुरू कृपा जीवन में সকাথ भावार्थ जिस साधक का विश्वास अपने सतगुरू पर अटल होता है, उसे समय की लाखों परीक्षाएँ भी विचलित नहीं कर सकतीं | कठिन परिरिवितियॉॅ, दुःख, संकट और विपत्तियों चाहे कितनी भी क्यों न आएँ, उसका चित गुरू चरणों में स्थिर रहता है। ऐसा विश्वास ही उसे भवसागर से पार लगाता है। अटूट विश्वास ही साधना की सबसे बडी शक्ति है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब...  जिनके मन विश्वास है, सदा गुरू हैं संग | कोटि काल झकझोरिए, तऊ न हो चित भंग Il 3মল নিংনাম अट्रट शांति মাট্ন कबीर श्री सतगुरू गुरू कृपा जीवन में সকাথ भावार्थ जिस साधक का विश्वास अपने सतगुरू पर अटल होता है, उसे समय की लाखों परीक्षाएँ भी विचलित नहीं कर सकतीं | कठिन परिरिवितियॉॅ, दुःख, संकट और विपत्तियों चाहे कितनी भी क्यों न आएँ, उसका चित गुरू चरणों में स्थिर रहता है। ऐसा विश्वास ही उसे भवसागर से पार लगाता है। अटूट विश्वास ही साधना की सबसे बडी शक्ति है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब...
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     య o 66 साहेब कहते हैं , समय সী মী মন্কঠী होती हैं भावनाएँ, इसलिए जो समझ सके, उसी पर खर्च करो। 99 सत्यनाम ]|  య o 66 साहेब कहते हैं , समय সী মী মন্কঠী होती हैं भावनाएँ, इसलिए जो समझ सके, उसी पर खर्च करो। 99 सत्यनाम ]|
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    66 सकल कबीर साहेब का उददेश्य सृष्टि संपूर्ण सृष्टि का को कल्याण करना है, यही सच्चे संत की पहचान है। तारों भाई। तब तो नाम कबीर ಹಣತ || श्री सदगुरू कबीर साहेब कबीर साहेब की वाणी और नाम का स्मरण करने से जीव का उद्धार होता है और वह भवसागर से पार हो जाता है | सप्रेम साहेब बंदगी साहेब 66 सकल कबीर साहेब का उददेश्य सृष्टि संपूर्ण सृष्टि का को कल्याण करना है, यही सच्चे संत की पहचान है। तारों भाई। तब तो नाम कबीर ಹಣತ || श्री सदगुरू कबीर साहेब कबीर साहेब की वाणी और नाम का स्मरण करने से जीव का उद्धार होता है और वह भवसागर से पार हो जाता है | सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    दुर्बल को न सताइए, जाकि मोटी हाय | बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय ।I दुर्बल को न सताइए, जाकि मोटी हाय | बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय ।I
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    गुरू ना मांगे तेरी धन दौलत , गुरु ना पूछें নহী সান, गुरू को प्यारा वह शिष्य , 9 जो माने गुरु की बात। @kabirbhajan07 गुरू ना मांगे तेरी धन दौलत , गुरु ना पूछें নহী সান, गुरू को प्यारा वह शिष्य , 9 जो माने गुरु की बात। @kabirbhajan07
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    जाति पॉति का जाल है, मन का रचा विधान। एक रक्त और एक श्वास हे एक हो सबकी जान।। " मानवता सबसे बड़ा धर्म है। ' कबीर साहिब अमृतवाणी प्रेम ही परमात्मा है | सत साहिब | जाति पॉति का जाल है, मन का रचा विधान। एक रक्त और एक श्वास हे एक हो सबकी जान।। " मानवता सबसे बड़ा धर्म है। ' कबीर साहिब अमृतवाणी प्रेम ही परमात्मा है | सत साहिब |
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    तरूवर कहता पात से, सुनो पात एक बात Il (' Il इस घर की যম্ভী হীন ঔ, एक आवत एक जात ]l यह संसार एक सराय समान है, यहाँ कोई स्थायी नहीं है। जो आता है, उसे जाना ही है। सदगुरू कबीर साहेब इस सत्य को समझकर ही जीवन सार्थक बनता है। किसी का कुछ भी समय सबको सत्य को समझो, आना जाना नियम है आगे ले जाता है स्थायी नहीं है जीवन सफल बनाओ সকুনি কা सप्रेम साहेब बंदगी साहेब तरूवर कहता पात से, सुनो पात एक बात Il (' Il इस घर की যম্ভী হীন ঔ, एक आवत एक जात ]l यह संसार एक सराय समान है, यहाँ कोई स्थायी नहीं है। जो आता है, उसे जाना ही है। सदगुरू कबीर साहेब इस सत्य को समझकर ही जीवन सार्थक बनता है। किसी का कुछ भी समय सबको सत्य को समझो, आना जाना नियम है आगे ले जाता है स्थायी नहीं है जीवन सफल बनाओ সকুনি কা सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    दान सिर्फ पैसों का नहीं होता, रव्यनर =592~ दान केवल अमीर लोग ही नहीं कर सकते, बल्कि हर इंसान कर सकता है | कहीं छोटे जीवों के बीच एक मुट्ठी आटा डाल देना भी दान हैं किसी जानवर को कुछ खिला देना भी दान है। दान करने के लिए आर्थिक स्थिति जरूरी नहीं होती, दान करने के लिए नियत चाहिए होती है | श्री हुजूर उदितमुनि नाम साहब ~पंथ KABIR DHARMDAS VANSHAVALI Olkabirdharmdasvanshavaliorg दान सिर्फ पैसों का नहीं होता, रव्यनर =592~ दान केवल अमीर लोग ही नहीं कर सकते, बल्कि हर इंसान कर सकता है | कहीं छोटे जीवों के बीच एक मुट्ठी आटा डाल देना भी दान हैं किसी जानवर को कुछ खिला देना भी दान है। दान करने के लिए आर्थिक स्थिति जरूरी नहीं होती, दान करने के लिए नियत चाहिए होती है | श्री हुजूर उदितमुनि नाम साहब ~पंथ KABIR DHARMDAS VANSHAVALI Olkabirdharmdasvanshavaliorg
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    कबीर सुमिरन सों मन लाइए, जैसे पानी मीन। प्राण तजै पल बिछुड़ै , सार कबीर कहि दीन।। भावार्थः मन को परमात्मा के स्मरण ( सुमिरन) में उसी प्रकार लगाए रखना चाहिए, जैसे मछली पानी में रहती है। मछली यदि एक पल के लिए भी पानी से अलग हो जाए तो तड़पने लगती है और प्राण त्याग देती है। उसी प्रकार भी प्रभु-स्मरण से कभी अलग नहीं होना चाहिए। মাখক কা সন संत कबीर जी कहते हैं कि यही जीवन का सार है। यदि किसी कारणवश एक दिन या कुछ समय तक भी सुमिरन न हो पाए, तो साधक को ऐसा अनुभव होना चाहिए मानो उसने अपना सबसे अमूल्य धन खो दिया हो। उसे तुंरत फिर से नाम स्मरण में लगकर उस कमी की पूर्ति करनी चाहिए। कगीरभजल 1  कबीर सुमिरन सों मन लाइए, जैसे पानी मीन। प्राण तजै पल बिछुड़ै , सार कबीर कहि दीन।। भावार्थः मन को परमात्मा के स्मरण ( सुमिरन) में उसी प्रकार लगाए रखना चाहिए, जैसे मछली पानी में रहती है। मछली यदि एक पल के लिए भी पानी से अलग हो जाए तो तड़पने लगती है और प्राण त्याग देती है। उसी प्रकार भी प्रभु-स्मरण से कभी अलग नहीं होना चाहिए। মাখক কা সন संत कबीर जी कहते हैं कि यही जीवन का सार है। यदि किसी कारणवश एक दिन या कुछ समय तक भी सुमिरन न हो पाए, तो साधक को ऐसा अनुभव होना चाहिए मानो उसने अपना सबसे अमूल्य धन खो दिया हो। उसे तुंरत फिर से नाम स्मरण में लगकर उस कमी की पूर्ति करनी चाहिए। कगीरभजल 1
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    कलियुग कबीर, 315ಾ1, मुनिवर मिले न कोय। लोभी , लालची , मसकरा , तिनको आदर होय Il कवार [[ - कलियुग कबीर, 315ಾ1, मुनिवर मिले न कोय। लोभी , लालची , मसकरा , तिनको आदर होय Il कवार [[ -
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