sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२८/१ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 भगवान प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करते है ? 🦚 *ऊपर दिखाए गए ,,, इस तरह क्रियमाण कर्म को कंट्रोल करने में निष्काम कर्म योग मदद करता है ,, और प्रारब्ध कर्म को कंट्रोल करने में भक्ति योग मदद करता है ,,, भगवान की भक्ति करने से प्रारब्ध भोगने में अच्छी राहत रहती है,, यह हकीकत है । शास्त्र और संत उसकी साक्षी देते हैं। किंतु भगवान की भक्ति कैसे की जाए ? उसको स्पष्टता से समझ लेना चाहिए।* *हम भगवान की आज्ञा के अनुसार चले नहीं और भगवान की भक्ति यानी केवल उनका नाम स्मरण करना , गुनानुवाद करना , चंदन आदि लगाना, मंदिर में दर्शन करने जाना, आदि इतना ही समझ ले तो यह भक्ति है ही नहीं ,,,,केवल सारी रात मजीरा पीटते रहने से भगत नहीं हो सकते,,, भगवान ने भक्त के लक्षण भगवत गीता के बारहवे में अध्याय में अंतिम श्लोक में बताएं हैं।* *उसमें भगवान ने यह नहीं कहा कि जो चार फुट की चोटी रखेगा या तो डेढ फुट की दाढ़ी रखेगा ,,, लूंगी या यज्ञोपवीत पहनेगा,,, वही मेरा भक्त माना जाएगा ,,, भक्त के लक्षण भगवान ने स्वमुख से गीता में निम्नलिखित बताए हैं।* *अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्र: करुण एव च।* *निर्ममो निरहंकार: सम दुख:सुख: क्षमी ॥* *संतुष्ट सततं योगी यतात्मा दृढ निश्चय:।* *मयि अर्पित- मनो बुद्धिर्यो मद् भक्त स मे प्रिय ॥* *आदि ,,,भक्तों के लक्षण भगवान में बताएं हैं और ऐसे लक्षण वाला मनुष्य मेरा भक्त कहलायेगा ,,, और वह मुझे प्रिय होगा ।* *इसमें से एक भी लक्षण अपने में न हो तो ,,,, हम अपने स्वयं को भक्त की श्रेणी में दिखा सकते नहीं ,,, और भगवान को प्रिय हो ही नहीं सकते।* क्रमशः शेष भाग कल ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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