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#गीता #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार
गीता - राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य सम्वादमिममद्धुतम्। हृष्यामि च मुहुर्मुहुः ।। केशवार्जुनयोः గ్రారలా हे राजन् ! भगवान् श्रीकृण्ण और अर्जुनके इस रहस्ययुक्त, कल्याणकारक और अद्भुत संवादको पुनः- पुनः स्मरण करके मैँ बार-बार हर्पित हो रहा हूँ II७६  संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः| तच्च विस्मयो मे महान् राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः ।I  हे राजन्! श्रोहरिके * उस अत्यन्त विलक्षण रूपको भी पुनः - पुनः स्मरण करके मेरे चित्तमें महान् आश्चर्य होता है और मैं बार-बार हर्पित हो रहा हूँ II ७७ II यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थों धनुर्धरः | श्रीर्विजयो   भूतिर्ध्रुवा   नीतिर्मतिर्मम Il तत्र हे राजन्! जहाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैँ ஈ जहाँ गाण्डीव-धनुपधारी अर्जुन हेँ॰ वहींपर विजय, विभूति और अचल नीति है= ऐसा 7 ೯ Il (೭ Il श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिपत्सु ब्रह्मविद्यायां  34 নমেরিনি  योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे मोक्षसन्न्यासयोगो  নাসাহাহৎযায: Il ?৫ Il 0 जिसका स्मरण करनेसे पापौंका नाश होता है॰ उसका नाम ' हरि' है श्रीमढ्भगवढ्गीता अघ्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य सम्वादमिममद्धुतम्। हृष्यामि च मुहुर्मुहुः ।। केशवार्जुनयोः గ్రారలా हे राजन् ! भगवान् श्रीकृण्ण और अर्जुनके इस रहस्ययुक्त, कल्याणकारक और अद्भुत संवादको पुनः- पुनः स्मरण करके मैँ बार-बार हर्पित हो रहा हूँ II७६  संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः| तच्च विस्मयो मे महान् राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः ।I  हे राजन्! श्रोहरिके * उस अत्यन्त विलक्षण रूपको भी पुनः - पुनः स्मरण करके मेरे चित्तमें महान् आश्चर्य होता है और मैं बार-बार हर्पित हो रहा हूँ II ७७ II यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थों धनुर्धरः | श्रीर्विजयो   भूतिर्ध्रुवा   नीतिर्मतिर्मम Il तत्र हे राजन्! जहाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैँ ஈ जहाँ गाण्डीव-धनुपधारी अर्जुन हेँ॰ वहींपर विजय, विभूति और अचल नीति है= ऐसा 7 ೯ Il (೭ Il श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिपत्सु ब्रह्मविद्यायां  34 নমেরিনি  योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे मोक्षसन्न्यासयोगो  নাসাহাহৎযায: Il ?৫ Il 0 जिसका स्मरण करनेसे पापौंका नाश होता है॰ उसका नाम ' हरि' है श्रीमढ्भगवढ्गीता अघ्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat