Amit Sah
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पटना में कल हमने बिहार के ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल से मुलाकात कर अपने लोकसभा क्षेत्र में बिजली की समस्या और जरूरतों से अवगत कराया। इस दौरान हमने उनसे पूर्णिया जिले के डगरूआ प्रखंड स्थित बेलगच्छी में बिजली विभाग की अनुपयोगी भूमि पर पावर ग्रिड की स्थापना के साथ रूपौली प्रखंड के मोहनपुर और बनमनखी प्रखंड के चकमका में नए पावर सब-स्टेशन (PSS) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। मेरा मानना है कि परियोजनाओं के पूरा होने से ना सिर्फ पूर्णिया में बल्कि सीमांचल में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध हो सकेगी। अगर डगरूआ प्रखंड स्थित बेलगच्छी में बिजली विभाग की अनुपयोगी भूमि पर पावर ग्रिड का निर्माण होता है तो डगरूआ, बायसी, अमौर और बैसा जैसे चार बड़े प्रखंडों की बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार होगा। सीमांचल के लाखों उपभोक्ता आज भी अनियमित बिजली, कम वोल्टेज, स्मार्ट मीटर की शिकायतों और कमजोर वितरण व्यवस्था से परेशान हैं, इसलिए अब केवल कागजी दावों से नहीं बल्कि जमीनी सुधारों से जनता को राहत मिलनी चाहिए।
केंद्र सरकार की रिपोर्ट में स्मार्ट मीटरों को उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हजारों लोग गलत बिलिंग, अत्यधिक चार्ज, प्रीपेड बैलेंस कटौती, तकनीकी खराबी और शिकायतों के समाधान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। चारों जिलों में स्थापित स्मार्ट मीटरों की संख्या, लंबित शिकायतों और उपभोक्ताओं की आपत्तियों का जिला-वार विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा शिकायतों की जांच के लिए स्वतंत्र जिला स्तरीय तंत्र गठित किया जाए।
हमने कटिहार में प्रस्तावित ग्रिड निर्माण की प्रगति, भूमि अधिग्रहण, निविदा प्रक्रिया और निर्माण की समयसीमा सार्वजनिक करने की भी मांग की। साथ ही आरडीएसएस योजना के तहत पूर्णिया के लिए स्वीकृत 154.32 करोड़ रुपये और कटिहार के लिए स्वीकृत 132.67 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग और कार्य प्रगति रिपोर्ट भी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया। जनता को यह जानने का अधिकार है कि बिजली सुधार के नाम पर स्वीकृत धनराशि का उपयोग कहां और किस तरह हो रहा है।
पूर्णिया शहर में अभी भी बड़ी संख्या में पुराने सिंगल फेज एलटी तार लगे हुए हैं, जो ओवरलोड के कारण बार-बार जल जाते हैं और शॉर्ट सर्किट की घटनाओं को जन्म देते हैं। उन्होंने इन तारों को हटाकर आधुनिक तीन फेज केबल लगाने की मांग की। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट पोलों से हो रहे अनधिकृत बिजली उपयोग और उससे उत्पन्न सुरक्षा जोखिमों की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित कराया। पूरे जिले में एलटी और 11 हजार वोल्ट की लाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जिसके कारण अक्सर बिजली बाधित रहती है और उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिल पाता। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर 1000 किलोमीटर नई एलटी एवं 11 हजार वोल्ट लाइन तथा 100 नए ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति की मांग की।
सीमांचल के लोगों को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए वे सरकार से लगातार जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की मांग करते रहेंगे।
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