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MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
गुरू पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं सप्रेम साहेब बंदगी साहेब गुरु पारस गुरु पुड़ष है, गुरु चंदन बास सुबास| सतगुरु पारस जीव के, दीन्हा मुक्ति निवास ।। साहेब कबीर Hat धनी धर्मदास साहेब पूर्णिमा (गुरू पूर्णिमा) के पावन पर्व की आषाढ़ आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! सप्रेम साहेब बंदगी साहेब... ४ गुरू पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं सप्रेम साहेब बंदगी साहेब गुरु पारस गुरु पुड़ष है, गुरु चंदन बास सुबास| सतगुरु पारस जीव के, दीन्हा मुक्ति निवास ।। साहेब कबीर Hat धनी धर्मदास साहेब पूर्णिमा (गुरू पूर्णिमा) के पावन पर्व की आषाढ़ आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! सप्रेम साहेब बंदगी साहेब... ४
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    मोहिनी HII कबीर वाणी कबीर माया मोहिनी, जैसी मीठी खांड | सतगुरू की कृपा भई, नहीं तोड करती भांड Il रूप, रस, गंध, स्पर्श और शब्द মন সামা ক নাল 81 aFa धन 444 ப14 अहंकार 312f कबीर साहेब जी कहते हैं कि माया मोहिनी चीनी ( खांड) की तरह बहुत मीठी लगती है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। ৭ন, সনিতা भोग विलास মনা यह मीठास जीब को मोह में फंसा लेती है और माया मीठे खांड के समान है, सांसारिक बंधन में बांध देती है। जो हर किसी को लुभाती है, लेकिन यदि सतगुरु की कृपा प्राप्त हो जाए और अंत में दुख का कारण बनती है। तो यह जीब माया के बंधन को तोड़ सकता है और I से जुड़कर मोक्ष का मार्ग प्राप्त करता है। सच्चे परमात्मा Kabir Bhajan Gyan सत भक्ति और नाम स्मरण से ही जीवन सफल है। ஈ +0|1 सन মনযুত কী কৃণা सत्य की पहचान माया का त्याग नाम स्मरण मोक्ष का मार्ग সন কী হানি जीवन का कल्याण जीवन का उद्रेश्य मोहिनी HII कबीर वाणी कबीर माया मोहिनी, जैसी मीठी खांड | सतगुरू की कृपा भई, नहीं तोड करती भांड Il रूप, रस, गंध, स्पर्श और शब्द মন সামা ক নাল 81 aFa धन 444 ப14 अहंकार 312f कबीर साहेब जी कहते हैं कि माया मोहिनी चीनी ( खांड) की तरह बहुत मीठी लगती है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। ৭ন, সনিতা भोग विलास মনা यह मीठास जीब को मोह में फंसा लेती है और माया मीठे खांड के समान है, सांसारिक बंधन में बांध देती है। जो हर किसी को लुभाती है, लेकिन यदि सतगुरु की कृपा प्राप्त हो जाए और अंत में दुख का कारण बनती है। तो यह जीब माया के बंधन को तोड़ सकता है और I से जुड़कर मोक्ष का मार्ग प्राप्त करता है। सच्चे परमात्मा Kabir Bhajan Gyan सत भक्ति और नाम स्मरण से ही जीवन सफल है। ஈ +0|1 सन মনযুত কী কৃণা सत्य की पहचान माया का त्याग नाम स्मरण मोक्ष का मार्ग সন কী হানি जीवन का कल्याण जीवन का उद्रेश्य
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    जब अकेले हाे तो 66 99 परमात्मा से बात किया करो और जब किसी ক মাথ ৪্ী নী परमात्मा  66 की बात किया करो जब अकेले हाे तो 66 99 परमात्मा से बात किया करो और जब किसी ক মাথ ৪্ী নী परमात्मा  66 की बात किया करो
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    कवीरबाणी 66 अव्वल अल्लाह नूर उपाया , कुदरत के सब बंदे। एक नूर ते सब जग उपजया , कौन भले को मंदे।l अथः सब जीवों में उसी एक ईश्वर का प्रकाश (नूर) है। उसकी की शक्त्ति से सारा संसार बना है, तो फिर हम कैसे किसी को अच्छा या बुरा समझ सकते हैं? सब बराबर हैं। कबीर भजन ज्ञान [  कवीरबाणी 66 अव्वल अल्लाह नूर उपाया , कुदरत के सब बंदे। एक नूर ते सब जग उपजया , कौन भले को मंदे।l अथः सब जीवों में उसी एक ईश्वर का प्रकाश (नूर) है। उसकी की शक्त्ति से सारा संसार बना है, तो फिर हम कैसे किसी को अच्छा या बुरा समझ सकते हैं? सब बराबर हैं। कबीर भजन ज्ञान [
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    कबीर वाणी 66 मन की डोरी ढीली पडे़ , चले माया के संग | सत्य-्नाम जो थाम ले, मिटे जन्म का जंग| १९ भावार्थ संत कबीरदास जी मन की चंचल प्रवृत्ति को माया का मूल कारण बताते हैं। जब मन स्थिर नहीं रहता, तो वह इच्छाओं , लालच और दिखावे के पीछे भागता है, जिससे जीव जन्म-्जन्मांतर के बंधनों में फँसा रहता है। लेकिन सत्य ्नाम" का आश्रय लेने और सच्ची भक्ति अपनाने से भीतर के संधर्ष शांत होने लगते हैं। ईश्वर का स्मरण मन को स्थिरता , शांति और वास्तविक आनंद प्रदान करता है। ப सन कबीर वाणी 66 मन की डोरी ढीली पडे़ , चले माया के संग | सत्य-्नाम जो थाम ले, मिटे जन्म का जंग| १९ भावार्थ संत कबीरदास जी मन की चंचल प्रवृत्ति को माया का मूल कारण बताते हैं। जब मन स्थिर नहीं रहता, तो वह इच्छाओं , लालच और दिखावे के पीछे भागता है, जिससे जीव जन्म-्जन्मांतर के बंधनों में फँसा रहता है। लेकिन सत्य ्नाम" का आश्रय लेने और सच्ची भक्ति अपनाने से भीतर के संधर्ष शांत होने लगते हैं। ईश्वर का स्मरण मन को स्थिरता , शांति और वास्तविक आनंद प्रदान करता है। ப सन
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    आज कहे हरि कल भजुंगा , काल कहे फिर काल | कालके करत ही , आज अवसर जासी चाल I अर्थ जो व्यक्ति आज भगवान का भजन करने का संकल्प करता है कि कल से भजन करूँगा , उसके लिए काल (मृत्यु ) कह देता है - फिर उसके पास समय नहीं होगा| इसलिए हे मानव! आज ही भजन कर, क्यॉकि समय और अवसर किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। सबको अपने वश में कर लेता है। काल इसलिए आज का दिन ही सबसे अनमोल है इसे भजन सेवा और सत्कर्म में लगाओ , यही जीवन की सच्ची पूँजी है। Kabir Bhajan Gyan सत साहेब कबीसभजन ಞilor आज कहे हरि कल भजुंगा , काल कहे फिर काल | कालके करत ही , आज अवसर जासी चाल I अर्थ जो व्यक्ति आज भगवान का भजन करने का संकल्प करता है कि कल से भजन करूँगा , उसके लिए काल (मृत्यु ) कह देता है - फिर उसके पास समय नहीं होगा| इसलिए हे मानव! आज ही भजन कर, क्यॉकि समय और अवसर किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। सबको अपने वश में कर लेता है। काल इसलिए आज का दिन ही सबसे अनमोल है इसे भजन सेवा और सत्कर्म में लगाओ , यही जीवन की सच्ची पूँजी है। Kabir Bhajan Gyan सत साहेब कबीसभजन ಞilor
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    नींबू मिर्ची टाँगकर, / समझे टल गया काल। कर्म सुधारे जो मनुज , उसका जोवन खुशहाल।| "अंधविश्वास नहीं, अच्छे कर्म जीवन बदलते हैं। " FOLLOW GOD VLOGS आध्यात्मिक विचार प्रेम - भक्ति - ज्ञान नींबू मिर्ची टाँगकर, / समझे टल गया काल। कर्म सुधारे जो मनुज , उसका जोवन खुशहाल।| "अंधविश्वास नहीं, अच्छे कर्म जीवन बदलते हैं। " FOLLOW GOD VLOGS आध्यात्मिक विचार प्रेम - भक्ति - ज्ञान
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    जीवन में नाम का प्रकाश ही सबसे बड़ा सहारा है। जब नाम से प्रेम हो जाता है, तब हर अंधकार मिट जाता है और भीतर शांति का उदय होता है। पंथ श्री हुजूर प्रकाश मुनि नाम साहेब जीवन में नाम का प्रकाश ही सबसे बड़ा सहारा है। जब नाम से प्रेम हो जाता है, तब हर अंधकार मिट जाता है और भीतर शांति का उदय होता है। पंथ श्री हुजूर प्रकाश मुनि नाम साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल। आदि अंत सब सोधिया , दूजा देखा काल।। भावार्थः कबीर साहिब कहते हैं कि सुमिरन (नाम-स्परण ) प्रभु का ही जीवन का सार है। संसार के बाकी मोह-माया ক নখন 3ানন: दूःख का कारण बनते हैं। কনণমলল Emm कबीर सुमिरन सार है, और सकल जंजाल। आदि अंत सब सोधिया , दूजा देखा काल।। भावार्थः कबीर साहिब कहते हैं कि सुमिरन (नाम-स्परण ) प्रभु का ही जीवन का सार है। संसार के बाकी मोह-माया ক নখন 3ানন: दूःख का कारण बनते हैं। কনণমলল Emm
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    कबीर साहिब के रहेस्यमयी प्रश्न कहां ढूँढ़े रे बन्दे तू॰ मैं तो तेरे पास मे? मंदिर, मस्जिद, तीर्थ में खोजे , क्या पाया हतिहास में? जो खोजे दिल के अंदर झाँके , वो मिले उसी प्रकाश में। फेरत जुग माला भया, মিমা ন মন কা ক? हाथ की माला तो फेर ली, मन की माला क्यों नहीं ? बाहर भटके जग सारा , खुद से क्यों कोई नहीं ? पोथी पढ़़ि पढ़़ि जग मुआ , पंडित भया न कोय? ज्ञान किताबों में ढूँढे सब, अनुभव से क्यों डरता है? जो घर फूँके आपना , जो जिया नहीं उसे क्या जाने , सत्य कहों पर बसता है? चले हमारे साथ। की, जाति न पूछो साधु अहंकार , लालच , मोह त्यागकर , पूछ लीजिये ज्ञान? क्या तुम तैयार हो उस परम सत्य के रास्ते पर? सोचो. 3IT3, 3raft, आज भी जाति, पंथ , ऊँच नीच में बँटा इंसान , इसी ! कब समझेगा ? एक है मालिक, एक है पहचान ! ऐसे ही ज्ञानवर्धक पोस्ट के लिए कबार भजन ज्ञान ঐত কী কাঁলী কং हमारे  कबीर वाणी , भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम LIKE COMMENT SHARE FOLLOW कबीर्भजन श्ञन कबीर साहिब के रहेस्यमयी प्रश्न कहां ढूँढ़े रे बन्दे तू॰ मैं तो तेरे पास मे? मंदिर, मस्जिद, तीर्थ में खोजे , क्या पाया हतिहास में? जो खोजे दिल के अंदर झाँके , वो मिले उसी प्रकाश में। फेरत जुग माला भया, মিমা ন মন কা ক? हाथ की माला तो फेर ली, मन की माला क्यों नहीं ? बाहर भटके जग सारा , खुद से क्यों कोई नहीं ? पोथी पढ़़ि पढ़़ि जग मुआ , पंडित भया न कोय? ज्ञान किताबों में ढूँढे सब, अनुभव से क्यों डरता है? जो घर फूँके आपना , जो जिया नहीं उसे क्या जाने , सत्य कहों पर बसता है? चले हमारे साथ। की, जाति न पूछो साधु अहंकार , लालच , मोह त्यागकर , पूछ लीजिये ज्ञान? क्या तुम तैयार हो उस परम सत्य के रास्ते पर? सोचो. 3IT3, 3raft, आज भी जाति, पंथ , ऊँच नीच में बँटा इंसान , इसी ! कब समझेगा ? एक है मालिक, एक है पहचान ! ऐसे ही ज्ञानवर्धक पोस्ट के लिए कबार भजन ज्ञान ঐত কী কাঁলী কং हमारे  कबीर वाणी , भजन और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम LIKE COMMENT SHARE FOLLOW कबीर्भजन श्ञन
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    कबीर वाणी বী নুয ' तारों में जो झिलमिल है, নযা নাম | मन के अंधे को दिखे नहीं, कैसे पावे राम।। भावार्थ जिस प्रकार आकाश के तारों में ईश्वर का प्रकाश है ठीक उसी प्रकार हर जीव में परमात्मा का नूर है। लेकिन अज्ञानता और अहंकार के अंधकार में डूबा मनुष्य उस प्रकाश को नहीं देख पाता | जो मन को निर्मल करे, वही सच्चे राम को पा सकता है। मन को उजाला कर लो, नाम का दीप जलाओ| 66 हर तारे में वो दिखई देगा, जो सच्चे दिल से चलाओ ।। cecimor Fm कबीर वाणी বী নুয ' तारों में जो झिलमिल है, নযা নাম | मन के अंधे को दिखे नहीं, कैसे पावे राम।। भावार्थ जिस प्रकार आकाश के तारों में ईश्वर का प्रकाश है ठीक उसी प्रकार हर जीव में परमात्मा का नूर है। लेकिन अज्ञानता और अहंकार के अंधकार में डूबा मनुष्य उस प्रकाश को नहीं देख पाता | जो मन को निर्मल करे, वही सच्चे राम को पा सकता है। मन को उजाला कर लो, नाम का दीप जलाओ| 66 हर तारे में वो दिखई देगा, जो सच्चे दिल से चलाओ ।। cecimor Fm
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