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सुशील मेहता - Author on ShareChat
सुशील मेहता
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कलाम अमीर ख़ुसरो #सूफी काव्य
कलाम कि मन बूदम -মনস ঐ সড়িল নুন থান আৎ ब-हर ्सू रक़्स ए-बिस्मिल बूद शब जाए कि मन बूदम कल रात जहाँ मैं था वो एक अज्ञात जगह थी, कल जहाँ मैं था हर तरफ़ ज़ख़्मियों(चायलों ) का नाच हो रहा था परी-पैकर निगारे सर्व क़द्दे लालः रुख़्सारे आफ़त ए-दिल बूद शब जाए कि मन बूदम सरापा कल रात जहाँ मैं था लाला चेहरे (दिल ' वाला), लम्बे क़द लुभाने  और परी जैसे लोग,हमारे दिल के लिए आफत बने हुए थे रक़ीबाँ गोश-बर आवाज़ ऊ दर नाज़नओ-्मन तरसाँ सुख़न गुफ़्तन चे मुश्किल बूद शब जाए कि मन बूदम जहाँ मैं था तमाम रक़ीब (प्रतिस्पर्धी) उस की बात पर कल रात धरे हुए थे, वह अभिमान में था और मैं डरा था, वहाँ बात कान भी मुश्किल हो गया था HI ख़ुदा ख़ुद मीर-ए॰्मज्लिस बूद अंदर ला-्मकाँ ख़ुसरौ' मोहम्मद शम्अ ए ्महफ़िल बूद शब जाए कि मन बूदम ऐ ख़ुसरौ' कल जहाँ मैं था वहाँ ख़ुदा ख़ुद सभा ्अध्यक्ष था, जब कि हज़रत मोहम्मद महफ़िल की शम' थे आतिश ए इश्क़ ए॰तू दामन सोख़्त ऐ ख़ुसरौ' TRI 3೮ मोहम्मद शम्अ एन्महफ़िल बूद शब जाए कि मन बूदम ऐ ख़ुसरौ' इश्क़ की आग ने मेरा दामन जला डाला, कल रात जहाँ मैं था वहाँ हज़रत मोहम्मद ख़ुद शम' -ए ्महफ़िल थे (अमीर ख़ुसरो) Motivationat Vdeos App Want कलाम कि मन बूदम -মনস ঐ সড়িল নুন থান আৎ ब-हर ्सू रक़्स ए-बिस्मिल बूद शब जाए कि मन बूदम कल रात जहाँ मैं था वो एक अज्ञात जगह थी, कल जहाँ मैं था हर तरफ़ ज़ख़्मियों(चायलों ) का नाच हो रहा था परी-पैकर निगारे सर्व क़द्दे लालः रुख़्सारे आफ़त ए-दिल बूद शब जाए कि मन बूदम सरापा कल रात जहाँ मैं था लाला चेहरे (दिल ' वाला), लम्बे क़द लुभाने  और परी जैसे लोग,हमारे दिल के लिए आफत बने हुए थे रक़ीबाँ गोश-बर आवाज़ ऊ दर नाज़नओ-्मन तरसाँ सुख़न गुफ़्तन चे मुश्किल बूद शब जाए कि मन बूदम जहाँ मैं था तमाम रक़ीब (प्रतिस्पर्धी) उस की बात पर कल रात धरे हुए थे, वह अभिमान में था और मैं डरा था, वहाँ बात कान भी मुश्किल हो गया था HI ख़ुदा ख़ुद मीर-ए॰्मज्लिस बूद अंदर ला-्मकाँ ख़ुसरौ' मोहम्मद शम्अ ए ्महफ़िल बूद शब जाए कि मन बूदम ऐ ख़ुसरौ' कल जहाँ मैं था वहाँ ख़ुदा ख़ुद सभा ्अध्यक्ष था, जब कि हज़रत मोहम्मद महफ़िल की शम' थे आतिश ए इश्क़ ए॰तू दामन सोख़्त ऐ ख़ुसरौ' TRI 3೮ मोहम्मद शम्अ एन्महफ़िल बूद शब जाए कि मन बूदम ऐ ख़ुसरौ' इश्क़ की आग ने मेरा दामन जला डाला, कल रात जहाँ मैं था वहाँ हज़रत मोहम्मद ख़ुद शम' -ए ्महफ़िल थे (अमीर ख़ुसरो) Motivationat Vdeos App Want
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    momin moin
    Aasalam allykum jumma mubarak ❤️ #khawaja #♠NFAK💞Qwali ♠ #naat #sufi #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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    momin moin
    #ilovemadina #islam #naat #sufi #islamic jumma Mubarak ap sab ko ❤️
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    #deen #naat #islam ##yahusain #sufi mera Husain tuzhe salam❤️
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    #khawaja #sufi #qawwali #🎤 राहत फ़तेह अली खान सांग्स #song
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    #islam #naat #sufi #music #viral
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    Noori hassan
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    सुशील मेहता
    अनुवादित कलाम जलालुद्दीन रुमी #सूफी काव्य
    " जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" तुझ से कहा था मैं ने कल ऐ बे नज़ीर ए ख़ुश लिक़ा ऐ रश्क से तेरे फ़लक पर चाँद दोहरा हो गया इमरोज़ तू जो कुछ भी है हाजिब था तू सुल्ताँ বনাা तू यूसुफ़ ए॰कन' आँ' बना तू हुस्न ए नूरए मुस्तफ़ा इमशब सताइश मैं ने की कल होगी बरतर ऐ कल ये ज़मीन ओ आसमाँ ता'रीफ़ में होंगे 47 हूँ मैं चाकर तिरा इमशब ग़नीमत है मुझे नौकर होंगे फ़रिश्ते हम्द ख़्वाँ कल ' अर्श फाड़ेगा क़बा नागाह सरसर आएगी ये बाम होगा और न दर मिट जाएँगे सब बद नफ़स कीड़े मकोड़ों की 76 आँधी चलेगी जब तिरी ताबिंदा उस में होगा तू हर ज़र्रा हँसता पाएगा उस नूर में शमसुज़्ज़ुहा वो दिल रुबाई पाएँगे पहले न थी उन में कभी ता'लीम ज़र्रे पाएँगे ऐ आफ़्ताब ए ख़ुश लिक़ा Motivational Videos App Want " जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" तुझ से कहा था मैं ने कल ऐ बे नज़ीर ए ख़ुश लिक़ा ऐ रश्क से तेरे फ़लक पर चाँद दोहरा हो गया इमरोज़ तू जो कुछ भी है हाजिब था तू सुल्ताँ বনাা तू यूसुफ़ ए॰कन' आँ' बना तू हुस्न ए नूरए मुस्तफ़ा इमशब सताइश मैं ने की कल होगी बरतर ऐ कल ये ज़मीन ओ आसमाँ ता'रीफ़ में होंगे 47 हूँ मैं चाकर तिरा इमशब ग़नीमत है मुझे नौकर होंगे फ़रिश्ते हम्द ख़्वाँ कल ' अर्श फाड़ेगा क़बा नागाह सरसर आएगी ये बाम होगा और न दर मिट जाएँगे सब बद नफ़स कीड़े मकोड़ों की 76 आँधी चलेगी जब तिरी ताबिंदा उस में होगा तू हर ज़र्रा हँसता पाएगा उस नूर में शमसुज़्ज़ुहा वो दिल रुबाई पाएँगे पहले न थी उन में कभी ता'लीम ज़र्रे पाएँगे ऐ आफ़्ताब ए ख़ुश लिक़ा Motivational Videos App Want
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  • सुशील मेहता - Author on ShareChat
    सुशील मेहता
    कलाम मंजूर आरफी #सूफी काव्य
    QcIH" /1 मोरे ज्ञान गुनी मोरे पीत-पदम मोरे सीस ्मुकुट मोरे जान-ओ ्तनम मोरे साँचे बलम मोरे दीन ओनधरम तोरे हाथ है हमरी लाजन्शरम मोहे लाग है तुम से तुम से लगन मोरे सीस है साजन चरन तुमरे करूँ कोउ उपाय मैं कौन जतन वही तुर्फ़ा सितम वही तुर्फ़ा सितम मोरे गुन अवगुन कुछ चित न धरो मोरे खोट कलंक सजन बिसरो मोरे पीत किए की लाज रखो नित नित की ये पीडा हर लो बलम कहो मन की बिपत मैं का से कहूँ कुछ कह न सकूँ चुप रह न सकूँ तोरे चरनन लागूँ पाएँ परूँ तोरे द्वारे आन पड़ी प्रीतम (मंजूर आरफी) QcIH" /1 मोरे ज्ञान गुनी मोरे पीत-पदम मोरे सीस ्मुकुट मोरे जान-ओ ्तनम मोरे साँचे बलम मोरे दीन ओनधरम तोरे हाथ है हमरी लाजन्शरम मोहे लाग है तुम से तुम से लगन मोरे सीस है साजन चरन तुमरे करूँ कोउ उपाय मैं कौन जतन वही तुर्फ़ा सितम वही तुर्फ़ा सितम मोरे गुन अवगुन कुछ चित न धरो मोरे खोट कलंक सजन बिसरो मोरे पीत किए की लाज रखो नित नित की ये पीडा हर लो बलम कहो मन की बिपत मैं का से कहूँ कुछ कह न सकूँ चुप रह न सकूँ तोरे चरनन लागूँ पाएँ परूँ तोरे द्वारे आन पड़ी प्रीतम (मंजूर आरफी)
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