sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_२८/२
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🦚भगवान प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करते है ? 🦚
गतांक से आगे
मैं ऐसा जाहिर करूं कि मैं बिरला सेठ का बेटा हूं ,, तो मुझे बिरला सेठ की मिल्कत में से हिस्सा नहीं मिल सकता,, किंतु खुद बिरला सेठ खड़े होकर जाहिर करें ,,, कि मैं उनका बेटा हूं ,,, तभी मुझे बिरला सेट की मिल्कत में से हिस्सा मिलेगा ,,, इस तरह खुद भगवान खड़े होकर ऐसा कहे कि-----
*यो मद् भक्त: स मे प्रिय:।*
*मैं भगवान के कहे हुए लक्षणों को धारण करता हूं, तभी मैं उनका भक्त माना जाऊंगा ,, और नरसी मेहता मीरा की तरह मुझे भी प्रारब्ध भोगने में मदद करेंगे ।*
*फिर भी भगवान तो जगत के पिता हैं , और उनकी तो अच्छे, बुरे , भक्त , अभक्त ऐसे तमाम जीवो पर अनुकंपा-- दया तो है ही ,, क्योंकि वे तो दया के सागर है।*
*मैं अपने पिता का कहना नहीं करता और उनके मना करने पर भी उनके विरुद्ध आचरण करके पेड़ के ऊपर चढ़कर छलांग लगाया करू और ऐसे करने में कोई समय मेरा पैर टूट जाए ,, तो भी मेरे पिता मेरे ऊपर दया करके मुझे हड्डी के बैद के पास ले जाएंगे,,, और वहां जाने का रिक्शा किराया भी खर्च करेंगे ,,, हड्डी के बैद की फीस भी देंगे ,,, घर लाकर मुझे कोमल बिछोने पर सुलाएंगे,,, मेरी सुश्रुता भी करेंगे ,,,, दवाई भी पिलाएंगे,,,, मोसंबी आदि का खर्च भी करके खिलाएंगे ,, और उद्वेग न हो ऐसे बचन बोलेंगे।*
*किंतु मैं उनके पास यदि ऐसी मांग करूं कि पिताजी मुझे पैर मे अति वेदना होती है ,,, वह आप ले लो ,,, तो मेरे पिताजी मेरे पैर का दर्द नहीं ले सकते ,,, वह दर्द तो मुझे खुद ही भोगना पड़ेगा।*
*ठीक उसी प्रकार मनुष्य भगवान की आज्ञाओ का उल्लंघन करके, कुकर्म करता है,, तो वह पक्के प्रारब्ध रूप से सामने आता है , वह प्रारब्ध तो उसको स्वयं ही भोगना पड़ेगा । उस कर्म के कायदे में जगतपिता हस्तक्षेप नहीं करेंगे।*
*खुद भगवान राम परात्पर ब्रह्म होने पर भी निर्गुण निराकार स्वरूप छोड़कर सगुण साकार रूप से जगत में आए ,,, तब उन्होंने भी कर्म के कायदे की मर्यादा संभाली है और उस तरह बर्ताव किया है,, श्री भगवान राम स्वयं कहते हैं।*
अब आगे के भाग कल पढ़ेंगे ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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