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रुबाई जलालुद्दीन रुमी #सूफी काव्य #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "रुबाई" दर राह-एन्तलब आ'क़िल ओ दीवानः यकीस्त दर शेवः-ए-' इश्क़ ख़्वेश ओ-बे-गानः यकीस्त সঁ যা ক্রি থাযান-৭-বলে-৭-আনাঁ چچچ दर मज़हब एऊ का'बः-ओ बुत ख़ानः यकीस्त পানাথ: (हक़ीक़त की) तलब की राह में अक़्लमंद और दीवाना एक बराबर हैं, और शेवा ए इशश्क़ में अपना और बेगाना एक जैसे ही हैं। वो कि जिसे महबूब एन्हक़ीक़ी के वस्ल की शराब पिला दी गई॰ उस के मज़हब में का॰बा और बुत ख़ाना एक ही हैं। (जलालुद्दीन रूमी) Motivational Videos App Want ' "रुबाई" दर राह-एन्तलब आ'क़िल ओ दीवानः यकीस्त दर शेवः-ए-' इश्क़ ख़्वेश ओ-बे-गानः यकीस्त সঁ যা ক্রি থাযান-৭-বলে-৭-আনাঁ چچچ दर मज़हब एऊ का'बः-ओ बुत ख़ानः यकीस्त পানাথ: (हक़ीक़त की) तलब की राह में अक़्लमंद और दीवाना एक बराबर हैं, और शेवा ए इशश्क़ में अपना और बेगाना एक जैसे ही हैं। वो कि जिसे महबूब एन्हक़ीक़ी के वस्ल की शराब पिला दी गई॰ उस के मज़हब में का॰बा और बुत ख़ाना एक ही हैं। (जलालुद्दीन रूमी) Motivational Videos App Want ' - ShareChat