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kirti Sahu - Author on ShareChat
kirti Sahu
477 views • 2 days ago
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
गायत्री माता मंदिर विश्वामित्र की तपस्थली ब्रह्मर्षि  0 Aug 2026 वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी कृष्ण पक्ष, अष्टमी , २०८३ एबं दिव्य अखण्ड दीप का महापर्व २०२६ awgpofficial YOUTUBB Shantikunj Rishi Chintan WWW.aWgD.0rg 8439014110 गायत्री माता मंदिर विश्वामित्र की तपस्थली ब्रह्मर्षि  0 Aug 2026 वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी कृष्ण पक्ष, अष्टमी , २०८३ एबं दिव्य अखण्ड दीप का महापर्व २०२६ awgpofficial YOUTUBB Shantikunj Rishi Chintan WWW.aWgD.0rg 8439014110
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  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    ज़िंदगी में जब बचपन के खेल खत्म हो जाते हैं, उसके बाद फिर किस्मत के खेल शुरू हो जाते हैं। शुभ रात्रि जय मां गायत्री ज़िंदगी में जब बचपन के खेल खत्म हो जाते हैं, उसके बाद फिर किस्मत के खेल शुरू हो जाते हैं। शुभ रात्रि जय मां गायत्री
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    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं जैसे दीपक को जलने के लिए तेल की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन को महकने के लिए भक्ति और सदाचार की आवश्यकता होती है, जब हम परमात्मा को अपने जीवन का सारथी बना लेते हैं, तो और हर मंजिल खूबसूरत हो जाती है हर राह आसान को सुबह  सभी प्रभु प्रेमियों  की राम राम हरि शरणं जैसे दीपक को जलने के लिए तेल की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन को महकने के लिए भक्ति और सदाचार की आवश्यकता होती है, जब हम परमात्मा को अपने जीवन का सारथी बना लेते हैं, तो और हर मंजिल खूबसूरत हो जाती है हर राह आसान को सुबह  सभी प्रभु प्रेमियों  की राम राम
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४ हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे तत्तुल्यं, रामनाम वरानने सहस्रनाम भगवान शिव कहते है कि हे पार्वती पूरे ब्रह्मांड में सबसे बड़ा नाम राम नाम है राम नाम से बड़ा और कोई अन्य नाम नहीं है राम नाम विष्णु या नारायण बोलने से सत्य नाम है॰ हजार बार श्री हरि या एक बार राम बोलने के बराबर है। हरि शरणं राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे तत्तुल्यं, रामनाम वरानने सहस्रनाम भगवान शिव कहते है कि हे पार्वती पूरे ब्रह्मांड में सबसे बड़ा नाम राम नाम है राम नाम से बड़ा और कोई अन्य नाम नहीं है राम नाम विष्णु या नारायण बोलने से सत्य नाम है॰ हजार बार श्री हरि या एक बार राम बोलने के बराबर है।
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    समाधि स्थल का दिव्य दर्शन युगतीर्थ शांतिकुंज, गायत्री तीर्थ हरिद्वार से 01.08.2026 युग -परिवर्तन का संकल्प किसी एक व्यत्ति की क्रांति से नहीं , हम सबके आत्म -निर्माण और सही दिशा में उठाए कदम से R' होगा। मनृष्य का जीवन विचित्र प्रकारकाम जीवन है॰ इसमें चह इतना नीचे गिर सकता है॰ कि पशु भी उससे उपर हो जाए.॰. और अपने आप को इतना ऊपर उठा ले॰ कि देवता भी उससे नीचे रह जाएं..! समाधि स्थल का दिव्य दर्शन युगतीर्थ शांतिकुंज, गायत्री तीर्थ हरिद्वार से 01.08.2026 युग -परिवर्तन का संकल्प किसी एक व्यत्ति की क्रांति से नहीं , हम सबके आत्म -निर्माण और सही दिशा में उठाए कदम से R' होगा। मनृष्य का जीवन विचित्र प्रकारकाम जीवन है॰ इसमें चह इतना नीचे गिर सकता है॰ कि पशु भी उससे उपर हो जाए.॰. और अपने आप को इतना ऊपर उठा ले॰ कि देवता भी उससे नीचे रह जाएं..!
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं fs बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु fs बिश्रामु सपनेहुँ जीव न लह राम कृपा गोस्वामी जी कहते है कि सच्चा भक्त भगवान पर अटूट विश्वास विश्वास किये प्रभु कृपा प्राप्त रखता है॰ बिना भगवान पर करना सम्भव ही नहीं है, भगवान राम की कृपा के बिना स्वप्न में भी चैन नहीं मिलता इसलिये प्रभु श्रीराम पर अखंड विश्वास रखते हुए भक्ति करना ही सब प्रकार से लाभकारी है हरि शरणं fs बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु fs बिश्रामु सपनेहुँ जीव न लह राम कृपा गोस्वामी जी कहते है कि सच्चा भक्त भगवान पर अटूट विश्वास विश्वास किये प्रभु कृपा प्राप्त रखता है॰ बिना भगवान पर करना सम्भव ही नहीं है, भगवान राम की कृपा के बिना स्वप्न में भी चैन नहीं मिलता इसलिये प्रभु श्रीराम पर अखंड विश्वास रखते हुए भक्ति करना ही सब प्रकार से लाभकारी है
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    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    श्री रामचरितमानस चौपाई ।। जिमि सरिता सागर मंहु जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं | जैसे सभी नदियाँ बिना किसी स्वार्थ के स्वाभाविक रूप से समुद्ध में जाकर मिल जाती हैं, वैसे ही सच्चा भक्त अंततः में पहुँच जाता है। भगवान की शरण 02025 Bhakti Bhauna Powered by @Bablu_dwivedi418 श्री रामचरितमानस चौपाई ।। जिमि सरिता सागर मंहु जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं | जैसे सभी नदियाँ बिना किसी स्वार्थ के स्वाभाविक रूप से समुद्ध में जाकर मिल जाती हैं, वैसे ही सच्चा भक्त अंततः में पहुँच जाता है। भगवान की शरण 02025 Bhakti Bhauna Powered by @Bablu_dwivedi418
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    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    गायतीतीर्थ शान्तिकुंञ्ज मनुष्यों में सामान्य रूप से यह पाई जाती है प्रवृत्ति एक ক্ি ঐ নুষই ক কামী ম बहुत जल्दी हस्तक्षेप करने लगते हैं। अखण्ड ज्योति जनवरी १९५८ हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे  युग सुधरेगा  वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी Gonar ' 1926 ` ಞe दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial 8439014110  YoufUaD Shantikunj Rishi Chintan WWW awgp.org गायतीतीर्थ शान्तिकुंञ्ज मनुष्यों में सामान्य रूप से यह पाई जाती है प्रवृत्ति एक ক্ি ঐ নুষই ক কামী ম बहुत जल्दी हस्तक्षेप करने लगते हैं। अखण्ड ज्योति जनवरी १९५८ हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे  युग सुधरेगा  वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी Gonar ' 1926 ` ಞe दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial 8439014110  YoufUaD Shantikunj Rishi Chintan WWW awgp.org
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    kirti Sahu
    ##जय मां गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं राम ब्रह्म परमारथ रूपा अबिगत अलख अनादि अनूपा सकल बिकार रहित गतभेदा कहि नित नेति निरूपहिं बेदा श्री रामजी परमार्थस्वरूप |परमवस्तु) परब्रह्म वे अविगत |जानने में न आने वाले। हैं, अलख दृष्टि से देखने में न आने वाले , अनादि (स्थूल (आदिरहित , अनुपम ।उपमारहित) सब विकारों से रहति और भेद शून्य हैं॰ वेद जिनका नित्य कहकर निरूपण करते हैं ননি-ননি' हरि शरणं राम ब्रह्म परमारथ रूपा अबिगत अलख अनादि अनूपा सकल बिकार रहित गतभेदा कहि नित नेति निरूपहिं बेदा श्री रामजी परमार्थस्वरूप |परमवस्तु) परब्रह्म वे अविगत |जानने में न आने वाले। हैं, अलख दृष्टि से देखने में न आने वाले , अनादि (स्थूल (आदिरहित , अनुपम ।उपमारहित) सब विकारों से रहति और भेद शून्य हैं॰ वेद जिनका नित्य कहकर निरूपण करते हैं ননি-ননি'
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