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JP GAUR - Author on ShareChat
JP GAUR
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#🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #श्रीमद्भागवत #कथा
श्रीमद्दागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ परीक्षित को श्रीमद्भागवत का अमृत भक्ति गीतों , हरिनाम  ন ওক সান নযন ন নান शुकदेव  संकीर्तन और राधे-्श्याम अंतिम उपदेश दिया। उन्होंने बताया के जयघोष से गूंज उठा कि जीवन क्षणभंगुर है, मृत्यु निश्चित " है॰ इसलिए मनुष्य को मोह माया फर्रुखनगर , २४ मई (ब्यूरो ): छोड़कर भगवान के चरणों में मन प्राचीन रामलीला मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को लगाना चहिए। जैसे ही कथा पूर्ण  हुई, शुकदेव जी वहांसे प्रस्थान करने  समापन के अंतिम दिन अत्यत भक्ति श्रद्धा ओर आध्यात्मिक लगे। यह दृश्य अत्यंत भावुक था क ऊर्जा परोक्षित सहित सभी श्रोता भाव- साथ संपन्न हुआ| कथा के समापन राजा विह्वल दिवस पर पंडाल में श्रद्धालुओं की हो उठे। कथावाचक ने कहा সীভ ওসভ সভী वातावरण भक्ति कि का जीवन स्वयं वैराग्य शुकदेव श्रीमद्भागवत कथा वाचन करते कथावाचक आचार्य त्रिलोकी शास्त्री | और ज्ञान का ग्रतीक है॰ जो हमें गोतों, हरिनाम संकीर्तन और राधे दौलत नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम और अपनो पत्नो के अग्रह सिखाता है कि संसार में रहते हुए भी॰ श्याम के जयघोष से गूंज उठा। सुदामा ஏ6 है। सुदामा " आचार्य   त्रिलोकी पर द्वारका पहंचे तब उनके पास देने সপপতা সিম  मन को ईश्वर मेंस्थिर रखनाहो सच्ची 75ு कथावाचक शास्त्री ने अंतिमदिन तीन प्रमुख प्रसंग নলি ননল নানল ন্ষীপাহলী থী नहों मांगा फिर भो भगवान ने उनकी साधना हें। कथा के समापन अवसर किंत उनके मन में अपार प्रेम और दख्िता दूर कर उन्हें समृद्धि प्रदान सुदामा चरित्र शुकदेव जी की विदाई पर विधिवत पूजा अर्चना, हवन और की।यह ग्रसंग जीवन में संतोष , सच्ची  श्रद्धा थी॰ जैसे ही श्रीकृष्ण को अपने और राजा परीक्षित के मोक्षका अत्यंत महाआरती का आयोजन किया गया। भावपूर्णवविस्तारपूर्वक वर्णन किया।  मित्रता और निष्काम बालसखा के आगमन का समाचार ஈ# নীপ   সম্পলিন का श्रद्धालुओं कर मिला,वे स्वयं दौड़ कर द्वार पर पहुंचे अद्भुत संदेश देता है। ज्ञान, बैराग्य का स्मरण किया कि सुदामा और कथावाचक ने बताया ओर भगवान भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता केवल और सुदामा को गले लगाया। और भक्ति का संगम कथा के अगले वातावरण हरे कृष्ण , हरे राम के मंत्रों से गूंज उठा। वहीं आज सोमवार को  सांसारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक चरण में शुकदेव की विदाई का प्रसंग भगवान का यह व्यवहार इस बात का ग्रमाण है कि ईश्वर को धन प्रेम का ग्रतीक थीःनिर्धन सुनाया गया। सात दिनों तक राजा भंडार का आयोजन किया जाएगा ग्राह्मण श्रीमद्दागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ परीक्षित को श्रीमद्भागवत का अमृत भक्ति गीतों , हरिनाम  ন ওক সান নযন ন নান शुकदेव  संकीर्तन और राधे-्श्याम अंतिम उपदेश दिया। उन्होंने बताया के जयघोष से गूंज उठा कि जीवन क्षणभंगुर है, मृत्यु निश्चित " है॰ इसलिए मनुष्य को मोह माया फर्रुखनगर , २४ मई (ब्यूरो ): छोड़कर भगवान के चरणों में मन प्राचीन रामलीला मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को लगाना चहिए। जैसे ही कथा पूर्ण  हुई, शुकदेव जी वहांसे प्रस्थान करने  समापन के अंतिम दिन अत्यत भक्ति श्रद्धा ओर आध्यात्मिक लगे। यह दृश्य अत्यंत भावुक था क ऊर्जा परोक्षित सहित सभी श्रोता भाव- साथ संपन्न हुआ| कथा के समापन राजा विह्वल दिवस पर पंडाल में श्रद्धालुओं की हो उठे। कथावाचक ने कहा সীভ ওসভ সভী वातावरण भक्ति कि का जीवन स्वयं वैराग्य शुकदेव श्रीमद्भागवत कथा वाचन करते कथावाचक आचार्य त्रिलोकी शास्त्री | और ज्ञान का ग्रतीक है॰ जो हमें गोतों, हरिनाम संकीर्तन और राधे दौलत नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम और अपनो पत्नो के अग्रह सिखाता है कि संसार में रहते हुए भी॰ श्याम के जयघोष से गूंज उठा। सुदामा ஏ6 है। सुदामा " आचार्य   त्रिलोकी पर द्वारका पहंचे तब उनके पास देने সপপতা সিম  मन को ईश्वर मेंस्थिर रखनाहो सच्ची 75ு कथावाचक शास्त्री ने अंतिमदिन तीन प्रमुख प्रसंग নলি ননল নানল ন্ষীপাহলী থী नहों मांगा फिर भो भगवान ने उनकी साधना हें। कथा के समापन अवसर किंत उनके मन में अपार प्रेम और दख्िता दूर कर उन्हें समृद्धि प्रदान सुदामा चरित्र शुकदेव जी की विदाई पर विधिवत पूजा अर्चना, हवन और की।यह ग्रसंग जीवन में संतोष , सच्ची  श्रद्धा थी॰ जैसे ही श्रीकृष्ण को अपने और राजा परीक्षित के मोक्षका अत्यंत महाआरती का आयोजन किया गया। भावपूर्णवविस्तारपूर्वक वर्णन किया।  मित्रता और निष्काम बालसखा के आगमन का समाचार ஈ# নীপ   সম্পলিন का श्रद्धालुओं कर मिला,वे स्वयं दौड़ कर द्वार पर पहुंचे अद्भुत संदेश देता है। ज्ञान, बैराग्य का स्मरण किया कि सुदामा और कथावाचक ने बताया ओर भगवान भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता केवल और सुदामा को गले लगाया। और भक्ति का संगम कथा के अगले वातावरण हरे कृष्ण , हरे राम के मंत्रों से गूंज उठा। वहीं आज सोमवार को  सांसारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक चरण में शुकदेव की विदाई का प्रसंग भगवान का यह व्यवहार इस बात का ग्रमाण है कि ईश्वर को धन प्रेम का ग्रतीक थीःनिर्धन सुनाया गया। सात दिनों तक राजा भंडार का आयोजन किया जाएगा ग्राह्मण
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