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#Qur'an and We #પોઝિટિવ વિચાર... #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion 24/4/5/26(2)
Qur'an and We - *अर्थः यह आयत सीधे तौर * पर हर चीज़ (विशेषकर भोजन और पानी) के योग्य और सीमित हुक्म देती है। इस्तेमाल का *सूरह अल-्फुरकान (२5:67):* * "और जो लोग खर्च करते हैं, तो न तो फुजूलखर्ची करते हैं और न ही कंजूसी करते हैं, बल्कि उनका खर्च इन दोनों के बीच संतुलन (योग्य) पर आधारित होता है।" अर्थः यह आयत एक आदर्श जीवनशैली बताती है, जहाँ न तो चीज़ों को बर्बाद किया जाता है और न ही उनकी कमी रखी जाती है, बल्कि '्योग्य' और संतुलित इस्तेमाल किया जाता है। *सूरह अल-्इसरा (17:26-27):* * "और फुजूलखर्ची (बेजा इस्तेमाल) से पूरी तरह बचो। बेशक, फुजूलखर्ची करने वाले शैतान के भाई हैं।" *अर्थः यह आयत सीधे तौर * पर हर चीज़ (विशेषकर भोजन और पानी) के योग्य और सीमित हुक्म देती है। इस्तेमाल का *सूरह अल-्फुरकान (२5:67):* * "और जो लोग खर्च करते हैं, तो न तो फुजूलखर्ची करते हैं और न ही कंजूसी करते हैं, बल्कि उनका खर्च इन दोनों के बीच संतुलन (योग्य) पर आधारित होता है।" अर्थः यह आयत एक आदर्श जीवनशैली बताती है, जहाँ न तो चीज़ों को बर्बाद किया जाता है और न ही उनकी कमी रखी जाती है, बल्कि '्योग्य' और संतुलित इस्तेमाल किया जाता है। *सूरह अल-्इसरा (17:26-27):* * "और फुजूलखर्ची (बेजा इस्तेमाल) से पूरी तरह बचो। बेशक, फुजूलखर्ची करने वाले शैतान के भाई हैं।" - ShareChat